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Gopeshwar temple in chamoli district in uttarakhand, old shiv temple in uttarakhand, gopeshwar mahadev mandir | गोपेश्वर मंदिर के पास शिवजी ने भस्म किया था कामदेव को, यहीं रति ने तप करके शिव जी को किया था प्रसन्न


9 घंटे पहले

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सावन माह का कृष्ण खत्म हो गया है। सोमवार, 9 अगस्त से शुक्ल पक्ष शुरू हो रहा है। इस माह में शिवजी की पूजा के साथ ही उनके मंदिरों में दर्शन करने का महत्व काफी अधिक है। द्वादश ज्योतिर्लिंग के अलावा भी भारत में शिव जी कई अन्य प्राचीन मंदिर हैं। उत्तराखंड के चामोली जिले में गोपेश्वर नाम का प्राचीन मंदिर स्थित है। इसे गोस्थल के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि यहां महादेव देवी पार्वती के साथ वास करते हैं। इसी क्षेत्र में शिव जी ने कामदेव को भस्म किया था।

बद्रीनाथ के धर्माधिकारी भुवनचंद्र उनियाल के मुताबिक स्कंदपुराण के केदारखंड में इस तीर्थ के बारे में बताया गया है। स्कंद पुराण, केदारखंड, अध्याय-55 में लिखा है कि शिवजी मां पार्वती से कहते हैं, ‘यह गोस्थल नाम का दर्शनीय स्थल है। जहां मैं तुम्हारे साथ नित्य निवास करता हूं, यहां मेरा नाम पश्वीश्वर है। इस स्थान में भक्तों की भक्ति विशेष बढ़ती जाती है। वहां हमारा चिह्न स्वरूप जो त्रिशूल है, वह हैरान करने वाला है।

अगर कोई व्यक्ति ताकत के साथ इस त्रिशूल को हिलाने का प्रयास करेगा तो यह बिल्कुल भी कंपित नहीं होगा, लेकिन भक्ति के साथ हथेली की सबसे सबसे छोटी उंगली से इस त्रिशूल को स्पर्श किया जाएगा तो इसमें कंपन होता है।

गोपेश्व मंदिर के ठीक पास में एक वृक्ष है, जो हर ऋतु में एक जैसा सदा पुष्पों से भरा रहता है। केदारखंड के अनुसार महादेव ने अपने तीसरे नेत्र से कामदेव को इसी स्थान पर भस्म कर दिया था।

इसी स्थान पर भगवान शिवजी का नाम रतीश्वर भी पड़ा, क्योंकि कामदेव के भस्म होने के बाद कामदेव की पत्नी रति ने यहां एक कुंड के निकट घोर तप किया और भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि कामदेव प्रद्युम्न के रूप में भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र बनकर जन्म लेंगे और वही तुम्हारी उनसे भेंट होगी। जहां रति ने तप किया, उस कुंड का नाम रतिकुंड पड़ा। जिसे वैतरणीकुंड भी कहा जाता है। द्वारिका में प्रद्युम्न के रूप में कामदेव का जन्म हुआ और मायावती के रूप में रति का भी पुनर्जन्म हुआ था।

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