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CM Amarinder wrote a letter to Sonia Gandhi, said – do not interfere in the politics of Punjab, otherwise there will be a big loss | अमरिंदर ने सोनिया को चिट्ठी लिखकर चेताया; कहा- पंजाब की राजनीति में दखल न दें, वरना बहुत बड़ा नुकसान होगा


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चंडीगढ़41 मिनट पहले

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पंजाब में कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी लड़ाई खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब में पार्टी की कमान सौंपने की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी को चेतावनी दे डाली है। कांग्रेस में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी सिटिंग CM ने इस तरह की चिट्‌ठी लिखी है।

कैप्टन ने शुक्रवार को सोनिया गांधी को चिट्‌ठी लिखी और साफ शब्दों में कह दिया कि पार्टी हाईकमान पंजाब की राजनीति में दखल देने की कोशिश न करे वरना उसे बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। कैप्टन का इशारा सीधे तौर पर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर है।

इससे पहले सिद्धू ने शुक्रवार को दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात की। इस मीटिंग के बाद ही अमरिंदर ने सोनिया को चिट्‌ठी लिखकर अपनी नाराजगी उनसे जाहिर की है। कैप्टन नहीं चाहते कि सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जाए। ऐसे में पंजाब कांग्रेस दो फाड़ होने की कगार पर पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि पंजाब कांग्रेस के प्रभारी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत शनिवार को चंडीगढ़ पहुंच रहे हैं। वे यहां अमरिंदर से मिल सकते हैं।

अमरिंदर और सिद्धू ने की समर्थक सांसद-विधायक के साथ बैठक
अमरिंदर के विरोध को देखते हुए राज्य में उनके विरोधी सिद्धू के समर्थन में खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि चंडीगढ़ में पंजाब के कैबिनेट मंत्री और कैप्टन विरोधी सुखजिंदर सिंह रंधावा के घर यह बैठक हुई है। इसमें सिद्धू के साथ 5 मंत्रियों और करीब 10 विधायक शामिल हुए।

इधर, अमरिंदर भी किसी हाल में सिद्धू समर्थकों और अपने विरोधियों को आसानी से मौका देने के पक्ष में नहीं दिखते। सिद्धू की बैठक के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी मोहाली के सिसवां स्थित अपने फॉर्म हाउस पर अपने करीबी विधायकों, मंत्रियों और सांसदों की आपात बैठक बुलाई और अपनी रणनीति बनाई। इसके बाद ही सोनिया को पत्र लिखा गया है।

10 साल बाद हुई थी कांग्रेस की सत्ता में वापसी
बता दें कि कांग्रेस ने पंजाब में अमरिंदर के ही नेतृत्व में 10 साल बाद सत्ता में वापसी की थी। पार्टी ने 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में 117 सीटों में से 77 सीटों पर जीत दर्ज की थी। तब अमरिंदर ने मोदी लहर के बावजूद अकाली दल और भाजपा गठबंधन को सिर्फ 18 सीटों पर समेट दिया था। वहीं राज्य में सत्ता का सपना संजोए बैठी आम आदमी पार्टी को 20 सीटों पर ही जीत मिली थी। दो सीट अन्य दलों के खाते में गई थी।

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