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Gujarat’s Stambeshwar Mahadev Temple, unknwon facts of Stambeshwar Mahadev Temple in hindi | गुजरात का स्तंभेश्वर महादेव मंदिर दिन में दो बार डूब जाता है समुद्र में, कार्तिकेय स्वामी ने की थी मंदिर की स्थापना


15 घंटे पहले

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सावन माह में शिव जी के मंदिरों में दर्शन और पूजन करने से भगवान की विशेष कृपा मिलती है। इसी मान्यता की वजह से शिव जी के प्राचीन मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रहती है। गुजरात में वडोदरा से करीब 85 किमी दूर कावी-कंबोई गांव में एक प्राचीन शिव मंदिर है। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना कार्तिकेय स्वामी ने की थी। ये मंदिर दिन में दो बार समुद्र में डूब जाता है।

समुद्र में आने वाले ज्वारभाटा की वजह से ये मंदिर पानी में डूब जाता है और कुछ समय बाद फिर से दिखाई देने लगता है। गुजरात की जंबूसर तहसील का ये मंदिर शिव जी भक्तों के साथ ही अन्य पर्यटकों के लिए भी हैरान करने वाला है। मंदिर का चमत्कार देखने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक यहां रोज आते हैं।

भक्त मंदिर में शिवलिंग के दर्शन सिर्फ तभी कर सकते हैं, जब समुद्र का जल स्तर कम हो। ज्वार के समय शिवलिंग पूरी तरह से डूब जाता है। उस समय मंदिर तक नहीं पहुंचा जा सकता है। ये मंदिर अरब सागर के बीच कैम्बे तट पर बना हुआ है।

शिवपुराण में है मंदिर का उल्लेख

इस तीर्थ का उल्लेख श्री महाशिवपुराण की रुद्र संहिता में मिलता है। इस मंदिर में करीब 4 फीट ऊंचा और 2 फीट चौड़ा शिवलिंग स्थापित है। मंदिर के आसपास अरब सागर का नजारा बहुत ही मनमोहक दिखाई देता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को ज्वार-भाटे के समय का विशेष ध्यान रखना होता है।

कार्तिकेय स्वामी ने की थी मंदिर की स्थापना

मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापन कार्तिकेय स्वामी ने स्वयं की थी। इस संबंध में कथा प्रचलित है कि पुराने समय में देवी सती ने दक्ष के यज्ञ कुंड में कूदकर प्राण त्याग दिए थे। इस वजह से शिव जी वियोग में थे। उस समय तारकासुर को वरदान मिला था कि उसकी मृत्यु शिव जी के पुत्र के हाथों ही होगी।

वरदान मिलने के बाद तारकासुर का आतंक बढ़ गया था। तब देवताओं और ऋषि-मुनियों ने शिव जी से प्रार्थना की थी कि वे देवी पार्वती से विवाह कर लें। देवी पार्वती ने भी शिव जी को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। तप से प्रसन्न होकर शिव जी देवी पार्वती से विवाह कर लिया और जब कार्तिकेय स्वामी का जन्म हुआ तो कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर दिया था। बाद में जब कार्तिकेय को मालूम हुआ कि तारकासुर शिव भक्त था तो उन्हें काफी पछतावा हुआ। तब भगवान विष्णु ने कार्तिकेय स्वामी से कहा था कि उस स्थल पर जहां तारकासुर का वध किया है, वहां शिव मंदिर की स्थापना करनी चाहिए, इससे आपको मन की शांति मिल सकती है। विष्णु जी की बात मानकर कार्तिकेय स्वामी ने स्तंभेश्वर महादेव की स्थापना की थी।

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