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Heavy firing after blast in down town of Srinagar, Bhaskar reporter also trapped on the spot | श्रीनगर के डाउनटाउन में धमाके के बाद भारी गोलीबारी, भास्कर रिपोर्टर भी मौके पर फंसे


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श्रीनगर33 मिनट पहले

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटने के 2 साल आज पूरे हो रहे हैं। इसी दिन श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में एक जबरदस्त ब्लास्ट और फायरिंग हुई। डाउनटाउन इलाके में जब ये धमाका हुआ तो दैनिक भास्कर रिपोर्टर वैभव पलनीटकर वहीं मौजूद थे। उन्होंने फोन पर ब्लास्ट के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि ब्लास्ट के बाद भारी फायरिंग भी हुई और अफरातफरी मच गई। वे डाउनटाउन इलाके की जामा मस्जिद के सामने की एक दुकान में फंस गए थे। वैभव ने वाइस क्लिप और वीडियोज के जरिए ब्लास्ट की जगह की आंखो देखी बयान की।

धमाके के बाद जामा मस्जिद इलाके में भारी संख्या में पुलिस फोर्स और मीडिया पहुंच गई।

धमाके के बाद जामा मस्जिद इलाके में भारी संख्या में पुलिस फोर्स और मीडिया पहुंच गई।

भास्कर रिपोर्टर की आंखों देखी
5 अगस्त 2021 को कश्मीर में आर्टिकल 370 के हटने के 2 साल पूरा होने पर मैं रिपोर्टिंग के लिए निकला था। श्रीनगर के अलग- अलग इलाके घूमने के लिए मैंने मंसूर अहमद का ऑटो बुक किया। 12 बजे के करीब हम डाउनटाउन में जामा मस्जिद के इलाके में पहुंचे। जामा मस्जिद के ठीक सामने उतरकर हम कुछ वीडियो रिकॉर्ड करने वाले थे। तभी मैंने सोचा कि वहां खड़े कुछ पुलिस अधिकारियों से बात कर ली जाए।

मैं मस्जिद के सामने स्थित एक गली में वहां के लोकल SHO से बात कर रहा था। तभी जामा मस्जिद के गेट के सामने एक जोरदार धमाका हुआ। इसके बाद तुरंत भारी फायरिंग होने लगी। पुलिस की ओर से भी जवाबी फायरिंग की गई। अफरातफरी के माहौल में कुछ लोकल लोगों ने मदद की। मैं उनके साथ भागकर आया और एक खिलौने की दुकान में शरण ली। वहां भी काफी देर तक फायरिंग की आवाजें आ रही थीं। उस दुकान पर मौजूद लोगों ने मुझे पानी दिया। इस दौरान मैंने वहां के एएसपी को फोन किया तो उन्होंने कहा कि मैं बोलता हूं उस इलाके के लोकल SHO आपकी मदद करेंगे। लेकिन, काफी देर तक मदद के लिए कोई आया नहीं। फायरिंग की आवाजें भी 5-7 मिनट बाद बंद हो गईं, लेकिन शोरगुल सुनाई दे रहा था।

करीब आधे घंटे बाद हालात सामान्य हो गए तो हम दुकान के पीछे वाले रास्ते से बाहर निकले। मेरा बैग-लैपटॉप ऑटो में ही था। खबर फाइल करने के लिए मैं ऑटो वाले मंसूर को खोजने लगा। मंसूर थोड़ी देर बाद हमें मिल गए। वह हमारा इंतजार कर रहे थे। इल वक्त तक वहां काफी पत्रकार और प्रेस फोटोग्राफर पहुंच चुके थे। सुरक्षाबलों के भी कई दस्ते तब तक जामा मस्जिद के पास आ चुके थे।

पुलिस अधिकारियों से हमने ब्लास्ट के बारे में पूछा, लेकिन उन्होंने इस बारे में कुछ भी बताने से इन्कार कर दिया। उन्होंने बस यह बताया कि विस्फोट में कोई हताहत नहीं हुआ है। इसके बाद पुलिस ने वहां से लोगों और मीडिया को दूर करना शुरु कर दिया।

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