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Coronavirus Vaccination India Update; Health Ministry’s Secretary Rajesh Bhushan On COVID Storage Arrangements | वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के लिए तैयार रहें राज्य, स्टोरेज के लिए 29 हजार कोल्ड चेन पॉइंट्स बनाए गए


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नई दिल्ली34 मिनट पहले

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स को लेकर राज्यों को आगाह किया है। हैल्थ सेक्रेटरी राजेश भूषण ने मंगलवार को बताया कि वैक्सीनेशन के बाद होने वाले रिएक्शन के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UT) को तैयार रहना होगा। सरकार ने वैक्सीन के स्टोरेज के लिए जरूरी इंतजाम करने का दावा किया है। इसमें 29 हजार कोल्ड चेन पॉइंट्स शामिल हैं।

राज्य सरकारों तक स्टोरेज के इक्विपमेंट पहुंचे
भूषण ने बताया, ‘वैक्सीन के स्टोरेज के लिए 29 हजार कोल्ड चेन पॉइंट्स, 240 वॉक-इन-कूलर्स, 70 वॉक-इन-फ्रीजर्स, 45 हजार आइस-लाइन्ड रेफ्रिजरेटर्स, 41 हजार डीप फ्रीजर्स और 300 सोलर रेफ्रिजरेटर्स का इस्तेमाल किया जाएगा। यह सभी इक्विपमेंट राज्य सरकारों तक पहुंचा दिए गए हैं।’

वैक्सीन का रिएक्शन गंभीर मसला
उन्होंने बताया, ‘वैक्सीन का रिएक्शन गंभीर मसला है। दुनियाभर में वैक्सीनेशन प्रोग्राम लंबे समय तक चलता है। ऐसे में वैक्सीनेशन के बाद बच्चों और प्रेग्नेंट महिलाओं में उसके साइड इफेक्ट्स भी दिख सकते हैं। जिन देशों में वैक्सीनेशन शुरू हो चुका है, वहां इसके साइड इफेक्ट्स भी सामने आए हैं। खासकर ब्रिटेन, जहां वैक्सीन लगाने के बाद पहले दिन ही रिएक्शन के मामले देखे गए थे। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि राज्य इसके लिए पहले से ही पूरी तैयारी रखें।

देश में कोरोना के मामलों में कमी
उन्होंने बताया कि देश में कोरोना के मामले लगातार घट रहे हैं। इस वक्त देश में 10 लाख पर सिर्फ 7 हजार 178 मामले सामने आ रहे हैं, जबकि दुनिया में यह आंकड़ा 9000 है।

एक और वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल को मंजूरी
नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने बताया कि इस हफ्ते ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने एक और वैक्सीन को क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी दे दी है। HGCO19 नाम की यह वैक्सीन पुणे की कंपनी जेनोवा ने भारत सरकार की रिसर्च एजेंसी डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के साथ मिलकर डेवलप की है। यह देश की पहली mRNA टेक्नोलॉजी से बनी वैक्सीन है।

फाइजर की वैक्सीन भी इसी टेक्नीक पर बनी
फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन को ब्रिटेन में मंजूरी मिल चुकी है। एक और अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना ने भी वैक्सीन के इमरजेंसी यूज के लिए एप्रूवल मांगा है। ये दोनों ही वैक्सीन मैसेंजर-RNA यानी mRNA पर बेस्ड टेक्नोलॉजी पर डेवलप की गई हैं और दोनों ही 95% तक इफेक्टिव भी हैं।

अभी 6 वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल जारी
उन्होंने बताया, फाइजर या कुछ अन्य वैक्सीन के उलट, यह वैक्सीन एक सामान्य फ्रिज में, सामान्य कोल्ड चेन स्थितियों में रखी जा सकेगी। देश में इस समय 6 वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल से गुजर रही हैं।

कोरोना को लेकर किसानों के संपर्क में सरकार
उन्होंने बताया कि कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के लिए सरकार कोरोना के मद्देनजर हर तरह की सावधानी बरत रही है। डेमोक्रेटिक प्रक्रिया चलती रहनी चाहिए, लेकिन हमें कोरोना की गाइडलाइन का भी पालन करना होगा।



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