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aaj ka jeevan mantra by pandit vijayshankar mehta, story of lord krishna and shivji, krishna story | संतान के स्वभाव को देखकर समझ सकते हैं, वे भविष्य में क्या करेंगे


13 घंटे पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता

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कहानी – गोकुल में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जा रहा था। कृष्ण बहुत छोटे थे। भगवान शिव ने सोचा कि इस जन्मोत्सव में मुझे भी जाना चाहिए। वहां जाकर भगवान विष्णु के अवतार के बाल स्वरूप कृष्ण के दर्शन करने चाहिए। ये मेरा सौभाग्य होगा।

शिव जी वेष बदल कर गोकुल पहुंच गए। वे एक ऐसे साधु के स्वरूप में थे जो लोगों को उनका भविष्य बताता है। यशोदा के दरवाजे पर खड़े होकर साधु ने कहा, ‘मैं इस बच्चे का भविष्य बता सकता हूं, लेकिन पहले इसे मेरी गोद में देना होगा।’ साधु का स्वरूप ऐसा था कि कोई भी मां अपने बच्चे को उनकी गोद में देना नहीं चाहेगी, लेकिन कृष्ण का भविष्य जानने की उत्सुकता में यशोदा ने बालकृष्ण को साधु की गोद में दे दिया।

साधु स्वरूप में शिव जी ने कृष्ण को गोद में लेकर उनके पैरों को स्पर्श किया। यशोदा ने कहा, ‘आप पैरों को क्यों देख रहे हैं? हाथ देखकर इसका भविष्य बताएं।’

साधु ने कहा, ‘हम पैरों की रेखाएं देखकर भविष्य बताते हैं। तीन बातें दिख रही हैं। पहली, ये बच्चा बड़ा होकर बहुत दूर जाएगा। दूसरी, ये बहुत यात्राएं करेगा। तीसरी, ये धरती पर धर्म की स्थापना करेगा।’

ये बात सुनते ही यशोदा ने बच्चे को साधु से तुरंत ले लिया और कहा, ‘बाबा तुम जाओ।’

यशोदा चिंतित हो गईं कि ये दूर चला जाएगा तो मेरा क्या होगा? यशोदा बहुत समझदार मां थीं। उन्हें समय रहते ये संकेत मिल गए थे कि घर में जो बालक आया है, वह एक दिन दूर जाएगा, बड़ा काम भी करेगा और यात्राएं करेगा। यशोदा ने कृष्ण का पालन करते समय इन तीनों बातों का ध्यान रखा।

सीख – यशोदा ने हमें ये सीख दी है कि माता-पिता को बचपन से ही बच्चों के बारे में कुछ संकेत मिलने लगते हैं। समझदार माता-पिता इन संकेतों से समझ जाते हैं कि बच्चे बड़े होकर कौन-कौन से काम कर सकते हैं। माता-पिता को इन संकेतों को ध्यान में रखकर बच्चों का पालन करना चाहिए।

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