COVID 19: भारत के चक्रव्यूह में फंसा चीन, वर्ल्ड हेल्थ असेम्बली में होगा ऐलान

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कोरोना वायरस को लेकर भारत ने चीन के खिलाफ ऐसी व्यूह रचना की है जिसमें चीन का फंसना तय है। चीन चाहकर भी न तो इस व्यूह से निकल सकता है और न ही भारत को दोष दे सकता है। दरअसल, अमेरिका शुरू से ही चीन पर आरोप लगाता रहा है कि कोरोना वायरस चीन की देन है। अमेरिका ने तो इसे वुहान वायरस का नाम भी दे दिया था। जी-20 शिखर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भारत ने सभी को नसीहत देते हुए कहा था कि आरोप-प्रत्यारोप छोड़कर कोरोना से मिलकर संघर्ष किया जाये और सफलता हासिल की जाये।

इस समय अमेरिका कोरोना वायरस का सबसे बड़ा शिकार है। अमेरिका ने कोरोना वायरस की स्वतंत्र जांच की मांग की है। अब यही मांग दुनिया के 62 देशों ने की है। इन 62 देशों में रूस भी शामिल है। जो अभीतक चीन के पक्ष में खड़ा दिखाई दे रहा था। ध्यान रहे, भारत ने कोरोना वायरस की स्वतंत्र मांग के प्रस्ताव का समर्थन किया है। भारत का इस प्रस्ताव को समर्थन करना बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्यों कि भारत आज ही डब्लूएचओ से एग्जीक्यूटिव बोर्ड का चेयरमैन बना है। माना जा यह भी जा रहा है कि यह प्रस्ताव पास होना तय है। इस प्रस्ताव की खासियत यह है कि प्रस्तावकों में अमेरिका और चीन दोनों ही नहीं हैं लेकिन प्रस्ताव दोनों की मान्य है।

ध्यान रहे, कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई। शुरुआत में चीन ने इस वायरस के मामलों को छिपाया। चीन की एक यूनिवर्सिटी ने कोरोना वायरस से चीन में मारे गये लोगों के नाम पूरे तथ्यों और प्रमाण के साथ लीक कर दिये। इसी के तुरंत बाद वुहान की सरकारी लैब के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि कोरोना वायरस के शुरूआती सैंपल सरकार के निर्देश पर नष्ट कर दिये गये। जानकारी छिपाने का कारण यह हुआ कि धीरे-धीरे कोरोना पूरी दुनिया में फैल गया और आज हालात ये हैं कि तीन लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। इसी कारण चीन की जवाबदेही तय करने की मांग दुनिया के कई देशों ने उठाई। अब चीन पर शिकंजा कसने की शुरुआत हो गई है। वहीं चीन का बचाव करने वाले वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गनाइजेशन की भूमिका भी तय होगी। भारत समेत दुनिया के 62 देशों ने कोरोना पर एक स्‍वतंत्र जांच की मांग की है। वर्ल्‍ड हेल्‍थ असेंबली में यूरोपियन यूनियन की ओर से यह प्रस्‍ताव पेश किया जाएगा। इसमें डिमांड की गई है कि कोविड-19 को लेकर डब्लूएचओ के नेतृत्‍व में इंटरनेशनल हेल्‍थ रेस्‍पांस की ‘निष्‍पक्ष, स्‍वतंत्र और विस्‍तृत जांच’ हो।

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