फाइनल ट्रायल में पहुंची ऑक्सफोर्ड वैक्सीन, अक्टूबर तक आने का दावा

कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच एक अच्छी खबर सामने आई है. यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्‍सफर्ड और AstraZeneca Plc. की प्रायोगिक वैक्‍सीन अपने क्लिनिकल ट्रायल के अंतिम चरण में पहुंच गई है. दुनिया भर में चल रही खोज के बीच ये पहली वैक्सीन है जो अपने आखिरी चरण में पहुंची है. ChAdOx1 nCoV-19 नाम की इस वैक्सीन को AstraZeneca का लाइसेंस दिया गया है और अंतिम चरण में ये वैक्सीन UK के 10,260 वयस्कों और बच्चों को दी जाएगी.

  • भारत के  सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII)ने भी इसमें 100 मिलियन डॉलर का निवेश किया है ताकि भारत और अन्य निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सके. इस वैक्सीन का ट्रायल दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में भी किया जा रहा है.
  • ये  वैक्‍सीन ChAdOx1 वायरस से बनी है, जो सामान्‍य सर्दी वाले वायरस का कमजोर रूप है और जिससे चिंपैंजी जानवर संक्रमित होते हैं. इस वायरस को जेनेटिकली बदला गया है इसलिए यह इंसानों को संक्रमित नहीं कर सकता है.
  • ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप के प्रमुख प्रोफेसर एंड्रयू पोलार्ड ने कहा, ‘क्लिनिकल स्टडी में इस वैक्सीन के बहुत अच्छे परिणाम मिले हैं और अब हम ये मूल्यांकन करेंगे कि ये वैक्सीन बुजुर्गों के इम्यून रिस्पांस में कितनी असरदार होगी और क्या ये ज्यादा आबादी में सुरक्षा प्रदान कर सकती है.’

 

  • ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप को उम्मीद है कि ट्रायल सफल होने पर ये वैक्सीन इस साल के अंत तक लॉन्च हो जाएगी. ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में जेनर इंस्टीट्यूट के निदेशक और प्रोजेक्ट लीडर प्रोफेसर एड्रियन हिल ने कहा का कहना है कि COVID-19 के इस प्रायोगिक वैक्सीन के जानवरों पर बहुत अच्छे परिणाम दिखे हैं और यह मानव परीक्षण के अगले चरण में पहुंच चुका है. एड्रियन हिल ने इस वैक्सीन के अक्टूबर तक आने की उम्मीद जताई है.

 

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