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Bahubali Shahabuddin of Bihar was sentenced to life imprisonment for the first time today. | जर्मनी के सरेंडर के बाद यूरोप में खत्म हुआ था दूसरा विश्व युद्ध; मनता है V-E Day यानी ‘विक्ट्री ऑफ यूरोप डे’


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40 मिनट पहले

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आज यूरोप के अलग-अलग देश दूसरे विश्व युद्ध के समाप्त होने की 76वीं सालगिरह मना रहे हैं। यूरोप के ज्यादातर देश कोरोनावायरस की गिरफ्त में है। इस वजह से यूरोप में हर साल मनने वाला वीडे यानी विक्ट्री ऑफ यूरोप डे का जश्न फीका है।

8 मई यूरोप में V-E Day यानी ‘जीत के दिन’ के तौर पर मनाया जाता है। दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी की नाजी सेना की हार को 8 मई को जश्न के तौर पर पूरे यूरोप में आम तौर पर जश्न का माहौल होता है। 8 मई 1945 को छह साल चले युद्ध के बाद ब्रिटेन और गठबंधन सेनाओं के सामने जर्मनी की नाजी सेना ने बिना किसी शर्त सरेंडर किया था। हालांकि, इस दिन विश्व युद्ध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था क्योंकि गठबंधन सेनाएं जापान को अगस्त 1945 तक परास्त नहीं कर सकी थीं। 2 सितंबर 1945 को आधिकारिक तौर पर द्वितीय विश्वयुद्ध का अंत माना जाता है।

यूरोप में ‘V-E Day’ पर कई रंगारंग कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इन कार्यक्रमों में विश्व युद्ध के उन दिग्गजों को सार्वजनिक श्रद्धांजलि दी जाती है जिन्होंने यूरोप को नाजीवाद से मुक्त कराया था। एक अनुमान के मुताबिक़ दूसरे विश्व युद्ध में कम से कम 5 करोड़ लोगों की मौत हुई थी जिनमें से ढाई करोड़ सोवियत सेना के जवान और वहां के नागरिक थे।

2007ः शहाबुद्दीन को हुई थी उम्रकैद

7 फरवरी 1999 को बिहार में एक CPI(ML) कार्यकर्ता को किडनैप कर लिया गया। जिसका आज तक कोई पता नहीं चला। उस कार्यकर्ता के परिजनों ने 3 लोगों का नाम एफआईआर में लिखवाया। जिनमें से एक नाम था शहाबुद्दीन। ये शुरुआत थी उस अपराधी पर लगाम लगाने की जिसने अपने जीवन में अनगिनत अपराध किए। इस मामले में आज ही के दिन 2007 में शहाबुद्दीन को सीवान की कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साल 1990 के विधानसभा चुनाव में शहाबुद्दीन निर्दलीय जीता। फिर लालू यादव से नजदीकियां बढ़ीं और 1996 में शहाबुद्दीन सांसद बना और लोकसभा पहुंच गया।

1990 के दशक में शहाबुद्दीन का यह फोटो, जो उसने अपने गुर्गों क साथ खिंचवाया था।

1990 के दशक में शहाबुद्दीन का यह फोटो, जो उसने अपने गुर्गों क साथ खिंचवाया था।

वैसे तो शहाबुद्दीन के अपराधों की फेहरिस्त काफी लंबी है, लेकिन 16 अगस्त 2004 में सीवान में हुए एसिड कांड को शहाबुद्दीन का क्रूरतम अपराध कहा जा सकता है। सीवान में एक किराना व्यापारी थे – चंद्रशेखर प्रसाद। इस दिन ये किसी काम से सीवान से बाहर गए हुए थे और दुकान इनके 3 बेटे- सतीश, गिरीश और राजीव संभाल रहे थे। शहाबुद्दीन के लोग दुकान पर पहुंचे और रंगदारी मांगने लगे। सतीश ने विरोध किया तो मारपीट शुरू हो गई। गुंडे तीनों भाइयों को पकड़कर अपने साथ ले गए और खंभे से बांधकर एसिड से नहला दिया। दो भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई और राजीव किसी तरह वहां से भाग निकले। वो इस घटना के चश्मदीद गवाह थे, लेकिन बाद में उनकी भी हत्या कर दी गई। 9 दिसंबर 2015 को इस मामले में भी शहाबुद्दीन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। 15 फरवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने शहाबुद्दीन को सीवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में शिफ्ट कर दिया था। तब से वो यहीं बंद था। 1 मई 2021 को कोरोना की वजह से शहाबुद्दीन का निधन हो गया।

