महाराष्ट्र में मंडरा रहा ‘निसर्ग’ (Cyclone Nisarga) का खतरा, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को सुरक्षित किया गया

Nisarga Cyclone

कोरोना संक्रमण से जूझ रहे महाराष्ट्र पर अब निसर्ग तूफान का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, निसर्ग तूफान बुधवार को मुंबई और कोंकण तट पर पहुंचने की आशंका है। इस दौरान करीब 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। अभी यह तूफान मुंबई से 490 किमी, गोवा की राजधानी से 280 किमी और गुजरात के सूरत से 710 किमी दूर है। 

इससे निपटने की राज्य के तटवर्ती जिलों में एनडीआरएफ की 15 कंपनियों को तैनात किया गया है। इसमें से दो कंपनियां सिर्फ मुंबई में तैनात हैं। इससे पहले सोमवार को बीएमसी डिजास्टर मैनेजमेंट अधिकारियों की मंत्रालय में राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक हुई और मुंबई में इससे निपटने की रणनीति बनी है।

पालघर में सुरक्षित किए गए परमाणु संयंत्र
निसर्ग तूफान के मद्देनजर तटीय पालघर और रायगढ़ जिलों में स्थित रासायनिक और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त एहतियात बरती जा रही है। इसके अलावा अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की दस इकाइयों को संवेदनशील जिलों में तैनात गया है, जबकि छह अन्य को तैयार रहने को कहा गया है।

मुंबई समेत राज्य के तटवर्ती जिलों में रेड अलर्ट
अरब सागर में बना कम दबाव का क्षेत्र मंगलवार सुबह तक डीप डिप्रेशन में बदल जाएगा। इससे मंगलवार की रात से बुधवार तक मुंबई, कोंकण के कई जिलों में भारी बारिश हो सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग ने इन जिलों में रेड अलर्ट जारी कर दिया है। रविवार को मौसम विभाग ने इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया था, लेकिन सोमवार को इसे बदलकर रेड कर दिया गया।

कहां- कहां हुई एनडीआरएफ की तैनाती
नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) की 15 टीमों को महाराष्ट्र के तटीय जिलों में तैनात किया गया है। इन जिलों में मुंबई, पालघर, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग हैं। एनडीआरएफ की टीमें महाराष्ट्र सरकार, मौसम विभाग और जिलों के प्रशासन से लगातार संपर्क में हैं। इनमें से 3 टीमें मुंबई में, 4 रायगढ़ में, 2 पलघर में, 2 ठाणे में, 2 रत्नागिरी में, एक सिंधुदुर्ग में और एक टीम नवी मुंबई में तैनात है

1891 के बाद पहली बार आया इस तरह का तूफान
मौसम विभाग के साइक्लोन ई-एटलस के मुताबिक- 1891 के बाद पहली बार अरब सागर में महाराष्ट्र के तटीय इलाके के आसपास समुद्री तूफान की स्थिति बन रही है। एक अंग्रेजी अखबार ने मौसम विज्ञानी अक्षय देवरस के हवाले से लिखा है कि इससे पहले 1948 और 1980 में दो बार इस तरह का दवाब (डिब्रेशन) बना था और तूफान आने की स्थिति बनी थी। लेकिन बाद में स्थिति टल गई थी। दो जून दोपहर के बाद से तीन जून तक महाराष्ट्र में काफी तेज गति से हवाएं चलने और भारी बारिश की संभावना है।

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