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Anil Deshmukh Corruption Case; Supreme Court Refuses To Stay Enforcement Directorate Investigation | सुप्रीम कोर्ट ने ED की जांच रोकने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने से किया इनकार, 4 समन के बाद भी पूर्व गृहमंत्री नहीं हुए पेश


मुंबई2 घंटे पहले

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अनिल देशमुख को ईडी ने कई बार पूछताछ के लिए समन भिजवाया लेकिन देशमुख हाजिर नहीं हुए। - Dainik Bhaskar

अनिल देशमुख को ईडी ने कई बार पूछताछ के लिए समन भिजवाया लेकिन देशमुख हाजिर नहीं हुए।

महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख की मुश्किलें बढ़ने वाली है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बड़ा झटका देते हुए प्रवर्तन निदेशालय द्वारा शुरू की गई जांच पर रोक लगाने से मना कर दिया। ED ने देशमुख के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर उनके PA और PS को पिछले दिनों अरेस्ट किया था। चार बार समन भेजने के बावजूद देशमुख इस मामले में ED के सामने पेश नहीं हुए हैं। हर बार उनके वकील इंद्रपाल सिंह ED ऑफिस पहुंचे और 75 साल के देशमुख के पेश होने पर असमर्थता जताई।

देशमुख ने सुप्रीम कोर्ट से जांच को स्थगित करने, गिरफ्तारी पर रोक लगाने और समन रद्द करने की मांग की थी। अब याचिका खारिज होने के बाद देशमुख पर गिरफ्तारी की तलवार लटकती नजर आ रही है। देशमुख की मांग ठुकराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रावधानों में रह कर ही कानूनी उपाय किए जा सकते हैं। प्री अरेस्ट बेल के लिए वे मुंबई के स्थानीय न्यायालय में अपील करें। इस बारे में स्थानीय अदालत ही फैसले लेती है. सुप्रीम कोर्ट इसमें उनकी कोई मदद नहीं कर सकता।

4.7 करोड़ की संपत्ति हुई है कुर्क
इससे पहले भी उनकी पत्नी और बेटे को पूछताछ के लिए बुलाया जा चुका है, लेकिन वे सुनवाई के लिए एक बार भी हाजिर नहीं हुए। ईडी ने अनिल देशमुख के कई ठिकानों पर छापेमारी कर 4.20 करोड़ की संपत्ति जब्त की है। ईडी ने दावा किया था कि अनिल देशमुख ने बार मालिकों से पुलिस अधिकारी सचिन वाजे द्वारा 4.70 करोड़ रुपए की वसूली करवाई। सचिन वाजे ने यह रकम उन्हें दी। इस रकम को अनिल देशमुख ने अपने बिजनेस में इंवेस्ट किया।

ED पर देशमुख ने लगाया था गंभीर आरोप
अनिल देशमुख ने ED को लिखे अपने पत्र में कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी द्वारा अपनी ताकत और अधिकारों का गलत इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि अभी तक मुझे ECIR की कॉपी ED की तरफ से या कोई भी दस्तावेज नहीं दिए गए हैं। जिससे साफ होता है कि यह समन केवल मीडिया में सनसनी फैलाने के लिए भेजा गया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के 1 दिन पहले ED ने जो समन भेजा है, उससे मेरा डर और पुख्ता हो गया है कि ED की जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रही है।

इससे पहले सीबीआई के मामले में भी मिल चुका है झटका
इससे पहले ठाकरे सरकार ने अनिल देशमुख प्रकरण में कोर्ट का रुख किया था। सीबीआई ने अनिल देशमुख के विरोध में केस दर्ज किया था। राज्य सरकार ने मांग की थी कि इस केस से जुड़े दो पैराग्राफ रद्द किए जाएं। राज्य सरकार ने इसके लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। लेकिन यह याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठुकरा दी और अब ईडी वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी देशमुख को झटका दे दिया है।

CBI भी कर रही है देशमुख की जांच
मुंबई पुलिस के पूर्व पुलिस आयुक्त और वर्तमान में होम गार्ड DG परमबीर सिहं ने अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपये की वसूली का आरोप लगाया है, जिसके लिए अनिल देशमुख को महाराष्ट्र के गृहमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

इस मामले में देशमुख के खिलाफ पहले CBI ने केस दर्ज किया था और फिर उसमें मनी ट्रेल की जानकारी मिलने के बाद ED की एंट्री हुई। ED ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। CBI दो बार देशमुख के ठिकानों पर छापेमारी भी कर चुकी है।

देशमुख के PA और PS हुए हैं अरेस्ट
इस मामले में देशमुख के PA संजीव पलांडे और PS कुंदन शिंदे को अरेस्ट किया था, दोनों फिलहाल केंद्रीय एजेंसी की कस्टडी में हैं। इन पर आरोप हैं कि ये इन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग में देशमुख की मदद की थी। देशमुख ने ED की पूछताछ से बचने के लिए एक पत्र लिखा था।

ED ने जब्त की थीं देशमुख की दो प्रॉपर्टी
इसी मामले में 15 दिन पहले देशमुख और उनके परिवार की 4.2 करोड़ रुपए की संपत्ति को जब्त किया गया था। इसमें नागपुर का एक फ्लैट और पनवेल की एक जमीन शामिल है। इसी मामले में देशमुख के PA संजीव पलांडे और PS कुंदन शिंदे को अरेस्ट किया था, दोनों फिलहाल केंद्रीय एजेंसी की कस्टडी में हैं।

परमबीर सिंह के आरोप के बाद शुरू हुई है जांच
यह मामला देशमुख पर लगे वसूली के आरोपों से जुड़ा है। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने करीब ढाई महीने पहले राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया था कि अनिल देशमुख ने ही मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी सचिन वझे को हर महीने 100 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट दिया था।

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