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Durgashtami on 13th and Mahanavami on 14th October, special worship of Goddess on these dates and tradition of girl worship | दुर्गाष्टमी 13 को और महानवमी 14 अक्टूबर को, इन तिथियों में देवी की विशेष आराधना और कन्या पूजा की परंपरा


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7 घंटे पहले

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  • 2 से 10 साल तक की उम्र वाली कन्याओं की पूजा करने की परंपरा, कन्या पूजा से बढ़ती है सुख-समृद्धि

महाष्टमी और नवमी के पर देवी का रूप मानकर कन्याओं की पूजा की जाती है। माना जाता है की कन्याओं की पूजा के साथ भोजन करवाने से देवी दुर्गा प्रसन्न होती हैं। इससे भक्तों को सुख समृद्धि का वरदान मिलता है। नौ कन्याओं को नौ देवियों का रूप मानकर पूजने के बाद ही नवरात्र व्रत पूरा माना जाता है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर हवन और देवी की महा पूजा की परंपरा है।

धर्म ग्रंथों के मुताबिक कन्या पूजन के लिए दुर्गाष्टमी और नवमी का दिन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और शुभ माना गया है। इस दिन ऐसी कन्याओं की पूजा करनी चाहिए। जिनकी उम्र दो साल से ज्यादा तथा 10 साल तक की होनी चाहिए। इन कन्याओं की संख्या कम से कम 9 तो होनी ही चाहिए और एक बालक भी होना चाहिए जिसे हनुमानजी या भैरव का रूप माना जाता है।

कन्या पूजन के नियम
महाष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन के कुछ नियम श्रीमद् देवीभागवत में बताए गए हैं। जिसके मुताबिक एक साल की कन्या को नहीं बुलाना चाहिए, क्योंकि वह कन्या गंध भोग आदि चीजों के स्वाद से बिल्कुल अनजान रहती हैं इसलिए 2 से 10 साल तक की कन्याओं की पूजा की जा सकती है।

कन्या पूजा से बढ़ती है सुख-समृद्धि
कन्याओं को बुलाने के बाद उनकी पूजा करनी चाहिए। फिर सभी को खीर या हलवा-पुड़ी के साथ अन्य चीजें खिलाएं। भोजन के बाद कन्याओं के पैर धुलवाएं और उनके पैर के अंगूठे की पूजा करें। इस पूजा में कुमकुम, चंदन, फूल और चावल का उपयोग करें। फिर कन्याओं की आरती करें और श्रद्धा अनुसार उनको दक्षिणा, फल और वस्त्र दान करें। इसके बाद कन्याओं को प्रणाम कर के विदा करें। कन्या पूजन से दरिद्रता खत्म होती है और दुश्मनों पर जीत मिलती है। धन और उम्र बढ़ती है। वहीं, विद्या और सुख-समृद्धि भी मिलती है।

किस उम्र की कन्या को कौन सी देवी का रुप माना जाता है
दो साल की कन्या को कुमारिका कहा गया है और इनकी पूजा से आयु और बल बढ़ता है। तीन साल की कन्या त्रिमूर्ति होती हैं और इनकी पूजा करने से सुख-समृद्धि आती है। चार साल वाली कन्या को कल्याणी कहा गया है। इनकी पूजा से लाभ मिलता है। पांच साल की कन्या रोहिणी होती है इनकी पूजा से शारीरिक सुख मिलता है।

6 साल की कन्या की पूजा से दुश्मनों पर जीत मिलती है। इन्हें कालिका का रूप माना गया है। साल साल की कन्या को चंडिका माना गया है। इनकी पूजा से संपन्नता और ऐश्वर्य मिलता है। आठ साल वाली कन्या देवी शाम्भवी का रूप मानी गई है। इनकी पूजा से दुःख और दरिद्रता खत्म होती है। नौ साल की कन्या दुर्गा होती है। इनकी पूजा करने से हर काम में सफलता मिलती है। वहीं, 10 साल की कन्या को सुभद्रा कहा गया है और इनकी पूजा से मोक्ष मिलता है।

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