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Human rights commission issued advisory to central and state governments, on the matter of dead bodies flowing in the rivers | नदियों में बहती लाशों को लेकर मानवाधिकार आयोग ने केंद्र और राज्य सरकारों को एडवाइजरी जारी की, 4 हफ्ते में रिपोर्ट मांगी


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नई दिल्ली25 मिनट पहलेलेखक: संध्या द्विवेदी

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यूपी और बिहार के कुछ जिलों में गंगा नदी में सैकड़ों लाशें तैरती दिखीं। कई घाटों पर रेत में दफनाए गए शवों पर मंडराते चील कौवों की दर्दनाक तस्वीर सामने आई। इससे पहले कुछ खबरें ऐसी भी आईं कि सगे-संबंधी शव को श्मशान घाट के सामने लावारिश छोड़कर चले गए। कुछ ने लकड़ियां न मिलने के कारण नदी में शव बहा दिया।

शवों की इस बेकदरी पर अब मानवाधिकार आयोग ने केंद्र और राज्य सरकारों को एडवाइजरी जारी की है साथ ही 4 हफ्ते में इस पर रिपोर्ट भी मांगी है। आयोग ने संविधान में दर्ज आर्टिकल-21 का हवाला देते हुए कहा है, ‘जिंदा व्यक्ति ही नहीं उसका मृत शरीर भी ‘सम्मान और गरिमा’ का हकदार है।

सरकार जल्द बनाए मास्टर प्लान
भारत में मृत शरीर के अधिकार के लिए अलग से कोई कानून नहीं है। लेकिन, मानवाधिकार आयोग ने उच्चतम न्यायालय में चले ‘परमानंद कटारा बनाम केंद्र सरकार-1989’ और ‘आश्रय अधिकार अभियान बनाम केंद्र सरकार-2002’ के मुकदमों का हवाला देते हुए कहा है, ‘आर्टिकल-21 के तहत न केवल जिंदा रहते हुए बल्कि मरने के बाद भी मृत शरीर ‘सम्मान और गरिमा’ का हकदार है।

मृत शरीर के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार या फिर अपराध न हो इसकी रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। लिहाजा आयोग ने ‘केंद्र और राज्य सरकारों’ को सभी संबंधित संस्थाओं-अस्पतालों, पुलिस, फॉरेंसिक मेडिकल डिपार्टमेंट, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, नगर निगम, सिविल सोसायटियों, से सलाह लेकर शवों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार और उनकी गरिमा से छेड़छाड़ रोकने के लिए एक प्लान बनाकर 4 हफ्तों के अंदर प्रस्तुत करने के लिए कहा है।’

मृत शरीर के भी हैं अधिकार

  • धर्म, क्षेत्र, जाति, जेंडर को आधार बनाकर किसी मृत शरीर के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।
  • मृत शरीर के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ व्यक्ति के मूलभत अधिकारों का हनन है।
  • किसी भी मृत शरीर को समय से और मर्यादित एवं सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार का अधिकार है।
  • मरने के बाद भी मृत शरीर को न्याय का अधिकार है।
  • मृत व्यक्ति की अपमान पूर्ण बायन से, तस्वीर या फिर किसी भी तरह से ‘मानहानी’ नहीं की जा सकती।
  • मरने के बाद भी व्यक्ति की ‘निजता’ का उल्लंघन करना मानवाधिकारों के खिलाफ है।

आयोग ने नागरिक, प्रशासन, अस्पताल और सरकार सबको याद दिलाए उनके ‘दायित्व’

  • किसी भी नागरिक को यदि कोई शव लावारिस अवस्था में दिखे तो पुलिस स्टेशन, एंबुलेंस और स्थानीय प्रशासन को सूचित करना चाहिए
  • पुलिस प्रशासन को पोस्टमार्टम में जहां तक हो सके देरी नहीं करनी चाहिए।
  • बिल में होने वाले भुगतान या फिर लावारिस शव को अस्पताल प्रशासन को किसी सुरक्षित स्थान में रखना चाहिए।
  • मृत शरीर के लिए परिवार वालों की मांग पर स्थानीय प्रशासन को ट्रांसपोर्ट उपलब्ध कराना चाहिए। ध्यान रहे फिजूल किराया न वसूला जाए।
  • संबंधित सरकारी प्रशासन को जरूरत के हिसाब से अंतिम संस्कार के लिए अतिरिक्त प्लेटफार्म बनाने चाहिए। ताकि शव अपने अंतिम संस्कार के इंतजार में बेतरतीब न पड़े रहें।
  • अगर किसी शव के परिवार वाले किसी कारणवश उसका अंतिम संस्कार नहीं करते या शव लावारिस है तो यह स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उसका अंतिम संस्कार, उसकी धार्मिक पहचान और संस्कृति के साथ करे।
  • मृत व्यक्ति का डेटा सरकारी दस्तावेजों, आधार कार्ड, बीमा पॉलिसी में मौत के बाद जल्द से जल्द अपडेट होना चाहिए।

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