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Electoral Bond Case Update; Supreme Courtbig Relief To Narendra Modi Government Before 5 States Assembly Election 2021 | 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार को राहत; सुप्रीम कोर्ट ने बॉन्ड पर रोक लगाने संबंधी याचिका खारिज की


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नई दिल्ली4 मिनट पहले

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एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) नाम के एक NGO ने सुप्रीम कोर्ट से एक अप्रैल से इलेक्टोरल बॉन्ड की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की थी। - Dainik Bhaskar

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) नाम के एक NGO ने सुप्रीम कोर्ट से एक अप्रैल से इलेक्टोरल बॉन्ड की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने शुक्रवार को इलेक्टोरल बॉन्ड की बिक्री पर रोक लगाने संबंधी याचिका खारिज कर दी। याचिका के जरिए कोर्ट से एक अप्रैल से इन बॉन्ड्स की ब्रिक्री पर रोक लगाने की गुहार लगाई गई थी। इससे पहले कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए बॉन्‍ड के दुरुपयोग को लेकर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था।

दुरुपयोग को रोकने के लिए पर्याप्त उपाय मौजूद
कोर्ट ने कहा कि 2018 से इलेक्ट्रोल बॉन्ड की स्कीम लागू है। इसके बाद 2018, 2019 और 2020 में भी इसकी बिक्री होती रही। फिलहाल इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए पर्याप्त उपाय मौजूद हैं, इसलिए इस पर रोक लगाने का कोई औचित्य नजर नहीं आता।

चुनाव आयोग को बॉन्ड से आपत्ति नहीं
इससे पहले चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वह चुनावी बॉन्ड योजना का समर्थन करता है क्योंकि अगर ये नहीं होगा तो राजनीतिक पार्टियों को चंदा कैश में मिलेगा। हालांकि वह चुनावी बॉन्ड योजना में और पारदर्शिता चाहता है।

एक NGO ने लगाई थी याचिका
एक NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) की ओर से दाखिल याचिका पर बुधवार को वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में कहा था कि इलेक्टोरल बॉन्ड सत्ताधारी दल को चंदे के नाम पर रिश्वत देकर अपना काम कराने का जरिया बन गया है। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा था कि हमेशा ये रिश्वत का चंदा सत्ताधारी दल को ही नहीं, बल्कि उस दल को भी मिलता है, जिसके अगली बार सत्ता में आने के आसार प्रबल रहते हैं।

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