1794: ऑक्सीजन और हाइड्रोजन गैस की पहचान करने वाले वैज्ञानिक एंटोनियो लेवाइजर का निधन

वैज्ञानिक एंटोनियो लेवाइजर

वैज्ञानिक एंटोनियो लेवाइजर

जिस ऑक्सीजन के लिए आज पूरे भारत में हाहाकार मचा है, उसकी खोज करने वाले वैज्ञानिक का आज ही के दिन 1794 में निधन हुआ था। दरअसल सबसे पहले ऑक्सीजन गैस की खोज 1772 में स्वीडन के कार्ल विल्हेम शीले नामक वैज्ञानिक ने की थी। कार्ल शीले ने पोटेशियम नाइट्रेट को गर्म करके ऑक्सीजन गैस प्राप्त की थी। हालांकि उन्होंने अपनी खोज को कहीं प्रकाशित नहीं किया। इसके 2 साल बाद साल 1774 में रसायन विज्ञानी जोसेफ प्रिस्टले ने Mercuric Oxide का थर्मल डीकंपोजिशन किया और ऑक्सीजन प्राप्त की। 1775-80 के दौरान एक और वैज्ञानिक एंटोनियो लेवाइजर ने ऑक्सीजन की खोज में महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने ही वस्तुओं के जलने और सांस लेने में ऑक्सीजन की भूमिका पता की। ऑक्सीजन को एक रासायनिक तत्व के रूप में खोजने का श्रेय भी लेवाइजर को ही जाता है।

1984: सोवियत संघ ने लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक खेलों का बहिष्कार किया

आज ही के दिन साल 1984 में लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक खेलों में सोवियत संघ ने अपने खिलाड़ियों को भेजने से इनकार कर दिया। सोवियत संघ ने इसके पीछे खिलाड़ियों की सुरक्षा का हवाला दिया, लेकिन मामला कुछ और था। दरअसल इस पूरे मामले की शुरुआत 1979 से हुई थी। इस दौरान अफगानिस्तान में कम्युनिस्ट सरकार थी। इस सरकार का पुरजोर विरोध हो रहा था और इनमें सबसे आगे मुजाहिदीन लड़ाके थे। कहा जाता है कि इन लड़ाकों को अमेरिका का समर्थन था। कम्युनिस्ट सरकार के समर्थन में सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया। अमेरिका को ये बात बुरी लगी और उसने अगले साल मॉस्को में होने वाले ओलंपिक खेलों का बहिष्कार कर दिया। इसी के जवाब में सोवियत संघ ने 1984 के ओलंपिक का बहिष्कार कर दिया।

इतिहास में 8 मई के दिन और क्या-क्या घटनाएं हुई थीं-

  • 2018: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान न्यूक्लियर डील से बाहर निकलने की घोषणा की।
  • 2010: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने बीजापुर- भोपालपट्टनम राष्ट्रीय राजमार्ग-16 पर सीआरपीएफ के वाहन को बारूदी सुरंग विस्फोट कर उड़ा दिया। इस घटना में आठ जवान शहीद हो गए।
  • 1980: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेचक के उन्मूलन की घोषणा की।
  • 1933: महात्मा गांधी ने ब्रिटिश शासन की नीतियों के खिलाफ 21 दिन का उपवास शुरू किया।
  • 1828: मानव सेवा के कार्यों के लिए पहले नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित हेनरी डयूनेन्ट का जन्म।

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