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Covaxin Supply Issue; Bharat Biotech said – The process of production and supply of our vaccines is complex, it also takes a lot of time News And Updates | भारत बायोटेक ने कहा- हमारे टीके के प्रोडक्शन और सप्लाई की प्रक्रिया जटिल है, इसमें काफी वक्त भी लगता है


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13 मिनट पहले

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भारत बायोटेक के मुताबिक, कोवैक्सिन को बनाने, टेस्ट करने और बैच रिलीज करने में 120 दिन लगते हैं। यानी इस साल मार्च में बने डोज जून में ही मिल सकेंगे। - Dainik Bhaskar

भारत बायोटेक के मुताबिक, कोवैक्सिन को बनाने, टेस्ट करने और बैच रिलीज करने में 120 दिन लगते हैं। यानी इस साल मार्च में बने डोज जून में ही मिल सकेंगे।

देश में हर दिन कोरोना वैक्सीन के 27 लाख डोज बन रहे हैं, लेकिन इतने डोज लोगों तक नहीं पहुंच पा रहे। इसके पीछे वैक्सीन की सप्लाई में कमी एक बड़ी वजह है। देश में लोगों को लगाई जा रही दो वैक्सीन में से एक का प्रोडक्शन करने वाली भारत बायोटेक ने इस बारे में बताया है। हैदराबाद बेस्ड भारत बायोटेक कोवैक्सीन बनाती है। कंपनी ने शुक्रवार को बताया कि उसके टीके के प्रोडक्शन और सप्लाई की प्रक्रिया जटिल है। यह पूरी प्रक्रिया काफी वक्त भी लेती है।

भारत बायोटेक ने वैक्सीन सप्लाई से जुड़े 5 पॉइंट बताए

  • कंपनी के मुताबिक, कोवैक्सिन को बनाने, टेस्ट करने और उसका बैच रिलीज करने में 120 दिन लगते हैं। यानी इस साल मार्च में कोवैक्सिन के जितने डोज बने, वे सप्लाई के लिए जून तक ही तैयार हो सकेंगे।
  • इसकी वजह यही है कि यह पूरी प्रक्रिया जटिल है। इसके कई चरण होते हैं और इसमें काफी सारा ह्यूमन रिसोर्स चाहिए होता है।
  • वैक्सीन का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कई तरह की रेगुलेटरी प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। इस वजह से आम लोगों तक टीका लगने में 4 महीने का वक्त लग जाता है।
  • राज्यों और केंद्र को वैक्सीन उसी रूपरेखा के मुताबिक मुहैया कराई जा रही है, जिसे केंद्र सरकार ने तय किया है। जैसे- राज्यों और केंद्र सरकार के डिपो तक वैक्सीन सप्लाई में दो दिन का वक्त लगता है। वहां से ये टीके अलग-अलग जिलों तक भेजे जाते हैं। इसमें कुछ दिन का वक्त लग जाता है।
  • डिमांड को देखते हुए भारत बायोटेक 20 करोड़ अतिरिक्त डोज बनाने के लिए कदम उठा रहा है। ये डोज गुजरात स्थित एक यूनिट में बनाए जाएंगे। इससे कोवैक्सिन का सालाना प्रोडक्शन बढ़कर 100 करोड़ डोज हो जाएगा।

वैक्सीन प्रोडक्शन के मौजूदा आंकड़े क्या हैं?

  • सरकार ने मई में ही सुप्रीम कोर्ट को बताया कि देश में रोज करीब 27 लाख डोज बन रहे हैं। पर प्रोडक्शन और डोज देने के आंकड़े मेल नहीं खा रहे।
  • सरकार ने कहा था कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) हर महीने कोवीशील्ड के 5 करोड़ डोज बना रही है। भारत बायोटेक भी कोवैक्सिन के 2 करोड़ डोज हर महीने बना रही है।

वैक्सीनेशन को लेकर क्या स्थिति है?

  • कोविन पोर्टल पर वैक्सीनेशन के आंकड़े देखें तो मई के 22 दिन में 3.6 करोड़ डोज ही दिए गए। यानी 16 लाख डोज हर रोज। इस रफ्तार से मई अंत में 5 करोड़ डोज तक पहुंच सकते हैं।
  • पिछले कुछ हफ्तों में वैक्सीनेशन के आंकड़े तेजी से नीचे गिरे हैं। 16 से 22 मई के हफ्ते में सिर्फ 13 लाख डोज औसतन रोज दिए जा सके। इसे देखते हुए लग रहा है कि अगले हफ्ते में औसत और नीचे भी आ सकता है।
  • अप्रैल में केंद्र ने जो पॉलिसी बनाई है, उसके मुताबिक देश में बनने वाले आधे वैक्सीन डोज ही केंद्र सरकार खरीदेगी। बाकी बचे वैक्सीन डोज राज्यों और प्राइवेट अस्पतालों में जाएंगे।
  • राज्यों के पास इस समय वैक्सीन डोज नहीं हैं। इसी वजह से महाराष्ट्र, कर्नाटक और दिल्ली समेत कुछ राज्यों ने 18-44 वर्ष ग्रुप को वैक्सीनेट करने की योजना टालनी शुरू कर दी है।
  • प्रोडक्शन और सप्लाई गैप का एक संभावित जवाब हो सकता है- प्राइवेट सेक्टर का कोटा। यानी कुल प्रोडक्शन का एक-चौथाई हिस्सा प्राइवेट अस्पतालों के रास्ते लोगों तक पहुंचना था। कई कारणों से अस्पतालों की मैन्युफैक्चरर्स के साथ डील नहीं हो सकी है। इस वजह से इसमें देरी हो रही है।

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