संपादकीयः केंद्र ने की भरोसे की पहल

केंद्र ने की भरोसे की पहल:

फिलहाल करीब पंद्रह सौ शहरी और अट्ठावन बहुराज्यीय सहकारी बैंक हैं, जिनसे साढ़े आठ करोड़ से ऊपर ग्राहक जुड़े हैं। इन बैंकों के ग्राहक छोटे कारोबारी, अनियोजित क्षेत्रों में काम करने वाले लोग होते हैं।

सहकारी बैंकों को रिजर्व बैंक की निगरानी में रखने का फैसला केंद्र ने इनके उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाने के मकसद से किया है। पिछले कुछ समय में कई सहकारी बैंकों में घोटाले सामने आने से उपभोक्ताओं का भरोसा कमजोर होने लगा था। खासकर पंजाब एवं महाराष्ट्र सहकारी बैंक में हुए व्यापक घोटाले के बाद सहकारी बैंकों की साख को जबर्दस्त झटका लगा था। उसमें हजारों खाताधारकों का पैसा डूबने का खतरा पैदा हो गया था। तब रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से उन्हें उबारने का प्रयास किया गया। केंद्र के ताजा फैसले से उपभोक्ताओं का भरोसा निस्संदेह बढ़ेगा। सहकारी बैंकों को वित्तीय लेन-देन के क्षेत्र में काम करने की अनुमति देने के पीछे मकसद था कि उनके जरिए छोटी कमाई और निवेश करने वालों को मदद मिलेगी। वे इनके माध्यम से अपने कारोबार आदि को आगे बढ़ाने के लिए कर्ज भी ले सकेंगे। सहकारी बैंकों, समितियों का संचालन चूंकि स्थानीय स्तर पर होता है और उसमें सदस्यों को अपनी सुविधा के अनुसार नीतियां बनाने का अधिकार होता है, इसलिए उन्हें रिजर्व बैंक की निगरानी से दूर रखा गया था। इसी तरह गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां भी काम करती रही हैं। इनका कामकाज बैंकों की तरह होते हुए भी बिल्कुल भिन्न होता है। मगर कुछ सहकारी बैंकों ने नियम-कायदों की अनदेखी करते हुए न सिर्फ अपना आकार बढ़ाना शुरू किया, बल्कि अनियमितताओं के रास्ते भी खोल दिए। इससे स्वाभाविक ही सहकारी बैंकों का मकसद कहीं हाशिये पर चला गया। सरकार के ताजा कदम से उनकी मनमानी रोकने में मदद मिलेगी।

फिलहाल करीब पंद्रह सौ शहरी और अट्ठावन बहुराज्यीय सहकारी बैंक हैं, जिनसे साढ़े आठ करोड़ से ऊपर ग्राहक जुड़े हैं। इन बैंकों के ग्राहक छोटे कारोबारी, अनियोजित क्षेत्रों में काम करने वाले लोग होते हैं। वे अपनी छोटी-छोटी बचत इन बैंकों में रखते और अपने कारोबार आदि के लिए छोटे-छोटे कर्ज लेते हैं। पर कुछ सहकारी बैंक बड़े स्तर पर धोखाधड़ी करने वालों का सहयोग करते देखे गए हैं। जैसे नोटबंदी के दौरान कुछ सहकारी बैंकों ने बड़े पैमाने पर नोट बदले थे। तब भी इन बैंकों पर कड़ी निगरानी रखने की जरूरत रेखांकित की गई थी। पीएमसी जैसे बहुराज्यीय सहकारी बैंक तो अपनी शाखाएं फैलानी और बड़े कारोबारियों को अपने साथ जोड़ कर सरकारी योजनाओं में सेंध लगाना शुरू कर दिया था। सरकार का मकसद है कि देश का हर नागरिक बैंकिंग प्रणाली से जुड़े, ताकि गरीब परिवारों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का पैसा उनके खाते में सीधा पहुंच सके। पर सहकारी बैंक इस मकसद में रुकावट पैदा कर रहे थे।

केंद्र ने गरीबों, गरीबी रेखा से नीचे बसर करने वाले लोगों, स्वसहायता समूहों आदि के लिए अनेक योजनाएं चला रखी हैं। कोरोना संकट के समय मुद्रा ऋण योजना के तहत छोटे कर्जदारों को ब्याज में दो प्रतिशत का लाभ देने की घोषणा भी की है। पर सहकारी बैंकों का कारोबार संदिग्ध होने से वे लाभ वास्तविक उपभोक्ताओं तक पहुंचा पाना संदेह के दायरे में आ गया है। सरकार ने अनेक उपभोक्ता वस्तुओं पर से सबसिडी हटा कर उनका पैसा सीधे गरीब नागरिकों के खाते में डालना शुरू किया है। मनरेगा जैसी योजनाओं का पैसा भी सीधे खाते में पहुंचाया जाता है। ऐसे में अगर बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता नहीं होगी, तो उन योजनाओं का मकसद हाशिए पर जाना स्वाभाविक है। सहकारी बैंको पर रिजर्व बैंक की निगरानी से पारदर्शिता आने की उम्मीद बनी है।

Credit:

Share:

Share on facebook
Share on twitter
Share on pinterest
Share on linkedin
Share on whatsapp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

On Key

Related Posts

covaccine

corona vaccine : बायोटेक्नोलॉजी कम्पनी भारत बायोटेक को COVAXIN के अगले चरण के क्लिनिकल ट्रायल को मिली मंजूरी।

coronavirus  vaccine:  #1भारत बायोटेक ने tweet कर कहा कि COVAXIN™️ के तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने के लिए DGCI ने अप्रूवल दे दिया

पावर कट से थमी मुंबई की रफ़्तार

लखनऊ : मानसिक विक्षिप्त महिला ने बच्ची को जन्म दिया पुलिस ने पहुंचाया अस्पताल

लखनऊ में सड़कों पर घूमने वाली मानसिक विक्षिप्त महिला ने बच्ची को जन्म दिया है। महिला सड़क पर प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। राहगीर

Foreign minister

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा ,भारत की उत्तरी सीमा पर चीन ने तकरीबन 60,000 सैनिकों की तैनाती,

वाशिंगटन : LAC पर भारत और चीन के मध्य  सीमा तनाव जारी है. सीमा पर गतिरोध के बीच चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर 60,000 से

पश्चिम बंगाल : BJP की विरोध यात्रा में प्रदर्शन, पुलिस और कार्यकर्ताओ के बीच झड़प , लाठीचार्ज

पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्‍या के विरोध में आज गुरुवार को राज्‍य समेत राजधानी कोलकाता में ‘नबन्ना चलो’ आंदोलन

subscribe to our 24x7 Khabar newsletter