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aaj ka jeevan mantra by pandit vijayshankar mehta, leo tolstoy story about ego, life management tips in hindi | योग्यता से ज्यादा आचरण को महत्व देना चाहिए, योग्यता इंसान को अहंकारी बना सकती है


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एक दिन पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता

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कहानी – रशियन विद्वान लियो टॉलस्टॉय के बारे में एक बात बहुत प्रसिद्ध थी कि वे हर काम बहुत ही सरलता से करते थे। उनकी सोच पूरी तरह आध्यात्मिक थी। वे आचरण को ज्यादा महत्व देते थे।

टॉलस्टॉय को एक असिस्टेंट की जरूरत थी। उन्होंने ये बात अपने दोस्तों को बताई। उनके एक मित्र ने एक युवक को टॉलस्टॉय के पास भेजा। मित्र ने टॉलस्टॉय से सिफारिश की थी कि ये युवक बहुत योग्य है। इसके पास बहुत सारी डिग्रियां हैं। मुझे लगता है कि आप इसे रखकर प्रसन्न होंगे।

सिफारिश टॉलस्टॉय के पास पहुंची और वह युवक भी पहुंच गया। टॉलस्टॉय ने उस युवक से कहा, ‘तुम्हें देर हो गई है, मैंने किसी और को रख लिया है।’

वह युवक टॉलस्टॉय के मित्र के पास पहुंचा और कहा, ‘आपने मेरी सिफारिश की, मुझे वहां भेजा, लेकिन उन्होंने तो किसी और को रख लिया है। जिसे उन्होंने नौकरी पर रखा है, वह हर हाल में मुझसे कम योग्य है, ये जानकारी मैं निकाल चुका हूं।’

टॉलस्टॉय का मित्र उनके पास पहुंचा और बोला, ‘मेरी सिफारिश के बाद भी आपने उस युवक को नहीं रखा। आपने ऐसे व्यक्ति को रखा है जो कम योग्य है। अभी भी आप उसे हटाकर ज्यादा योग्य व्यक्ति को रख सकते हैं। मैं जानना चाहूंगा कि आपने ऐसा क्यों किया?’

टॉलस्टॉय बोले, ‘ये सही है कि मैंने कम योग्य व्यक्ति को रखा है। तुमने जिस व्यक्ति को मेरे पास भेजा था, वह ज्यादा योग्य है, उसके पास सर्टीफिकेट्स भी ज्यादा हैं, लेकिन जब वह मेरे पास आया तो वह बड़ी अकड़ के साथ मेरे कमरे में दाखिल हुआ और मेरी अनुमति के बिना ही कुर्सी पर बैठ गया। मैं कुछ बोलता, उससे पहले ही उसने कहा कि बताइए मुझे क्या काम करना है? उसकी बातचीत का तरीका ऐसा था कि वह अपनी शर्तों पर काम करना चाहता है। योग्यता उसके माथे पर नाच रही थी। जिसे मैंने काम पर रखा है, जब वह पहली बार मेरे पास आया तो उसने बड़ी विनम्रता से कहा कि आप जो कहेंगे, वह मुझे करना है। मैं आपके साथ रहकर योग्य हो जाऊंगा। मैं काम भी करूंगा और आपसे ज्ञान भी हासिल करूंगा। मैंने आचरण के कारण उस कम योग्य व्यक्ति को रखा है।’

सीख – जब भी हम कोई काम शुरू करें तो पहले अपने आचरण की विनम्रता को देखें। योग्यता को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। योग्यता का घमंड करेंगे तो टॉलस्टॉय जैसे विद्वान लोग ये बात तुरंत समझ जाएंगे और हमारा काम शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाएगा।

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