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Demand From Nabard To Interfere In Merger Of District Cooperative Banks – नाबार्ड से जिला सहकारी बैंकों के विलय में हस्तक्षेप करने की मांग


नाबार्ड मुख्य प्रबंधक से मिलते कोऑपरेटिव बैंक इम्प्लॉइज यूनियन के पदाधिकारी
– फोटो : अमर उजाला

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कोऑपरेटिव बैंक इम्प्लॉइज यूनियन ने प्रदेश के सभी जिला सहकारी बैंकों को उप्र सहकारी बैंक में विलय की कार्यवाही तेज करने की मांग की है। यूनियन के पदाधिकारियों ने बुधवार को नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डीएस चौहान से मुलाकात की और उन्हें बैंक की कमजोर वित्तीय स्थिति की जानकारी दी।

प्रदेश महामंत्री सुधीर कुमार सिंह के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने नाबार्ड मुख्य महाप्रबंधक को बताया कि आईआईएम के एसोसिएट प्रोफेसर विकास श्रीवास्तव की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने जिला सहकारी बैंक की स्थितियों को सुधारने उसका उप्र सहकारी बैंक में विलय करने क ी संस्तुति की गई है। इस संस्तुति को लगभग दो साल हो रहा है, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। उन्हें बताया गया कि बैंक में सिस्टम सॉफ्टवेयर के नाम पर बड़ी वित्तीय अनियमितता की जा रही है। यूनियन ने इसकी उच्चस्तरीय जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है।

सुधीर सिंह ने बताया कि प्रबंध निदेशक उप्र सहकारी बैंक जिला सहकारी बैंक कर्मचारियों के वेतन की बचत खातों में जमा राशि को निकालने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। कई कर्मचारी वेतन न मिलने के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। कई बैंक के कर्मचारियों का 25 साल से वेतन पुनरीक्षण किया जा रहा है। वहीं कुछ बैंकों के कर्मचारियों का 1996 से वेतन पुनरीक्षण नहीं हो पा रहा है।

इसके अलावा गाजियाबाद, सुल्तानपुर, बदायूं, जौनपुर, गाजीपुर, सहारनपुर बैंकों में अनियमितता की शिकायत यूनियन ने साक्ष्य सहित की है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस बारे में अपर मुख्य सचिव सहकारिता एमवीएस रामी रेड्डी से शिकायत की गई लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। नाबार्ड मुख्य प्रबंधक से मिलने वाले प्रतिनिधि मंडल में प्रदेश संरक्षक राजेश्वर सिंह, महेश प्रताप सिंह, ईश्वर सिंह चौहान, राजकुमार शर्मा भी शामिल थे।

कोऑपरेटिव बैंक इम्प्लॉइज यूनियन ने प्रदेश के सभी जिला सहकारी बैंकों को उप्र सहकारी बैंक में विलय की कार्यवाही तेज करने की मांग की है। यूनियन के पदाधिकारियों ने बुधवार को नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डीएस चौहान से मुलाकात की और उन्हें बैंक की कमजोर वित्तीय स्थिति की जानकारी दी।

प्रदेश महामंत्री सुधीर कुमार सिंह के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने नाबार्ड मुख्य महाप्रबंधक को बताया कि आईआईएम के एसोसिएट प्रोफेसर विकास श्रीवास्तव की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने जिला सहकारी बैंक की स्थितियों को सुधारने उसका उप्र सहकारी बैंक में विलय करने क ी संस्तुति की गई है। इस संस्तुति को लगभग दो साल हो रहा है, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। उन्हें बताया गया कि बैंक में सिस्टम सॉफ्टवेयर के नाम पर बड़ी वित्तीय अनियमितता की जा रही है। यूनियन ने इसकी उच्चस्तरीय जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है।

सुधीर सिंह ने बताया कि प्रबंध निदेशक उप्र सहकारी बैंक जिला सहकारी बैंक कर्मचारियों के वेतन की बचत खातों में जमा राशि को निकालने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। कई कर्मचारी वेतन न मिलने के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। कई बैंक के कर्मचारियों का 25 साल से वेतन पुनरीक्षण किया जा रहा है। वहीं कुछ बैंकों के कर्मचारियों का 1996 से वेतन पुनरीक्षण नहीं हो पा रहा है।

इसके अलावा गाजियाबाद, सुल्तानपुर, बदायूं, जौनपुर, गाजीपुर, सहारनपुर बैंकों में अनियमितता की शिकायत यूनियन ने साक्ष्य सहित की है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस बारे में अपर मुख्य सचिव सहकारिता एमवीएस रामी रेड्डी से शिकायत की गई लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। नाबार्ड मुख्य प्रबंधक से मिलने वाले प्रतिनिधि मंडल में प्रदेश संरक्षक राजेश्वर सिंह, महेश प्रताप सिंह, ईश्वर सिंह चौहान, राजकुमार शर्मा भी शामिल थे।



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