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In Nashik, the Corona people, despite being positive, continued to roam in public places; The responsible could neither monitor nor contact trekking | लोग पॉजिटिव होते हुए भी सार्वजनिक जगहों पर घूमते रहे; जिम्मेदार न तो निगरानी कर पाए और न ही कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग


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नासिकएक घंटा पहलेलेखक: विनोद यादव और मनीषा भल्ला

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महाराष्ट्र में कोरोना की दूसरी लहर ने सभी को परेशानी में डाल दिया है। वजह ये है कि टॉप संक्रमित देशों अमेरिका और ब्राजील से भी ज्यादा केस महाराष्ट्र में मिल रहे हैं। राज्य में रोजाना 60 हजार से ज्यादा मामले आ रहे हैं। महाराष्ट्र में संक्रमण की असल तस्वीर आप तक पहुंचाने के लिए भास्कर राज्य के उन 5 शहरों की ग्राउंड रिपोर्ट आप के सामने ला रहा है, जहां सबसे ज्यादा मामले हैं। इस सीरीज की पहली किस्त में हमने पुणे की रिपोर्ट दी थी। आज जानिए नासिक का हाल…

ऑक्सीजन की कमी
नासिक में गंभीर रूप से बीमार एक कोरोना मरीज बाबासाहेब कोले को जब बेड नहीं मिला तो वह ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर खुद ही नासिक नगर निगम के दफ्तर पहुंच गए। मामले की जानकारी जैसे ही निगम के अधिकारियों को हुई तो आनन-फानन में एम्बुलेंस बुलाकर मरीज को बिटको हॉस्पिटल के कोविड वार्ड में एडमिट करवाया गया। उन्होंने दो दिन इलाज के बाद दम तोड़ दिया।

भीड़ कम करने के लिए अजीब नियम, 5 रु. का टिकट खरीदो
नासिक प्रशासन ने संक्रमण रोकने के लिए एक अजीब तरीका निकाला है। प्रशासन ने फैसला किया कि लोगों को मार्केट जाने के लिए 5 रुपए का टिकट लेना होगा। इसके बाद वे महज एक घंटे के लिए मार्केट जा सकेंगे। नियम तोड़ने पर 500 रुपए का जुर्माना देना होगा। यह फीस नासिक म्‍युनिसिपल कॉर्पोरेशन को जाएगी, इसका इस्तेमाल कोरोना कंट्रोल में किया जाएगा।

अनलॉक के बाद लापरवाह हुए लोग, केस बढ़ने की वजह यही
नासिक के ऐतिहासिक पंचवटी इलाके के कपालेश्वर मंदिर इलाके में रहने वाले देवांग जानी मेडिकल फील्ड से वर्षो तक जुड़े रहे। वे कहते हैं कि पिछले साल अप्रैल तक कोरोना का एक मरीज था। सितंबर-अक्टूबर में केस बढ़े, पर मरीज को आसानी से बेड मिल जाते थे। वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की भी कमी नहीं थी। अनलॉक हुआ तो लोग लापरवाह हो गए। सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के नियम का पालन छोड़ दिया।

प्रशासन लापरवाह रहा, केस बढ़े तब जागा
इस बार त्योहारों पर प्रशासन भी लापरवाह दिखा। होली में रंगपंचमी पर एक पॉजिटिव व्यक्ति भीड़ में शामिल था। एक मंदिर में संक्रमित आरती कर रहा था। एक व्यक्ति पॉजिटिव होने के बावजूद पत्नी के साथ मार्केट में खरीदारी करने गया। इन 3 उदाहरणों से साफ है कि इस बार कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग गायब थी। केस बढ़े तो प्रशासन जागा।

अब चेतावनी के बोर्ड लगाए जा रहे हैं। ज्यादा मरीजों वाले इलाके को कंटेनमेंट जोन बनाया जा रहा है और दूसरे ऐहतियात भी बरते जा रहे हैं।

रेमडेसिविर की कालाबाजारी, ड्रग्स इंस्पेक्टरों की मनमानी शुरू
देवांग बताते हैं कि दूसरी लहर में अगर कोई संक्रमित हो रहा है तो उसका परिवार भी पॉजिटिव पाया जा रहा है। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में बेड वेटिंग में चल रहे हैं। मरीज चेयर पर बैठे रहते हैं। वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की भी कमी है। डॉक्टर रेमडेसिविर इंजेक्शन लगवाने को कह रहे हैं और इस इंजेक्शन की कालाबाजारी शुरू हो गई है।

