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aaj ka jeevan mantra by pandit vijayshankar mehta, motivational story of dayanand saraswati, prerak prasang | जब भी कोई काम करें तो मकसद एकदम स्पष्ट होना चाहिए, किसी के बहकावे में न आएं


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7 घंटे पहले

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कहानी – दयानंद सरस्वती अंधविश्वास दूर करने के लिए बहुत प्रभावशाली व्याख्यान देते थे। जो लोग उनकी बातें सुनते थे, वे उनसे सहमत हो जाते थे।

एक दिन बड़ा अंग्रेज अधिकारी भी सरस्वतीजी का व्याख्यान सुन रहा था। अधिकारी उनसे इतना प्रभावित हुआ कि उसने अकेले में सरस्वतीजी से कहा, ‘आप अंधविश्वास पर इतना अच्छा बोलते हैं कि मुझे लगता है मैं भारतीय हो जाऊं और आपको फॉलो करूं। बताइए, मैं आपके लिए क्या सेवा कर सकता हूं?’

सरस्वतीजी ने कहा, ‘आप मेरे लिए क्या कर सकते हैं?’

अंग्रेज ने कहा, ‘मैं आपकी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त बल दे सकता हूं। मैंने देखा है कि जब आप कुरीतियों और अंधविश्वास पर बोलते हैं तो काफी लोग आपसे नाराज हो जाते हैं। आप पर हमला हो सकता है। मैं आपको अतिरिक्त सुरक्षा बल दे दूंगा।’

थोड़ा सोचने के बाद सरस्वतीजी बोले, ‘मैं भगवान का काम कर रहा हूं तो मेरी रक्षा भी वही परम शक्ति करेगी। मुझे आपके सैनिकों की जरूरत नहीं है।’

अंग्रेज अधिकारी ने फिर कहा, ‘आप एक काम करें। आप इतना अच्छा बोलते हैं तो बीच-बीच में हमारी अंग्रेज सरकार की भी प्रशंसा करें। काम तो हम भी बहुत अच्छे कर रहे हैं। कुछ काम तो ऐसे भी किए हैं, जिनसे अंधविश्वास दूर होता है तो आप हमारी भी तारीफ कर दीजिए।’

दयानंद सरस्वती ने मुस्कान के साथ कहा, ‘मैं यही सोच रहा था कि आप मेरे प्रति इतनी सहानुभूति क्यों प्रकट कर रहे हैं? अगर आप सचमुच मेरी मदद करना चाहते हैं तो एक काम करें, आप भारत छोड़कर चले जाएं। मेरे लिए स्वतंत्रता और अंधविश्वास दो अलग-अलग बातें हैं। मैं अंधविश्वास पर प्रहार करता हूं और आजादी की मांग भी करता हूं। मैं आपके बहकावे में नहीं आ सकता। मुझे मेरा मकसद स्पष्ट रूप से मालूम है।’

सीख – जब भी कोई काम करो, चाहे बोलकर करो या बिना बोले, मकसद स्पष्ट होना चाहिए। हमें कब, क्या और कितना बोलना है, ये हमेशा ध्यान रखें। किसी के बहकावे में आकर ऐसी बात न करें, जो हमारे मकसद के विपरीत हैं।

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