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Advice to Sidhu’s government on power crisis, take action on private thermal plants that do not stock coal for 30 days; negotiate solar power | 30 दिन का कोयला स्टॉक न करने वाले प्राइवेट थर्मल प्लांटों पर जुर्माना लगाओ; सोलर बिजली समझौते करें


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जालंधर42 मिनट पहले

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नवजोत सिद्धू। - Dainik Bhaskar

नवजोत सिद्धू।

कोयले की कमी से संकट में घिरे पंजाब पर नवजोत सिद्धू ने अपनी ही सरकार को नसीहत दी है। सिद्धू ने कहा कि सरकार को बाद में पछताने और मरम्मत के बजाय पहले इसकी निगरानी और निपटने की तैयारी करनी चाहिए। तय हिदायतों के मुताबिक 30 दिन का कोयला स्टॉक न रख घरेलू उपभोक्ताओं को परेशान कर रहे प्राइवेट थर्मल प्लांटों पर जुर्माना लगाना चाहिए। इसके अलावा अब सरकार को तीव्र गति से सोलर बिजली खरीद के समझौते करने चाहिए। इसके अलावा छत के ऊपर सोलर पैनल लगा इन्हें बिजली ग्रिड से जोड़ा जाना चाहिए। सिद्धू ने यह सुझाव बिजली विभाग देख रहे CM चरणजीत चन्नी को सीधे देने के बजाय सोशल मीडिया पर डाला है।

बिजली मुद्दे पर मुखर रहे सिद्धू लेकिन कुछ न कर सके

पंजाब में बिजली को लेकर सिद्धू हमेशा मुखर रहे हैं। सिद्धू कहते रहे हैं कि अकाली-भाजपा सरकार के गलत बिजली समझौतों (PPA) की वजह से लोगों को महंगी बिजली मिल रही है। जो बिजली 3 से 5 रुपए यूनिट मिलनी चाहिए, उसके लिए 11 रुपए देने पड़ रहे हैं। सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को इसका जिम्मेदार ठहराया। हालांकि अब कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम की कुर्सी से हटाने के बावजूद न तो बिजली सस्ती हुई और न ही बिजली समझौते रद्द हुए। सिद्धू कहते रहे कि विधानसभा सेशन बुलाकर बिजली समझौते रद्द किए जाएं। जिसको लेकर अब खुद सिद्धू और कैप्टन की जगह पर नए सीएम बने चरणजीत चन्नी घिरते जा रहे हैं।

सिद्धू का ट्वीट।

सिद्धू का ट्वीट।

पहली कैबिनेट से पहले भी जोश में थे सिद्धू

चरणजीत चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली कैबिनेट मीटिंग से पहले सिद्धू ने उनके साथ मीटिंग की थी। बाहर आकर सिद्धू ने कहा कि कैबिनेट में बिजली पर बड़ा फैसला आ रहा है। हालांकि सीएम चन्नी ने 2 किलोवाट तक के बकाया बिजली बिल माफ करने की घोषणा की। इसके अलावा बकाया न भरने पर कटे करीब एक लाख कनेक्शन जोड़ने को कहा। इसमें कहीं भी बिजली समझौते रद्द करने या हर घर को 3 से 5 रुपए यूनिट बिजली देने की बात नहीं थी।

सरकार में नहीं चल रही सिद्धू की

सिद्धू ने जिद करके कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम की कुर्सी से हटवा दिया। इसके बाद सिद्धू को उम्मीद थी कि नई सरकार को वो अपने ढंग से चलाएंगे। हालांकि इसके कुछ वक्त बाद ही मनमुटाव शुरू हो गया। खासकर, डीजीपी और एडवोकेट जनरल की नियुक्ति पर चन्नी सरकार ने सिद्धू के सुझाव दरकिनार कर दिए। इस वजह से सिद्धू पंजाब कांग्रेस के प्रधान पद से इस्तीफा तक दे चुके हैं। सरकार कोई सिफारिश नहीं मान रही तो सिद्धू अब सोशल मीडिया के जरिए ही संवाद करने को मजबूर हो चुके हैं।

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