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Ban on contesting elections for having more than two children, beef ban, administrator says – change is necessary | दो बच्चों से ज्यादा होने पर चुनाव लड़ने पर रोक, बीफ पर प्रतिबंध, प्रशासक बाेले- बदलाव जरूरी है


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2 घंटे पहलेलेखक: तिरुअनंतपुरम से के.ए. शाजी

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प्रशासक प्रफुल्ल पटेल जहां इन बदलावों को विकास के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं स्थानीय लोगों का कहना है इससे उनके वजूद पर संकट पैदा हो जाएगा। - Dainik Bhaskar

प्रशासक प्रफुल्ल पटेल जहां इन बदलावों को विकास के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं स्थानीय लोगों का कहना है इससे उनके वजूद पर संकट पैदा हो जाएगा।

केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप में कुछ दिनों से बीफ बैन, दो बच्चों से ज्यादा वालों के पंचायत चुनाव लड़ने पर पाबंदी, बिना कारण बताए गिरफ्तारी और भूमि अधिग्रहण से जुड़े नियमों का स्थानीय लोग बड़े पैमाने पर विरोध कर रहे हैं। प्रशासक प्रफुल्ल पटेल जहां इन बदलावों को विकास के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं स्थानीय लोगों का कहना है इससे उनके वजूद पर संकट पैदा हो जाएगा।

एंड्रोट द्वीप के एमएच सैयद कहते हैं कि इस द्वीप में इंसानी रिहाइश सातवीं सदी से शुरू हुई और तब से जीविकोपार्जन का आधार मछली पकड़ना और नारियल की खेती रहा है। नए बदलावों से हमारा काम प्रभावित हुआ है। उन इलाकों में मछली पकड़ने, नाव और जाल रखने से वंचित किया जा रहा है, जहां पारंपरिक रूप से ऐसा होता आया है।

गुजरात के पूर्व गृहमंत्री प्रफुल्ल पटेल को 5 दिसंबर 2020 को लक्षद्वीप का प्रशासक नियुक्त किया गया। इसके बाद जो पहला बड़ा बदलाव उन्होंने किया वह कोविड से जुड़ा था। पहले कोच्चि से यहां आने वालों को आठ दिन क्वारंटाइन होना पड़ता था। इसे बदलकर 48 घंटे पहले की आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट देने का नियम बना दिया गया। आरोप है कि इससे यहां कोविड मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी।

इस साल 29 जनवरी को एंटी सोशल एक्टिविटी रेग्युलेशन ड्राफ्ट लाया गया। इसके तहत कानून-व्यवस्था के नाम पर किसी व्यक्ति को एक साल तक बिना ट्रायल हिरासत में रखने का प्रावधान है। इसके बाद 25 फरवरी को नोटिफिकेशन के जरिए बीफ बैन कर दिया गया, जबकि यहां की 96 फीसदी आबादी मुस्लिम है।

लक्षद्वीप से लोकसभा सांसद पीपी मोहम्म्द फैजल ने कहा, सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में नॉनवेज पर प्रतिबंध लगा दिया गया। अब पशुओं को काटने, बेचने और बीफ खरीदने पर भी प्रतिबंध लग रहा है। पहले यहां शराब बेचने पर प्रतिबंध था।

अब पर्यटन के नाम पर परमिट दे रहे हैं। पंचायत विनियमन 2021 के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, मत्स्यपालन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय निकायों के अधिकार कम करने का प्रावधान किया गया है। इससे ग्राम पंचायतों की आर्थिक, प्रशासनिक व राजनीतिक ताकत खत्म हो जाएगी। पंचायत रेगुलेशन ड्राफ्ट के एक प्रावधान के मुताबिक ऐसा व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकेगा, जिसके दो से अधिक बच्चे हों।

करीब 70 हजार आबादी वाले 10 द्वीपों के समूह लक्षद्वीप में ग्राम सभा ही ऐसी ईकाई है जिसका सीधे निर्वाचन होता है। लोगों का कहना है कि प्रशासक सभी शक्तियां अपने पास रखना चाहते हैं। इसे लेकर लगातार विरोध हो रहा है। हाल ही में सांसद फैजल ने इस बारे में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने बताया था कि गृहमंत्री ने स्थानीय लोगों से सलाह के बिना कानून न बनाने का आश्वासन दिया है।

बेलगाम होने वाले पर्यटन से लक्षद्वीप को कई नुकसान
28 मार्च को जारी ड्राफ्ट के अनुसार, प्रशासन विकास कार्यों के लिए किसी जगह को प्लानिंग एरिया घोषित कर सकता है। यह किसी को संपत्ति से हटाने, स्थानांतरित करने, अधिग्रहण और नियंत्रण का हक देता है। मकसद खनन, राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण, रेलवे, ट्रामवे आदि जैसे विकास कार्य बताए जा रहे हैं। लोगों को डर है कि ऐसी बेलगाम गतिविधियों से द्वीपों के पारिस्थितिकी तंत्र पर बुरा असर पड़ेगा।

लक्षद्वीप में लंबे समय तक पढ़ाने वाली शिक्षाविद् स्मिता पी कुमार कहती हैं, प्रशासक का उद्देश्य निजी निवेश बढ़ाकर पर्यटन को बढ़ाना है, पर समुद्र तटों पर निर्माण, बड़े जहाजों के परिवहन और अंधाधुंध मछली पकड़ने से स्थानीय समुदाय की आजीविका का दबाव बढ़ेगा। ऐसे संवेदनशील द्वीपों में जिम्मेदार पर्यटन की जरूरत होती है, जो स्थानीय समुदाय के हितों को ध्यान में रखकर काम करें।

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