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Gangaur 2021 Puja Vidhi | Gangaur Shiva Puja Ka Shubh Muhurat Date Timing, Lord Shiva Goddess Parvati Gangaur Vrat Katha Story Importance and Significance | मिट्टी से बनाते हैं भगवान शिव-पार्वती की मूर्ति पति की लंबी उम्र के लिए होता है ये व्रत


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20 घंटे पहले

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  • गण यानी शिव और गौर का मतलब होता है पार्वती, इनकी पूजा से बढ़ता है सौभाग्य और मिलती है समृद्धि

आज गणगौर पर्व मनाया जा रहा है। ये त्योहार चैत्र महीने के शुक्लपक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। गणगौर पूजा चैत्र महीने के कृष्णपक्ष की तृतीया तिथि से शुरू की जाती है। इसमें कुंवारी कन्याएं और शादीशुदा महिलाएं मिट्टी के शिव जी यानी की गण और माता पार्वती यानी गौर बनाकर पूजा करती हैं। गणगौर खत्म होने पर त्योहार धूम धाम से मनाया जाता है और झांकियां भी निकलती हैं।

सोलह दिन तक महिलाएं सुबह जल्दी उठ कर बगीचे में जाती हैं, दूब और फूल चुन कर लाती हैं। दूब लेकर घर आती है उस दूब से दूध के छीटें मिट्टी की बनी हुई गणगौर माता को देती हैं। वे चैत्र शुक्ल द्वितीया के दिन किसी नदी, तालाब या सरोवर पर जाकर अपनी पूजी हुई गणगौरों को पानी पिलाती हैं और दूसरे दिन शाम के समय उनका विसर्जन कर देती हैं। जहां पूजा की जाती है उस जगह को गणगौर का पीहर और जहां विसर्जन होता है वो जगह ससुराल माना जाता है।

अविवाहित कन्या करती हैं अच्छे वर की कामना
गणगौर एक ऐसा पर्व है, जो हर महिला मनाती हैं। इसमें कुवारी कन्या से लेकर, शादीशुद महिला भगवान शिव और माता पार्वती की पूजन करती हैं। ऐसा माना जाता है कि शादी के बाद पहला गणगौर पूजन मायके में किया जाता हैं। इस पूजन का महत्व अविवाहित कन्या के लिए, अच्छे वर की कामना को लेकर रहता है जबकि, विवाहित स्त्री अपने पति की लंबी उम्र के लिए ये व्रत करती है। इसमें कुंवारी कन्या पूरी तरह से तैयार होकर और, विवाहित स्त्री सोलह श्रृंगार करके पूरे सोलह दिन विधि-विधान से पूजन करती है।

शिवजी की विशेष पूजा
देवी पार्वती की पूजा के साथ ही इस दिन शिवजी की विशेष पूजा करने की भी परंपरा है। ऐसा करने से पति की उम्र बढ़ती है और हर तरह की शारीरिक परेशानियां भी दूर होती हैं। इस दिन भगवान शिव को शुद्ध जल, ताजा दूध, पंचामृत, चंदन, भांग, बिल्वपत्र, मदार के फूल और गन्ने का रस चढ़ाना चाहिए। इन चीजों को चढ़ाने से मनोकामना पूरी होती है।

देवी पार्वती की विशेष पूजा
गणगौर पर देवी पार्वती की भी विशेष पूजा करने का विधान है। तीज यानी तृतीया तिथि की स्वामी गौरी हैं। इसलिए देवी पार्वती की पूजा सौभाग्य सामग्री से करें। सौलह श्रृंगार चढ़ाएं। देवी पार्वती को कुमकुम, हल्दी और मेहंदी खासतौर से चढ़ानी चाहिए। इसके साथ ही अन्य सुगंधित सामग्री भी चढ़ाएं।

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