Most Popular

Social Media

Get The Latest Updates

Subscribe To Our Weekly Newsletter

No spam, notifications only about new products, updates.

Calendar of Pitru Paksha This time the festival of ancestors is of 17 days instead of 16, know which day to perform Shradh | इस बार पितरों का पर्व 16 की जगह 17 दिनों का, जानिए किस दिन कौन सा श्राद्ध करें


  • Hindi News
  • Jeevan mantra
  • Dharm
  • Calendar Of Pitru Paksha This Time The Festival Of Ancestors Is Of 17 Days Instead Of 16, Know Which Day To Perform Shradh

2 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
  • तिथियों की घट-बढ़ होने से 25 और 26 सितंबर को किया जा सकेगा पंचमी तिथि का श्राद्ध

पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का पितृ पक्ष 20 सितंबर से शुरू हो गया है जो कि 6 अक्टूबर तक रहेगा। इस बार पितरों का ये पर्व 16 की जगह 17 दिनों का रहेगा। इसमें पंचमी तिथि दो दिन रहेगी। इस वजह से श्राद्ध पक्ष के दिन बढ़ गए हैं। इन दिनों मांगलिक कामों की मनाही तो रहेगी, लेकिन हर तरह की खरीदारी, निवेश और लेन-देन किए जा सकेंगे। पितृ पक्ष में मांगलिक और शुभ कामों के लिए भी खरीदारी की जा सकती है।

तिथियों की घट-बढ़ को ऐसे समझें
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र के मुताबिक इस बार श्राद्ध पक्ष में पंचमी तिथि अंग्रेजी कैलेंडर के दो दिनों तक रहेगी। ये 25 सितंबर को सुबह तकरीबन 10:45 से शुरू होकर 26 को दोपहर करीब 1 बजे तक रहेगी। ग्रंथों के मुताबिक श्राद्ध के लिए दिन का आठवां मुहूर्त यानि 11.36 से 12.24 तक का समय ही श्रेष्ठ माना गया है। इसलिए इस मुहूर्त के दौरान जो तिथि हो उसका श्राद्ध करना चाहिए। इस वजह से पंचमी का श्राद्ध दो 25 और 26 सितंबर को किया जा सकता है, लेकिन षष्ठी का श्राद्ध 27 सितंबर को ही किया जाना चाहिए।

श्राद्ध यानी पिंडदान, तर्पण और पंच बलि
डॉ. मिश्र का कहना है कि श्राद्ध के दिनों में पितर अदृश्य रूप में अपने परिजनों के यहां आकर तर्पण ग्रहण करते हैं। शास्त्रों के अनुसार इससे पितृदोष दूर होता है। श्राद्ध में पिंडदान, तर्पण और पंचबलि दी जाती है। पंचबलि यानी ब्राह्मण भोजन के साथ ही गाय, कुत्ते, कौवे और चीटियों को भी खाना दिया जाता है। ब्राह्मण के साथ ही जीव-जंतुओं के तृप्त होने पर ही पितर संतुष्ट होते हैं।

बनारस के प्रो. रामनारायण द्विवेदी बताते हैं कि पितरों के निमित्त तर्पण कुशा हाथ में रखकर किया जाता है। इसमें तर्पण जल में काला तिल, पुष्प व दूध मिलाकर किया जाता है। तर्पण दक्षिण दिशा की ओर मुख कर किया जाना चाहिए। तर्पण के समय पूरा ध्यान पितरों की ओर ही होना चाहिए।

खबरें और भी हैं…



Source link

Share:

Share on facebook
Share on twitter
Share on pinterest
Share on linkedin
Share on whatsapp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *