संपादकीयः कोरोना के चिंताजनक आंकड़े

  • संपादकीयः चिंताजनक आंकड़े:

इसमें कोई संदेह नहीं कि पहले के मुकाबले अब देश भर में कोरोना संक्रमितों की जांच के काम में तेजी आई है और अब तक एक दिन में दो लाख जांच होने का रेकार्ड बना है। इसलिए संक्रमितों की तादाद तेजी से बढ़ना स्वाभाविक है।

भारत में कोरोना संक्रमण के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उससे तो लगता है कि फिलहाल महामारी का कहर थमने वाला नहीं है। ताजा रेकार्ड यह है कि देश में चौबीस घंटे में सत्रह हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। कोरोना संक्रमितों की संख्या पांच लाख के करीब पहुंचने को है। इसमें से दो लाख बयासी हजार मामले एक जून के बाद के हैं। महामारी से हुई मौतों का आंकड़ा भी पंद्रह हजार के पार निकल चुका है। रोजाना बढ़ते आंकड़े चिंता पैदा करने वाले हैं। पिछले एक हफ्ते में लगभग एक लाख मामलों का सामने आना महामारी विशेषज्ञों की इस भविष्यवाणी की पुष्टि करता है कि जुलाई में संक्रमण की स्थिति अपने उच्चतम पर होगी। हालात बता रहे हैं कि अगर बीमारी को फैलने रोकना है तो हर स्तर पर कोरोना से मिल कर निपटना होगा और सबसे ज्यादा जोर बचाव के उपायों पर देना होगा। इसमें सरकारों के स्तर पर प्रयास के साथ ही नागरिकों और सामुदायिक स्तर पर भी कोशिशें करनी होंगी। महामारी से निपटने के लिए जिस तरह से काम होना चाहिए, वह हो नहीं पा रहा है और इसका नतीजा संक्रमितों को भुगतना पड़ रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने तो इस बात को स्वीकार भी किया है कि राजधानी दिल्ली में अस्पतालों और बिस्तरों की कोई कमी नहीं है, लेकिन प्रशासन के साथ तालमेल का अभाव है जिसकी वजह से समस्याएं आई हैं।

इसमें कोई संदेह नहीं कि पहले के मुकाबले अब देश भर में कोरोना संक्रमितों की जांच के काम में तेजी आई है और अब तक एक दिन में दो लाख जांच होने का रेकार्ड बना है। इसलिए संक्रमितों की तादाद तेजी से बढ़ना स्वाभाविक है। इसके बावजूद कुछ हद तक संतोषजनक बात यह है कि भारत में मरीजों के स्वस्थ होने की दर भी बढ़ी है। लेकिन चिकित्सकों के सामने अभी बड़ी चुनौती बिना लक्षण वाले मरीजों को लेकर बनी हुई है। चिंता का एक विषय यह भी है कि पिछले तीन महीने में देश के कई हिस्सों से जो करोड़ों श्रमिक पलायन करके अपने गांवों को लौटे हैं, अगर उनकी समुचित जांच नहीं हुई तो संक्रमण कहीं व्यापक स्तर पर फैल न फैल जाए। ऐसा होने पर हालात से निपटने के लिए हमारे पास संसाधन कम पड़ सकते है। यह पूरे देश के स्वास्थ्य तंत्र की विडंबना ही है कि ज्यादातर अस्पताल शहरी इलाकों में हैं। इसलिए राज्य सरकारों को चाहिए कि वे कोरोना से निपटने के लिए अब अपने स्तर पर कार्य योजनाएं बना कर उन पर कारगर तरीके से अमल करें और ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष रूप से ध्यान दें।

व्यावहारिक तौर पर देखें तों महामारी से निपटने में बड़ी अड़चन अस्पतालों में अव्यवस्था को लेकर आ रही है। इसलिए हाल में दिल्ली हाईकोर्ट ने अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या और कोरोना जांच जैसे मामलों पर सरकार से जवाब-तलब किया। मुश्किल यह है कि ज्यादातर अस्पताल, खासतौर से निजी अस्पताल मरीजों को आसानी से भर्ती नहीं कर रहे हैं। इसके साथ की जगहों से ऐसी शिकायतें भी मिली हैं कि मरीजों की देखभाल ठीक से नहीं हो रही। हालांकि दिल्ली सरकार ने इस दिशा में यह नई पहल की है कि कोविड वार्ड में भर्ती मरीज की उनके परिजनों से वाडियो कॉल के जरिए बात कराई जा सके। मरीजों नागरिकों को भी सजग रहते हुए सुरक्षित दूरी और मास्क लगाने जैसे उपायों को गंभीरता से लेना होगा। तभी महामारी पर काबू पाया जा सकता है।

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