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Govardhan Scheme Will Be Implemented In Three Districts Including Lucknow – लखनऊ सहित तीन जिलों में लागू होगी गोवर्धन योजना


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
– फोटो : Twitter

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प्रदेश की अफसरशाही ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुप्रचारित गोवर्धन योजना को प्रदेश में लागू करने में दो वर्ष से अधिक वक्त लगा दिया। यही नहीं, इसके क्रियान्वयन को पायलट प्रोजेक्ट तक सीमित कर दिया गया है। पहले चरण में यह योजना लखनऊ, वाराणसी और ललितपुर जिले में ही लागू होगी। 

केंद्र सरकार ने वर्ष 2018-19 के आम बजट में गोवर्धन योजना (वेस्ट टू वेल्थ) का एलान किया था। इसके बाद फरवरी-2018 में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों का आह्वान किया था कि वे गोबर और कचरे को सिर्फ  कचरे के रूप में नहीं बल्कि आय के स्रोत के रूप में देखें। मगर प्रदेश में इस योजना के क्रियान्वयन में दो साल से अधिक वक्त लग गया। 

हाल ही मुख्य सचिव आरके तिवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस योजना को लागू करने की रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। इसके लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति में बायोगैस निर्माण व संचालन से जुड़े दो से तीन उद्यमियों व विशेषज्ञों, जैव ऊर्जा बोर्ड के राज्य समन्वयक, नाबार्ड के प्रतिनिधि व अपर मुख्य सचिव दुग्धशाला विकास को शामिल करने का फैसला हुआ। इसी तरह जिला स्तर पर गोवर्धन सेल गठित करने पर सहमति बनी। 

बैठक में यह भी तय हुआ कि योजना का संचालन पंचायतीराज निदेशालय करेगा। इसके लिए पंचायतीराज निदेशालय को नोडल एजेंसी नामित कर दिया गया है। समिति ने व्यक्तिगत व कॉमर्शियल बायोगैस उत्पादन संबंधी मॉड्यूल विकसित करने का निर्देश दिया है। इसमें प्रोजेक्ट की लागत व आवश्यक अनुदान आदि की जानकारी देनी होगी।

योजना के मुख्य फायदे

– गोबर, कृषि अपशिष्ट, रसोई घर के कचरे आदि को कम्पोस्ट, बायोगैस व बायो सीएनजी में बदलने का लक्ष्य।
– गोबर धन योजना से ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ रखने में मदद।
– बायोगैस से खाना पकाने और लाइटिंग के लिए ऊर्जा मिल सकेगी। 
– किसानों व पशुपालकों की अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनेगा।

प्रदेश की अफसरशाही ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुप्रचारित गोवर्धन योजना को प्रदेश में लागू करने में दो वर्ष से अधिक वक्त लगा दिया। यही नहीं, इसके क्रियान्वयन को पायलट प्रोजेक्ट तक सीमित कर दिया गया है। पहले चरण में यह योजना लखनऊ, वाराणसी और ललितपुर जिले में ही लागू होगी। 

केंद्र सरकार ने वर्ष 2018-19 के आम बजट में गोवर्धन योजना (वेस्ट टू वेल्थ) का एलान किया था। इसके बाद फरवरी-2018 में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों का आह्वान किया था कि वे गोबर और कचरे को सिर्फ  कचरे के रूप में नहीं बल्कि आय के स्रोत के रूप में देखें। मगर प्रदेश में इस योजना के क्रियान्वयन में दो साल से अधिक वक्त लग गया। 

हाल ही मुख्य सचिव आरके तिवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस योजना को लागू करने की रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। इसके लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति में बायोगैस निर्माण व संचालन से जुड़े दो से तीन उद्यमियों व विशेषज्ञों, जैव ऊर्जा बोर्ड के राज्य समन्वयक, नाबार्ड के प्रतिनिधि व अपर मुख्य सचिव दुग्धशाला विकास को शामिल करने का फैसला हुआ। इसी तरह जिला स्तर पर गोवर्धन सेल गठित करने पर सहमति बनी। 

बैठक में यह भी तय हुआ कि योजना का संचालन पंचायतीराज निदेशालय करेगा। इसके लिए पंचायतीराज निदेशालय को नोडल एजेंसी नामित कर दिया गया है। समिति ने व्यक्तिगत व कॉमर्शियल बायोगैस उत्पादन संबंधी मॉड्यूल विकसित करने का निर्देश दिया है। इसमें प्रोजेक्ट की लागत व आवश्यक अनुदान आदि की जानकारी देनी होगी।

योजना के मुख्य फायदे

– गोबर, कृषि अपशिष्ट, रसोई घर के कचरे आदि को कम्पोस्ट, बायोगैस व बायो सीएनजी में बदलने का लक्ष्य।

– गोबर धन योजना से ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ रखने में मदद।

– बायोगैस से खाना पकाने और लाइटिंग के लिए ऊर्जा मिल सकेगी। 

– किसानों व पशुपालकों की अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनेगा।



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