Ias Alok Ranjan Opposed The Privatisation Of Public Property. – Budget 2021: यूपी के पूर्व मुख्य सचिव बोले, लाभ में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण ठीक नहीं


पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन
– फोटो : amar ujala

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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने केंद्रीय बजट की खामियां और खूबियां बताईं। उन्होंने कहा कि जो सार्वजनिक उद्योग मुनाफे में हैं, उनका निजीकरण उचित नहीं है। वह प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस के लखनऊ चैप्टर की केंद्रीय बजट पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने अर्थव्यवस्था की विकास दर से सिर्फ काम नहीं चलेगा। गरीबों के कल्याण के लिए सरकार को सीधे दखल देना होगा। बजट में पर्यटन, होटल व रेस्टोरेंट के क्षेत्र पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। हालांकि उन्होंने बजट के सकारात्मक पक्ष को रखते हुए कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य के क्षेत्र के बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। भविष्य में इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे।

गोष्ठी में गिरी इंस्टीट्यूट ऑफ डवलपमेंट स्टडीज के सेवानिवृत्त प्रो. मो. फहीमुद्दीन ने कहा कि बजट में कृषि क्षेत्र के लिए रियायत बेहद कम है। सरकार ने संकटग्रस्त किसानों को सीधे नकद भुगतान देने के बजाय ऋण की पेशकश की है। जबकि ऋ ण का पुनर्भुगतान न कर पाना ही किसानों की आत्महत्या का मुख्य कारण है।

इसी इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक डॉ. एके सिंह ने कहा कि निजीकरण को लेकर अधिक विश्वास नहीं हो रहा है। वहीं, यूपी सीआईएमएसएमई के सह अध्यक्ष गौरव प्रकाश ने कहा कि छोटे खुदरा व्यापारी और एमएसएमई क्षेत्र जो रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं, उनके लिए इस बजट में कुछ खास नहीं है।

इंटक के वाइस चेयरमैन अशोक सिंह ने कहा कि यह बजट कुछ पूंजीपतियों को राष्ट्रीय संपदा के हस्तांतरण के सिवाय कुछ और नहीं है। जेएनपीजी कॉलेज में अर्थशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हिलाल अहमद नकवी ने राजकोषीय घाटे के बारे में बात की।

गोष्ठी में ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस यूपी के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. अनीस अंसारी, लखनऊ-2 चैप्टर की अध्यक्ष आर्किटेक्ट प्रज्ञा सिंह और कांग्रेस विधान परिषद दल के नेता दीपक सिंह भी मौजूद थे।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने केंद्रीय बजट की खामियां और खूबियां बताईं। उन्होंने कहा कि जो सार्वजनिक उद्योग मुनाफे में हैं, उनका निजीकरण उचित नहीं है। वह प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस के लखनऊ चैप्टर की केंद्रीय बजट पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने अर्थव्यवस्था की विकास दर से सिर्फ काम नहीं चलेगा। गरीबों के कल्याण के लिए सरकार को सीधे दखल देना होगा। बजट में पर्यटन, होटल व रेस्टोरेंट के क्षेत्र पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। हालांकि उन्होंने बजट के सकारात्मक पक्ष को रखते हुए कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य के क्षेत्र के बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। भविष्य में इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे।

गोष्ठी में गिरी इंस्टीट्यूट ऑफ डवलपमेंट स्टडीज के सेवानिवृत्त प्रो. मो. फहीमुद्दीन ने कहा कि बजट में कृषि क्षेत्र के लिए रियायत बेहद कम है। सरकार ने संकटग्रस्त किसानों को सीधे नकद भुगतान देने के बजाय ऋण की पेशकश की है। जबकि ऋ ण का पुनर्भुगतान न कर पाना ही किसानों की आत्महत्या का मुख्य कारण है।

इसी इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक डॉ. एके सिंह ने कहा कि निजीकरण को लेकर अधिक विश्वास नहीं हो रहा है। वहीं, यूपी सीआईएमएसएमई के सह अध्यक्ष गौरव प्रकाश ने कहा कि छोटे खुदरा व्यापारी और एमएसएमई क्षेत्र जो रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं, उनके लिए इस बजट में कुछ खास नहीं है।


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राष्ट्रीय संपदा के हस्तांतरण के सिवाय कुछ और नहीं



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