कृषि विधेयकों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन करेगी कांग्रेस

नई दिल्ली: कृषि विधेयकों के खिलाफ कांग्रेस किसानों और गरीब लोगों के दो करोड़ हस्ताक्षर जुटाएगी और राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपेगी. के सी वेणुगोपाल न कहा है कि कृषि विधेयकों के खिलाफ कांग्रेस राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन करेगी. इस बात की घोषणा पार्टी महासचिवों और प्रभारियों की बैठक के बाद किया गया.

 

बता दें कि लोकसभा से पास होने के बाद रविवार को भारी हंगामे के बीच राज्यसभा से भी बिल पास हो गया. पंजाब और हरियाणा में जगह-जगह बिल के विरोध में किसान यूनियन और राजनीतिक दलों द्वारा प्रदर्शन किये जा रहे हैं.

 

वहीं बीजेपी की ओर से लगातर आरोप लगाया जा रहा है कि तीनों अध्यादेशों में जो बातें हैं वो कांग्रेस के घोषणापत्र में भी थीं, लेकिन अब कांग्रेस विरोध के नाम पर किसानों को भ्रमित कर रही है. इस आरोप के जवाब में कुमारी शैलजा ने कहा, “हमारे घोषणापत्र में 22 बातें कही गई थी. इनको इतना ही शौक है घोषणा पत्र पढ़ने का तो बाकी की 20 बातें भी लागू करते. सबसे गरीब के लिए हमने न्याय योजना लाने की बात की थी. हमारा घोषणा पत्र पढ़ के न्याय योजना क्यों नहीं लागू करते. अब सरकारी एजेंसियां कितना MSP देंगी या कितनी खरीद करेंगी इसके बारे में कुछ मालूम नहीं है. हम कह रहे थे कि आप 70% लोगों को खाद्य कानून के तहत अन्न दीजिये लेकिन वो लागू नहीं करेंगे. हमने कहा था कि हम बड़े गांव में मंडियां खोलना चाहते हैं, लेकिन आपने तो निजी हाथों में बेच दिया किसान को. आप हमारी आड़ लेकर देश को भ्रमित न करें.”

 

कृषि बिल के खिलाफ युवा कांग्रेस का प्रदर्शन

सड़क से लेकर संसद तक किसान बिल पर हो रहे घमासान के बीच सोमवार को जम्मू में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन किया. प्रदर्शन कर रहे युवा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार का यह बिल बड़ी कंपनियों को फायदा देने के लिए लाया गया है. जम्मू कश्मीर युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता ने जम्मू प्रेस क्लब के बाहर कृषि बिल के विरोध में मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी नेताओं का आरोप है कि मोदी सरकार की ओर से लाया गया किसान बिल किसानों के पक्ष में नहीं है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस बिल में जब तक एमएसपी तय नहीं होता तब तक इस बिल से सीधा फायदा बड़ी कंपनियों को होगा. युवा कांग्रेस ने आरोप लगाया कि देश के करीब 60% किसान इस बिल के विरोध में हैं. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार यह काला बिल बिना किसानों से सलाह मशविरा किए लेकर आई है.

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