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From the psychological and spiritual point of view, the Teej festival in the last days of Phalgun month is special. | मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक नजरिये से भी खास है फाल्गुन महीने के आखिरी दिनों में आने वाले तीज-त्योहार


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17 घंटे पहले

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  • प्रेम का पर्व है फाल्गुन की रंगभरी एकादशी, वहीं उल्लास और आनंद का त्योहार है होली

होलाष्टक यानी होली से पहले के आठ दिनों में आने वाले तीज-त्योहार धार्मिक रूप से तो खास है ही साथ ही मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक नजरिये से भी महत्वपूर्ण है। इस तरह फाल्गुन महीने का आखिरी हफ्ता हमें सीखाता है कि हमेशा सकारात्मक सोचें चाहे परिस्थितियां कैसी भी हो। इस सप्ताह के व्रत, त्योहारों में भी यही भाव छिपा है। इस दिनों में आने वाले तीज-त्योहार सकारात्मक ऊर्जाओं और खुशियों से भरे होते हैं।

फाल्गुन महीने से आखिरी दिनों में आने वाले तीज-त्योहारों से जुड़ी रोचक बातें

  1. मान्यता है कि इस दिनों शुक्लपक्ष की एकादशी का महत्व भगवान शिव से जुड़ा है। विद्वानों का कहना है कि इसी तिथि पर देवी पार्वती का गौना हुआ था और भगवान शिव, देवी को काशी में लाए थे। साथ ही इस दिन भगवान विष्णु से आंवले के पेड़ की उत्पत्ति हुई थी। इसलिए इस दिन हरि-हर यानी भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा करने की परंपरा है।
  2. इस एकादशी को रंगभरी ग्यारस भी कहा जाता है। इस दिन फाग उत्सव भी मनाया जाता है। इस एकादशी से ही भगवान विष्णु के अवतार यानी श्रीकृष्ण के मंदिरों में होली की शुरूआत हो जाती है। इसके बाद से हर दिन अलग-अलग फूलों और अबीर गुलाल से होली खेली जाती है।
  3. रंगभरी एकादशी के दिन ही काशी में भगवान शिव की सवारी निकाली जाती है। इस दिन भगवान शिव को मुर्दों की भस्म से होली खेलाई जाती है। साथ ही सभी शिव भक्त भी भस्म से होली खेलते हैं।
  4. फाल्गुन महीने के आखिरी दिन मनाए जाने वाला होली उत्सव का अत्यंत धार्मिक, सामाजिक, आध्यात्मिक महत्व है। यह आनंद, प्रेम, सद्भावना का पर्व है। यह भावनाओं के स्तर पर एक दूसरे के रंग में रंग जाने का अवसर है।
  5. लिंगपुराण में होलिका उत्सव को फल्गुनिका के नाम से जाना जाता है। जिसे बालकों की क्रीड़ाओं से पूर्ण और सुख समृद्धि देने वाला बताया गया है।
  6. इसी तरह वराहपुराण में भी इस उत्सव को पटवास विलासीनी यानी चूर्णयुक्त खेल और लोक कल्याण करने वाला बताया गया है।

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