Bjp Engaged In Damage Control With Campaign On Budget, Ministers And Mlas Engaged In Persuading People From Village To Village – बजट पर अभियान के साथ डैमेज कंट्रोल में जुटी भाजपा, गांव-गांव लोगों को समझाने में लगे मंत्री और विधायक


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किसान आंदोलन के चलते गांवों में खासतौर से पश्चिमी यूपी में फैली नाराजगी दूर करने के लिए भाजपा नेता व कार्यकर्ता केंद्रीय बजट पर अभियान के सहारे डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। पार्टी नेताओं से लेकर विधायक और मंत्री तक को बजट में ‘लोकल फॉर वोकल’ के लिए की गई व्यवस्थाओं को गांव-गांव बताने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसमें गांवों के लोगों की बेहतरी के लिए किए प्रबंध के बारे में समझाने को कहा गया है। वहीं, यह भी बताने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि विपक्ष किसान आंदोलन की आड़ में प्रधानमंत्री की इसी संकल्पना को पूरा होने से रोकने की साजिश में लगा है। 
भाजपा का सप्ताह भर का यह अभियान पूरे प्रदेश में शुरू किया गया है, लेकिन किसान आंदोलन के मद्देनजर पश्चिमी यूपी पर ज्यादा फोकस किया गया है। रणनीति के अनुसार यह अभियान द्विस्तरीय है। एक तो सम्मेलन व गोष्ठियों के जरिये लोगों को केंद्रीय बजट की खूबियां समझाने का जिम्मा दिया गया है। वहीं, दूसरा गांव-गांव लोगों से संपर्क कर उनकी नाराजगी दूर करना है।  

एजेंडे पर काम
भाजपा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है कि वे लोगों को समझाएं कि बजट में लोहारी, बढ़ईगीरी, कुम्हारी, कढ़ाई-सिलाई या अन्य दस्तकारी-शिल्पकारी से जुड़े लोगों के काम को पहचान दिलाने और उनकी मदद का इंतजाम किया गया है। साथ ही खेती-किसानी को भी लाभकारी बनाने के कई प्रावधान किए गए हैं। भाजपा लोगों को समझा रही है कि विपक्ष की परेशानी यह है कि गांव के लोग आत्मनिर्भर बन गए तो उनका वोट का खेल खत्म हो जाएगा। इसलिए वे किसान आंदोलन के नाम पर निराधार तथ्य देकर भ्रम फैला रहे हैं। इसके लिए भाजपा ने अभियान पर जाने वालों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि सहित उन कामों को बताने की जिम्मेदारी सौंपी है, जिन्हें मोदी सरकार ने शुरू किया। इतना ही नहीं, लोगों को गैर भाजपा सरकारों में गरीबों, महिलाओं, दिव्यांगों, छात्रों व किसानों के लिए चलने वाली कल्याणकारी योजनाओं के धन में होने वाली बंदरबांट को याद दिलाने की सलाह दी भी गई है। जिस पर प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन व डिजिटल पेमेंट से रोक लगाई।

इस तरह भी काम
किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए बजट के सहारे किसानों, गरीबों व गांवों की तरक्की के लिए की गई व्यवस्थाएं बताने के लिए संगोष्ठी व सम्मेलनों के अलावा सीधे संपर्क व संवाद का काम भी शुरू किया गया है। इसके तहत पश्चिमी यूपी से निर्वाचित भाजपा के सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य और प्रदेश सरकार में मंत्री गांव-गांव जाकर लोगों से मिल रहे हैं। उन्हें निजी संबंधों का हवाला देकर विरोध छोड़ने को कह रहे हैं। साथ ही तथ्यों के सहारे उनके विरोध के दूरगामी व समाज को हानि पहुंचाने वाले प्रभाव को बता रहे हैं। उन्हें यह भी समझाया जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने एमएसपी जारी रखने और बातचीत का आश्वासन दिया है तो उस पर भरोसा करते हुए नाराजगी खत्म करनी चाहिए। जिससे उस विपक्ष को राजनीतिक लाभ न मिले, जिसने सिर्फ तुष्टिकरण और मुसलमानों को खुश करने की राजनीति पर ही ध्यान दिया। जिनके कार्यकाल में कवाल और कैराना जैसी घटनाएं घटीं। 

