Akhilesh Yadav Attacked On Bjp In Style Of Poetry About Farmers Protest Delhi – अखिलेश यादव का शायराना अंदाज में भाजपा पर हमला, ‘सियासत तू है कमाल, उठाके रास्ते में दीवार, बिछाकर कंटीले तार…’


सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव।
– फोटो : amar ujala

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शेरो-शायरी के माध्यम से किसानों के मुद्दे पर सरकार का निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट किया है-सियासत तू है कमाल, उठाके रास्ते में दीवार, बिछाकर कंटीले तार, कहती है आ करें बात। आखिर में उन्होंने लिखा है कि किसानों को भाजपा नहीं चाहिए।

ट्रेडिंग कंपनी में हो चुका है भाजपा का रूपांतरण
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि केंद्र सरकार का यह बजट नहीं, मायूसी का दस्तावेज है। बजट में मिले धोखे को किसान, नौजवान, छोटा कारोबारी और नौकरी पेशा कोई भी भूल नहीं पाएगा। चुनाव से पहले भाजपा ने जुमले और सपने बेचे। सरकार बनने के बाद अब वह जमीन से लेकर जमीर तक बेचने पर आमादा हो गई है। भाजपा का रूपांतरण ट्रेडिंग कंपनी के रूप में हो गया है।

अखिलेश ने कहा कि बड़े-बड़े अर्थशास्त्री भी बजट में माइक्रोस्कोप लगाकर भी किसी के लिए अच्छे दिन नहीं ढूंढ पा रहे हैं। पेट्रोल-डीजल पर अतिरिक्त सेस, यूरिया सब्सिडी और पोषण आधारित सामग्री पर सब्सिडी आवंटन में भारी कटौती कृषि विनाशक नीतियों का परिचायक है। उसका काम विपक्षी विधायकों की खरीद-फरोख्त और राष्ट्रीय संपत्तियों को चंद घरानों को देकर रकम एकत्र करना रह गया है।

भाजपा सरकार की तमाम घोषणाएं सिर्फ  रोकड़ा बटोरने की कोशिश साबित होंगी। भाजपा समझती है कि किसानों का दिल खेती में नहीं, टैबलेट में बसता है। वित्तमंत्री ने अपना बजट भाषण इस बार टैबलेट से ही पढ़ा था। आखिर किसान उनके टैबलेट का क्या करेंगे? प्रधानमंत्री कहते हैं कि उनके दिल में किसान-गांव। इससे बड़ा किसानों का कोई मजाक नहीं हो सकता।

अखिलेश ने कहा कि मनरेगा के मद में आंवटन 30 प्रतिशत कम कर दिया गया है। ग्रामीण परिवारों पर इससे बड़ा दबाव बढ़ेगा। भारत सरकार उन राज्यों को झांसे में लेना चाहती है, जहां चुनाव होने हैं। जहां चुनाव नहीं होने है, उनकी उपेक्षा कर दी गई है। युवाओं को काम देने की दिशा में यह बजट निराशा के संकेत देता है। युवाओं को स्वामी विवेकानंद का पाठ पढ़ाने वाले प्रधानमंत्री नौजवानों के हाथों में नई नियुक्तियों के पत्र भी नहीं थमा पा रहे हैं।

मंहगाई 31 प्रतिशत बढ़ गई है, जबकि किसान के लिए समर्थन मूल्य में डेढ़ गुना रकम अदा करने का दावा हवाई साबित हो जाता है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2022 में जनता उसे सचमुच ‘अच्छे दिन’ दिखाएगी, जब भाजपा सत्ता से बाहर खुले वातावरण में सांस लेने का सुख हासिल करेगी।

राही मासूम रजा की पत्नी के निधन पर अखिलेश ने जताया शोक
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रगतिशील साहित्यकार एवं टीवी धारावाहिक ‘महाभारत’ के संवाद एवं पटकथा लेखक डॉ. राही मासूम रजा की पत्नी नैय्यर रजा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। वह 90 वर्ष की थीं। नैय्यर रजा पिछले कुछ समय से बीमार थीं और उनका अमेरिका के न्यू जर्सी में निधन हुआ है।

सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शेरो-शायरी के माध्यम से किसानों के मुद्दे पर सरकार का निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट किया है-सियासत तू है कमाल, उठाके रास्ते में दीवार, बिछाकर कंटीले तार, कहती है आ करें बात। आखिर में उन्होंने लिखा है कि किसानों को भाजपा नहीं चाहिए।

ट्रेडिंग कंपनी में हो चुका है भाजपा का रूपांतरण

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि केंद्र सरकार का यह बजट नहीं, मायूसी का दस्तावेज है। बजट में मिले धोखे को किसान, नौजवान, छोटा कारोबारी और नौकरी पेशा कोई भी भूल नहीं पाएगा। चुनाव से पहले भाजपा ने जुमले और सपने बेचे। सरकार बनने के बाद अब वह जमीन से लेकर जमीर तक बेचने पर आमादा हो गई है। भाजपा का रूपांतरण ट्रेडिंग कंपनी के रूप में हो गया है।

अखिलेश ने कहा कि बड़े-बड़े अर्थशास्त्री भी बजट में माइक्रोस्कोप लगाकर भी किसी के लिए अच्छे दिन नहीं ढूंढ पा रहे हैं। पेट्रोल-डीजल पर अतिरिक्त सेस, यूरिया सब्सिडी और पोषण आधारित सामग्री पर सब्सिडी आवंटन में भारी कटौती कृषि विनाशक नीतियों का परिचायक है। उसका काम विपक्षी विधायकों की खरीद-फरोख्त और राष्ट्रीय संपत्तियों को चंद घरानों को देकर रकम एकत्र करना रह गया है।

भाजपा सरकार की तमाम घोषणाएं सिर्फ  रोकड़ा बटोरने की कोशिश साबित होंगी। भाजपा समझती है कि किसानों का दिल खेती में नहीं, टैबलेट में बसता है। वित्तमंत्री ने अपना बजट भाषण इस बार टैबलेट से ही पढ़ा था। आखिर किसान उनके टैबलेट का क्या करेंगे? प्रधानमंत्री कहते हैं कि उनके दिल में किसान-गांव। इससे बड़ा किसानों का कोई मजाक नहीं हो सकता।

अखिलेश ने कहा कि मनरेगा के मद में आंवटन 30 प्रतिशत कम कर दिया गया है। ग्रामीण परिवारों पर इससे बड़ा दबाव बढ़ेगा। भारत सरकार उन राज्यों को झांसे में लेना चाहती है, जहां चुनाव होने हैं। जहां चुनाव नहीं होने है, उनकी उपेक्षा कर दी गई है। युवाओं को काम देने की दिशा में यह बजट निराशा के संकेत देता है। युवाओं को स्वामी विवेकानंद का पाठ पढ़ाने वाले प्रधानमंत्री नौजवानों के हाथों में नई नियुक्तियों के पत्र भी नहीं थमा पा रहे हैं।

मंहगाई 31 प्रतिशत बढ़ गई है, जबकि किसान के लिए समर्थन मूल्य में डेढ़ गुना रकम अदा करने का दावा हवाई साबित हो जाता है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2022 में जनता उसे सचमुच ‘अच्छे दिन’ दिखाएगी, जब भाजपा सत्ता से बाहर खुले वातावरण में सांस लेने का सुख हासिल करेगी।

राही मासूम रजा की पत्नी के निधन पर अखिलेश ने जताया शोक

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रगतिशील साहित्यकार एवं टीवी धारावाहिक ‘महाभारत’ के संवाद एवं पटकथा लेखक डॉ. राही मासूम रजा की पत्नी नैय्यर रजा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। वह 90 वर्ष की थीं। नैय्यर रजा पिछले कुछ समय से बीमार थीं और उनका अमेरिका के न्यू जर्सी में निधन हुआ है।



Source link

Share:

Share on facebook
Share on twitter
Share on pinterest
Share on linkedin
Share on whatsapp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *