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Channi has rebelled against Congress, contested the first election as an independent | कांग्रेस से बगावत कर चमकौर साहिब सीट से निर्दलीय लड़ा पहला चुनाव, अपनी कार खुद चलाते और टोल टैक्स देते रहे हैं चन्नी


लुधियाना6 घंटे पहलेलेखक: दिलबाग दानिश

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पंजाब के नए CM और सूबे में दलित राजनीति के ‘न्यू फेस’ चरणजीत सिंह चन्नी एक समय कांग्रेस से बगावत कर चुके हैं। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव के दौरान चन्नी ने चमकौर साहिब सीट से कांग्रेस के अधिकृत कैंडीडेट मनमोहन सिंह का विरोध करते हुए उनके सामने बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत कर पहली बार विधानसभा पहुंचे। उस समय चन्नी का चुनाव निशान हवाई जहाज था। जमीनी स्तर से उठे चन्नी अपनी कार खुद चलाते रहे हैं।

वर्ष 2010 में कैप्टन अमरिंदर सिंह चन्नी को दोबारा कांग्रेस में लेकर आए। चन्नी सालभर कांग्रेस में रहे। वर्ष 2011 में शिरोमणि अकाली दल से निकाले जा चुके मनप्रीत बादल ने नई पार्टी, पीपल्स पार्टी ऑफ पंजाब (पीपीपी) बनाई तो चन्नी की नजदीकियां उनसे बढ़ने लगीं, मगर वह कांग्रेस पार्टी छोड़कर गए नहीं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले चन्नी राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस नेता सीपी जोशी के माध्यम से राहुल गांधी से मिले और उनके करीबी हो गए। उसके बाद चन्नी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

चन्नी ने चमकौर साहिब सीट से 2012 और 2017 का चुनाव कांग्रेस टिकट पर लड़ा और एमएलए बने। वर्ष 2012 से 2017 के बीच पंजाब में अकाली-भाजपा सरकार के दौरान चन्नी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे। उधर, 2012 के विधानसभा चुनाव में पीपीपी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा और उसके बाद मनप्रीत बादल ने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर लिया।

प्रताप बाजवा के खिलाफ दिया कैप्टन का साथ
कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके खेमे ने जब वर्ष 2015 में पंजाब कांग्रेस के तत्कालीन प्रधान प्रताप सिंह बाजवा को हटाने की मुहिम छेड़ी, तब चन्नी ने खुलकर कैप्टन का साथ दिया था। चन्नी किसी समय कैप्टन के खास में शुमार थे, मगर धीरे-धीरे दोनों के बीच दूरी बढ़ती गई और चन्नी कैप्टन खेमे से निकलकर सिद्धू कैंप में पहुंच गए। चन्नी ने राजनीतिक करियर की शुरुआत रोपड़ जिले में खरड़ नगर काउंसिल के पार्षद का चुनाव लड़कर की। वह 3 बार वहां पार्षद बने और एक बार खरड़ नगर काउंसिल अध्यक्ष रहे।

महिला आईएएस अफसर के साथ रहे विवाद में
वर्ष 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चन्नी को अपनी कैबिनेट में शामिल किया तो उन्हें पंजाब में दलित राजनीति का नया चेहरा समझा जाने लगा। उसके बाद चन्नी अक्टूबर-2018 में उस समय चर्चा में आए जब पंजाब की एक महिला आईएएस अफसर ने चन्नी पर गलत मैसेज भेजने के आरोप लगाए। इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। कुछ महीने पहले जब चन्नी ने नवजोत सिंह सिद्धू कैंप में शामिल होकर कैप्टन के खिलाफ बगावत की, तब उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के उस मामले को फिर खोलने का प्रयास किया गया था।।

सरकारी रिहायश तोड़ने पर यूटी प्रशासन से विवाद
कैप्टन सरकार में कैबिनेट मंत्री रहते हुए चरणजीत चन्नी ने चंडीगढ़ में अपनी सरकारी रिहायश की एंट्रेंस तुड़वा दी थी, क्योंकि वह वास्तु शास्त्र के हिसाब से ठीक नहीं थी। इसे लेकर भी उनका चंडीगढ़ यूटी प्रशासन के साथ लंबा विवाद हुआ। इस प्रकरण में चन्नी की आलोचना इसलिए भी हुई, क्योंकि उनके पास पंजाब का टेक्निकल एजुकेशन जैसा विभाग था। तब कहा गया कि अंधविश्वास को मानने वाला टेक्निकल एजुकेशन जैसा महकमा कैसे संभाल सकता है।

सुखबीर के साथ चर्चा में बने मजाक का पात्र
वर्ष 2012 से 2017 के बीच अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान चन्नी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे। तब एक सेशन के दौरान सदन में तत्कालीन डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल और चन्नी के बीच अपनी-अपनी पार्टी की सरकारों की उपलब्धियों पर चर्चा हो रही थी। तब सुखबीर ने पूछा था कि आपकी सरकार ने क्या करवाया? तो चन्नी ने कहा कि उनकी सरकार ने पूरे पंजाब की सड़कों के पैचवर्क करवाए। इसे लेकर उनका खूब मजाक उड़ा था।

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