किसान आंदोलन के चलते गांवों में खासतौर से पश्चिमी यूपी में फैली नाराजगी दूर करने के लिए भाजपा नेता व कार्यकर्ता केंद्रीय बजट पर अभियान के सहारे डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। पार्टी नेताओं से लेकर विधायक और मंत्री तक को बजट में ‘लोकल फॉर वोकल’ के लिए की गई व्यवस्थाओं को गांव-गांव बताने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसमें गांवों के लोगों की बेहतरी के लिए किए प्रबंध के बारे में समझाने को कहा गया है। वहीं, यह भी बताने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि विपक्ष किसान आंदोलन की आड़ में प्रधानमंत्री की इसी संकल्पना को पूरा होने से रोकने की साजिश में लगा है। 

भाजपा का सप्ताह भर का यह अभियान पूरे प्रदेश में शुरू किया गया है, लेकिन किसान आंदोलन के मद्देनजर पश्चिमी यूपी पर ज्यादा फोकस किया गया है। रणनीति के अनुसार यह अभियान द्विस्तरीय है। एक तो सम्मेलन व गोष्ठियों के जरिये लोगों को केंद्रीय बजट की खूबियां समझाने का जिम्मा दिया गया है। वहीं, दूसरा गांव-गांव लोगों से संपर्क कर उनकी नाराजगी दूर करना है।  

एजेंडे पर काम

भाजपा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है कि वे लोगों को समझाएं कि बजट में लोहारी, बढ़ईगीरी, कुम्हारी, कढ़ाई-सिलाई या अन्य दस्तकारी-शिल्पकारी से जुड़े लोगों के काम को पहचान दिलाने और उनकी मदद का इंतजाम किया गया है। साथ ही खेती-किसानी को भी लाभकारी बनाने के कई प्रावधान किए गए हैं। भाजपा लोगों को समझा रही है कि विपक्ष की परेशानी यह है कि गांव के लोग आत्मनिर्भर बन गए तो उनका वोट का खेल खत्म हो जाएगा। इसलिए वे किसान आंदोलन के नाम पर निराधार तथ्य देकर भ्रम फैला रहे हैं। इसके लिए भाजपा ने अभियान पर जाने वालों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि सहित उन कामों को बताने की जिम्मेदारी सौंपी है, जिन्हें मोदी सरकार ने शुरू किया। इतना ही नहीं, लोगों को गैर भाजपा सरकारों में गरीबों, महिलाओं, दिव्यांगों, छात्रों व किसानों के लिए चलने वाली कल्याणकारी योजनाओं के धन में होने वाली बंदरबांट को याद दिलाने की सलाह दी भी गई है। जिस पर प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन व डिजिटल पेमेंट से रोक लगाई।

इस तरह भी काम

किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए बजट के सहारे किसानों, गरीबों व गांवों की तरक्की के लिए की गई व्यवस्थाएं बताने के लिए संगोष्ठी व सम्मेलनों के अलावा सीधे संपर्क व संवाद का काम भी शुरू किया गया है। इसके तहत पश्चिमी यूपी से निर्वाचित भाजपा के सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य और प्रदेश सरकार में मंत्री गांव-गांव जाकर लोगों से मिल रहे हैं। उन्हें निजी संबंधों का हवाला देकर विरोध छोड़ने को कह रहे हैं। साथ ही तथ्यों के सहारे उनके विरोध के दूरगामी व समाज को हानि पहुंचाने वाले प्रभाव को बता रहे हैं। उन्हें यह भी समझाया जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने एमएसपी जारी रखने और बातचीत का आश्वासन दिया है तो उस पर भरोसा करते हुए नाराजगी खत्म करनी चाहिए। जिससे उस विपक्ष को राजनीतिक लाभ न मिले, जिसने सिर्फ तुष्टिकरण और मुसलमानों को खुश करने की राजनीति पर ही ध्यान दिया। जिनके कार्यकाल में कवाल और कैराना जैसी घटनाएं घटीं। 



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