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Anti-covid drug will be made in the country on the lines of anti-venom, trials on three thousand horses are successful, trials will be done on humans soon. | एंटी वेनम की तर्ज पर देश में ही बनेगी एंटी कोविड ड्रग, तीन हजार घोड़ों पर ट्रायल सफल, इंसानाें पर जल्द होगा परीक्षण


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हैदराबाद15 मिनट पहलेलेखक: प्रमोद त्रिवेदी

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सीसीएमबी के डायरेक्टर डॉ मिश्� - Dainik Bhaskar

सीसीएमबी के डायरेक्टर डॉ मिश्�

  • सीसीएमबी हैदराबाद और विन्स बायोटेक मिलकर काेरोनावायरस की दवा बना रही

कोरोना से जंग के बीच एक अच्छी खबर आई है। जहर के असर को खत्म करने वाली तकनीक के आधार पर कोरोनावायरस को खत्म करने के लिए देश की पहली मान्यता प्राप्त दवा का ह्यूमन ट्रायल शुरू होने जा रहा है। भारत सरकार की सेल्युलर और आणविक जीव विज्ञान (सीसीएमबी) ने जहर की दवा बनाने वाली कंपनी विन्स बायोटेक के साथ मिलकर कोरोना की दवा बनाई है, जिसका घोड़ों पर ट्रायल सफल रहा है। सीसीएमबी के डायरेक्टर डॉ राकेश के मिश्रा के अनुसार हमने जिनोम सिक्वेंसिंग लैब में कोरोनावायरस बनाया और उसको कल्चर किया। वायरस कल्चर करने के बाद उस वायरस को डेड किया।

इस डेड वायरस को घोड़ों में इंजेक्ट किया। 15 दिन और 25 दिन में देखा कि घोड़ों में एंटीबॉडी बन गई है। विन्स बायोटेक के साथ मिलकर ऐसे 3 हजार घोड़ों पर ट्रायल किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा। इस ट्रायल के बाद विन्स ने डीसीजीआई (ड्रग कंट्रोल जनरल ऑफ इंडिया) को ह्मूमन ट्रायल के लिए एप्लाई किया है। उम्मीद है एक-दो िदन में अप्रूवल मिल जाएगा। ये डीसीजीआई से अप्रूव होने वाला कोरोना का पहला ड्रग होगा।

सीसीएमबी के डायरेक्टर डॉ मिश्रा और वैज्ञानिक प्रो. पूरनसिंह सिजवाली बताते हैं कि ये प्रयोग जहर को मारने वाली यानी एंटी वेनम तकनीक पर किया जा रहा है। इसमें बहुत कम मात्रा में घोड़े के शरीर में कोबरा का जहर इंजेक्ट किया जाता है। इस जहर के खिलाफ घोड़े में एंटीबॉडी बन जाती है। एंटीबॉडी बनने के बाद घोड़े के खून को निकालकर एंटीबॉडी प्यूरीफाई करते हैं। वो एंटीबॉडी उस व्यक्ति को इंजेक्ट करते हैं, जिसे सांप ने काटा है।

उम्मीद: एक घोड़े के खून से हजारों लोगों के लिए दवा बनाई जा सकेगी
वैज्ञानिकों के अनुसार इंसान में भी इनएक्टिव वायरस को इंजेक्ट करके एंटीबॉडी बनाई जा सकती है, लेकिन आदमी के शरीर से इतना खून नहीं निकाल सकेंगे जिससे हजारों लोगों के लिए दवा बन सके। जबकि घोड़े के शरीर से 2 लीटर खून कई बार निकाल सकते है। इससे हजारों लोगों के लिए दवा बन सकती है।

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