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Diseases are caused by milk in the rain, so because of being like poison, do anointing of Shiva with it | बारीश में दूध से होती हैं बीमारियां, इसलिए जहर समान होने के कारण इससे करते हैं शिवजी का अभिषेक


44 मिनट पहले

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  • ज्योतिष कहता है शिवलिंग पर दूध चढ़ाने से मजबूत होती है इच्छाशक्ति, क्योंकि मन का स्वामी चंद्रमा है और इस ग्रह का प्रभाव होता है दूध पर

आज सावन सोमवार है। इस दिन शिवलिंग पर दूध-जल और बिल्वपत्र के साथ ही कई तरह की फूल-पत्तियां चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा की जाती है। साथ ही श्रद्धा के अनुसार दिनभर व्रत या उपवास रखा जाता है और रात में जागरण करते हुए भजन किए जाते हैं। भगवान शिव की ये पूजा धार्मिक रूप से तो महत्वपूर्ण है ही। व्यवहारिक और ज्योतिषीय नजरिये से भी सावन के महीने में शिव पूजा खास होती है।

कई बीमारियों से बच जाते हैं
सावन महीने में भगवान शिव को दूध चढ़ाया जाता है। इस परंपरा को व्यवहारिक नजरिये से देखें तो इसके और भी फायदे हैं। जिन चीजों से प्राणों का नाश होता है, मतलब जो विष हैं, उन सबका भोग शिवजी को लगता है।

कई सालों पहले जब श्रावण महीने में हर जगह शिवलिंग पर दूध चढ़ता था, तब लोग समझ जाया करते थे कि इस महीने में दूध जहर के सामान है। ऐसे में वे इसलिए दूध त्याग देते थे कि कहीं उन्हें बरसाती बीमारियां न घेर लें। इसे हम इस तरह भी समझ सकते हैं कि शिव भगवान दूसरों के कल्याण के लिए हलाहल जैसा जहरीला दूध भी पी सकते हैं।

सेहत के नजरिये से: सावन में दूध होते हैं वात रोग
बनारस के आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रशांत मिश्र के बताते हैं कि सावन में दूध या दूध से बनी चीजें नहीं खानी चाहिए। क्योंकि इसमें वात की बीमारियां ज्यादा होती हैं। श्रावण के महीने में मौसमी बदलाव के कारण शरीर में वात बढ़ता है। तभी हमारे पुराणों में सावन के समय शिवजी को दूध अर्पित करने की परंपरा बन गई थी, क्योंकि सावन में गाय या भैंस घास के साथ कई कीडे़ भी खा लेती है। जो दूध को हानिकारक बना देते हैं।

ज्योतिषीय नजरिये से: मजबूत होती है इच्छा शक्ति
शिवलिंग पर दूध और पानी चढ़ाने का ज्योतिषीय नजरिया भी है। इसके अनुसार दूध और पानी पर चंद्रमा का प्रभाव होता है। शिवजी ने चंद्रमा को अपने सिर पर स्थान दिया है। वहीं चंद्रमा मन का कारक ग्रह भी है। चंद्रमा की अच्छी-बुरी स्थिति का असर मनुष्य मन पर पड़ता है। चंद्रमा के बुरे असर से बचने के लिए शिवलिंग पर चंद्रमा की कारक वस्तुएं दूध और जल चढ़ाई जाती हैं।

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