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Black Fungus Injection Amphotericin-B Drugs Allocated to all States Maharashtra MP & Gujarat | बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- ब्लैक फंगस की दवाओं का उत्पादन बढ़ाएं; केंद्र सरकार ने 26 राज्यों को भेजे 80 हजार इंजेक्शन


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मुंबई12 मिनट पहले

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देश में ब्लैक फंगस पर कंट्रोल करने की कवायद तेज हो गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का उत्पादन बढ़ाने के लिए आदेश दिया है, ताकि महाराष्ट्र को पर्याप्त मात्रा में दवाएं मिल सकें। वहीं, केंद्र सरकार ने इस बीमारी में इस्तेमाल होने वाले एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन के 80 हजार डोज गुरुवार को 26 राज्यों के लिए भेज दिए हैं।

हाईकोर्ट की नागपुर बेंच के जस्टिस एसबी शुक्रे और एजी घरोटे ने गुरुवार को कोरोना से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई की। इस वैकेशन बेंच ने कहा कि महाराष्ट्र में ब्लैक फंगस के मामलों के हिसाब से राज्य को सप्लाई की गईं दवाएं पर्याप्त नहीं रहीं। हम उम्मीद करते हैं कि केंद्र सरकार मरीजों के हिसाब से उत्पादन क्षमता बढ़ाएगी और महाराष्ट्र समेत सभी राज्यों को जरूरत के हिसाब से दवाएं वितरित की जाएंगी।

केंद्र ने महाराष्ट्र को सबसे ज्यादा 18140 डोज सप्लाई किए
केंद्र सरकार ने गुरुवार को 26 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन के 80 हजार डोज सप्लाई किए हैं। यह जानकारी कैबिनेट मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने सोशल मीडिया के जरिए दी। इसके मुताबिक, सबसे ज्यादा 18140 डोज महाराष्ट्र को ही दिए हैं। इसके बाद गुजरात को 17330 और मध्य प्रदेश को 6150 डोज दिए गए।

दवा उत्पादन की जानकारी कोर्ट को दे केंद्र सरकार
नागपुर बेंच ने कहा कि केंद्र सरकार ने 11 मई को ही महाराष्ट्र को 16,500 दवाएं दी थीं। 24 मई तक यह सप्लाई हर दिन 4,360, 5,090 और 4,060 कर दी गई। हम केंद्र सरकार से अनुरोध करते हैं कि वे दवाओं की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सभी राज्यों को करने संबंधी सभी जरूरी जानकारियां हमें भी बताएं।

महाराष्ट्र में हर रोज 11,375 एंफोटेरेसिन-बी इंजेक्शन की जरूरत
कोर्ट ने कहा कि एंफोटेरेसिन-बी लिपिड कॉम्प्लेक्स और एंफोटेरेसिन-बी लिपोसोमाल दवाओं का ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। दुर्भाग्य से देश और खासकर महाराष्ट्र में इन दवाओं के मुकाबले ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या ज्यादा है। महाराष्ट्र में करीब 3 हजार मामले अभी एक्टिव हैं। इसका मतलब है कि राज्य में हर रोज करीब 11,375 एंफोटेरेसिन-बी इंजेक्शन की जरूरत रहेगी।

क्या है ब्लैक फंगस?

  • ये एक फंगल डिजीज है। जो म्युकरमायकोसिस नाम के फंगस से होता है। ये ज्यादातर उन लोगों को होता है जिन्हें पहले से कोई बीमारी हो या वो ऐसी मेडिसिन ले रहे हों जो बॉडी की इम्युनिटी को कम करती हों या शरीर की दूसरी बीमारियों से लड़ने की ताकत कम करती हों। ये शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है।
  • ज्यादातर सांस के जरिए वातावरण में मौजूद फंगस हमारे शरीर में पहुंचते हैं। अगर शरीर में किसी तरह का घाव है या शरीर कहीं जल गया तो वहां से भी ये इन्फेक्शन शरीर में फैल सकता है। इसे शुरुआती दौर में ही डिटेक्ट नहीं किया गया तो आंखों की रोशनी जा सकती है। या फिर शरीर के जिस हिस्से में ये फंगस फैला है, शरीर का वो हिस्सा सड़ सकता है।

ब्लैक फंगस कहां पाया जाता है?

  • ये बहुत गंभीर, लेकिन एक रेयर इन्फेक्शन है। ये फंगस वातावरण में कहीं भी रह सकता है, खासतौर पर जमीन और सड़ने वाले ऑर्गेनिक मैटर्स में। जैसे पत्तियों, सड़ी लकड़ियो और कम्पोस्ट खाद में ब्लैक फंगस पाया जाता है।

इसके लक्षण क्या हैं?

  • शरीर के किस हिस्से में इन्फेक्शन है, उस पर इस बीमारी के लक्षण निर्भर करते हैं। चेहरे का एक तरफ से सूज जाना, सिरदर्द होना, नाक बंद होना, उल्टी आना, बुखार आना, चेस्ट पेन होना, साइनस कंजेशन, मुंह के ऊपर हिस्से या नाक में काले घाव होना, जो बहुत ही तेजी से गंभीर हो जाते हैं।

ब्लैक फंगस का इलाज कैसे होता है?

  • डॉ. तयाल के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति में ब्लैक फंगस की पुष्टि होती है तो सरकार के अधिकृत केंद्रों से दवा मिल सकती है। एंटीफंगल दवाओं के इस्तेमाल के साथ आंख और नाक में इन्फेक्शन बढ़ने पर सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। ट्रीटमेंट में एंटीफंगस दवाओं का इस्तेमाल होता है, जैसे- एम्फोटेरिसिन B (Amphotericin B), पोसेकोनाजोल (Posaconazole) और आइसेवुकोनाजोल (Isavuconazole)।

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