ड्रग्स इंस्पेक्टर (DI) की मनमानी व धमकी की भी कुछ घटनाएं घटी हैं। एक मेडिकल स्टोर मालिक ने किसी तरह रेमडेसिविर इंजेक्शन का कुछ स्टॉक हासिल किया, तो सुबह 5 बजे से ही उसके मेडिकल स्टोर के बाहर 122 लोगों की लाइन लग गई। ड्रग्स इंस्पेक्टर ने दुकानदार को कॉल कर रेमडेसिविर को आम लोगों को देने से मना किया और अपनी पसंद के कोविड सेंटर्स में इंजेक्शन भेजने को कहा।

नासिक के 92% अस्पतालों में कोरोना के मरीजों का इलाज चल रहा है। यहां की बड़ी केमिस्ट शॉप के मालिक मुबिन बताते हैं कि अस्पतालों में बेड न मिल पाने की वजह से बीमारी बहुत बढ़ चुकी है। इनकी दुकान पर जो लोग दवाएं लेने आ रहे हैं, उनमें से हर दूसरा आदमी पॉजिटिव है।

यहां के सरकारी जाकिर हुसैन अस्पताल के हालात ऐसे हैं कि लोग कुर्सी पर बैठे ऑक्सीजन ले रहे हैं। मुबिन बताते हैं कि रेमडेसिविर तो देखने को नहीं मिल रहा है। कोरोना होने पर लोगों में क्लॉटिंग हो रही है। इससे भी कई मौतें हो रही हैं।

ऑक्सीजन और वेंटिलेटर के लिए 1 लाख से 3 लाख रुपए तक डिपॉजिट
नासिक में कोविड से हर दिन 25 से 35 मौतें हो रही हैं। लगभग 4,000 नए मरीज आ रहे हैं। निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर बेड्स के लिए 1 लाख से 3 लाख रुपए तक डिपॉजिट का खेल चल रहा है। कोचिंग सेंटर चलाने वाले मिर्जा का कहना है कि उनके एक रिश्तेदार को अस्पताल ने ऑक्सीमीटर तक खुद का लाने के लिए कहा।

यहां के शालीमार बाजार में एंट्री के वक्त प्रशासन ने 5 रुपए चार्ज रखा है और एक घंटे से ज्यादा समय वहां बिताने पर 1000 रुपए जुर्माना है। यह पता लगाने का कोई तरीका ही नहीं है कि कौन आदमी बाज़ार में एक घंटे से ज्यादा का वक्त बिता रहा है। यानी लॉकडाउन के नियम सिर्फ कागजों पर हैं।

कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग का दावा, पर असलियत कुछ और
नासिक के कलेक्टर सूरज मांढरे ने बताया कि राज्य में कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की भारी डिमांड है और सप्लाई कम। हालांकि मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग हो रही है। मांढरे कहते हैं कि एक पॉजिटिव के संपर्क में आए 10 से ज्यादा लोगों की कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग की जा रही है। देवांग जानी ने कहा कि ऐसे दावों में कोई सच्चाई नहीं है।

लोग शहर से संक्रमण लेकर गांव लौटे
नासिक के गांव जाए के रहने वाली रोहिणी का कहना है कि गांव में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं जो पिछली दफा नहीं थे। इसकी एक वजह यह है कि गांव के लोग शहर जाते हैं, जहां से बीमारी गांव में लेकर आ रहे हैं। गांव के लोग भी कोरोना से बेपरवाह हैं। इसी गांव के अतुल के घर में कोरोना के तीन मरीज हैं। वह बताते हैं कि बीते साल सब ठीक था। गांव के लोगों ने मास्क तक नहीं पहना था लेकिन इस साल कोरोना का गांवों में भी कहर है।
खेतों में काम कर रहे बीका जी का कहना है कि इस साल पहली दफा हुआ है कि उनका पूरा परिवार खेतों में से प्याज निकाल रहा है। हर साल वह इस सीजन में प्याज से होने वाली कमाई के पैसे गिना करते थे, लेकिन इस साल लेबर न होने की वजह से पूरा परिवार खुद ही खेतों में काम पर लगा है। बीका जी और उनके बेटे सुशांत का कहना है कि गांवों में कोरोना के हालात यह हैं कि इस साल काम करने के लिए मजदूर ही नहीं आए। वह इतना डर गए हैं कि वापस लौट गए।​​​​​​​

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