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For the first time in Uttar Pradesh, Darshan from the Ropeway in a pilgrimage place, on August 1, Home Minister Amit Shah and Yogi will inaugurate | UP में पहली बार किसी तीर्थधाम में रोपवे की सुविधा, गृहमंत्री अमित शाह करेंगे शुभारंभ; वाराणसी के काशी कॉरिडोर की तर्ज पर बनेगा विंध्य कॉरिडोर


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मिर्जापुर17 मिनट पहले

  • एक अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह और योगी करेंगे रोपवे का लोकार्पण
  • 288 करोड़ से बनने वाले विंध्य कॉरीडोर का भी किया जाएगा शिलान्यास

मिर्जापुर स्थित विंध्याचाल धाम में माता विंध्यवासिनी देवी का दर्शन अब श्रद्धालु रोपवे के जरिये कर सकेंगे। एक अगस्त को गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका शुभारंभ करेंगे। अभी तक श्रद्धालुओं को माता विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए काफी चढ़ाई चढ़नी पड़ती थी।

ये यूपी का पहला तीर्थधाम है जहां, रोपवे की सुविधा होगी। इसे बनाने में 16 करोड़ रुपया खर्च किया गया है। रोप-वे के साथ ही मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल 288 करोड़ की लागत से विंध्य कॉरिडोर योजना का भी शिलान्यास किया जाएगा।

भक्तों में उत्साह, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

यूपी के पहले रोपवे का लोकार्पण विंध्याचल धाम में गृहमंत्री अमित शाह और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1 अगस्त को करेंगे।

यूपी के पहले रोपवे का लोकार्पण विंध्याचल धाम में गृहमंत्री अमित शाह और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1 अगस्त को करेंगे।

माता विंध्यवासिनी धाम में आने वाले भक्त रोपवे से सैर को लेकर खासा उत्साहित हैं। रोपवे की सुविधा होने से वृद्ध और दिव्यांग भक्तों को दर्शन पूजन करने में मदद मिलेगी । त्रिकोण पथ पर पड़ने वाले कालीखोह और अष्टभुजा मंदिर में जाने में सुविधा होगी । पर्यटकों के आने से स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा। बिहार रोहतास से आए बैकुंठ मिश्र और अजीत कुमार मानते हैं कि इससे पर्यटकों को काफी सुविधा मिलेगी । मंदिर की संकरी गलियों के बजाय 35 फीट चौड़ा मार्ग मिलेगा। मंदिर का परिक्रमा करने के लिए भी 50 फीट चौड़ा जगह तीर्थ यात्रियों को उपलब्ध होगा। मंदिर व्यवस्था सुदृढ़ होने से और भक्तों को सुविधा मिलने से पर्यटन के लिहाज से यह एक अच्छा कार्य है।

अब नहीं चढ़नी पड़ेगी 225 सीढ़ियां, आराम से जा सकेंगे दर्शन के लिए

भगवान श्रीकृष्ण की बहन योगमाया माता अष्टभुजा विंध्य पर्वत पर विराजमान हैं । जिसका वर्णन मार्कण्डेय पुराण में लिखा है कि नंद गोप गृहे जाता यशोदा गर्भ सम्भवा, ततस्तौ नाशयिष्यामी विंध्याचल निवासिनी। मां के मंदिर पर जाने के लिए भक्तों को पहाड़ पर करीब तीन सौ फीट की चढ़ाई चढ़नी पड़ती हैं । इसके लिए करीब 225 सीढ़ी मां काली खोह से बना है जो गेरुआ तालाब पहुंचाता है । दूसरा सीढ़ी वाला मार्ग अष्टभुजा माता के मंदिर के नीचे से आरम्भ होती हैं । क़रीब ढाई सौ सीढ़ी चढ़ना पड़ता हैं । तीसरा मार्ग सड़क मार्ग से पहाड़ पर जाने के बाद मंदिर की करीब सौ सीढ़ी उतरना पड़ता है।

मां के मंदिर पर जाने के लिए भक्तों को पहाड़ पर करीब तीन सौ फीट की चढ़ाई चढ़नी पड़ती हैं। इसके लिए करीब 225 सीढ़ी मां काली खोह से बना है, जो गेरुआ तालाब पहुंचाता है।

मां के मंदिर पर जाने के लिए भक्तों को पहाड़ पर करीब तीन सौ फीट की चढ़ाई चढ़नी पड़ती हैं। इसके लिए करीब 225 सीढ़ी मां काली खोह से बना है, जो गेरुआ तालाब पहुंचाता है।

16 करोड़ की लागत से स्थापना, राेपवे से दिखेगा प्राकृतिक सौंदर्य
जिलाधिकारी प्रवीण लक्षकार ने बताया कि लोकार्पण का इंतजार कर रहे हैं। 16 करोड़ की लागत से बने रोपवे का लोकार्पण 1 अगस्त को तय है। रोपवे की सुविधा होने से भक्तों को चंद सीढ़ी चढ़ने उतरने के बाद दर्शन सुलभ होगा । दर्शन के साथ ही प्राकृतिक सौंदर्य को भी लोग निहार पाएंगे। एक तरफ पहाड़ तो दूसरी तरफ मां गंगा की निर्मल धारा दिखाई पड़ती है।

400 मीटर लंबा होगा विश्वनाथ कॉरिडोर

वाराणसी का विश्वनाथ कॉरिडोर करीब 450 करोड़ से भी ज्यादा की लागत से तैयार किया जा रहा है। कॉरिडोर के अंदर 24 भवनों का निर्माण किया जा रहा है। वहीं 39000 वर्ग मीटर क्षेत्र के अंदर 400 मीटर लंबे भव्य कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। यह कॉरिडोर गंगा नदी के ललिता घाट से काशी विश्वनाथ मंदिर से सीधा जोड़ने वाला है। इससे भक्त मां गंगा में स्नान करने के साथ ही उनका पावन जल लेकर सीधे बिना किसी रोक-टोक के बाबा विश्वनाथ के मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। अब संकरी गलियों से होकर जाने वाले भक्तों को अब बेहद खुले स्थानों से होते हुए बाबा विश्वनाथ के दर्शन प्राप्त होंगे। यहां पर सैलानियों को तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।

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