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In Niti village of Chamoli, Dronagiri mountain is worshiped, hanuman jayanti special | चामोली के नीति गांव में हनुमानजी की नहीं, द्रोणगिरी पर्वत की पूजा की जाती है


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2 घंटे पहले

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  • रामायण काल से जुड़ी है द्रोणगिरी पर्वत की कथा, जोशीमठ से करीब 50 किमी दूर है ये जगह

आज हनुमान जयंती है। देशभर में इस दिन हनुमानजी की विशेष पूजा की जाएगी। इस अवसर जानिए एक ऐसे गांव के बारे में जहां, हनुमानजी की नहीं, बल्कि एक पर्वत की पूजा की जाती है। उत्तराखंड के चामोली जिले में जोशीमठ से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित नीति गांव के लोग हनुमानजी की पूजा नहीं करते हैं, ये लोग द्रोणगिरी पर्वत की पूजा करते हैं।

द्रोणगिरी पर्वत का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। रामायण में राम-रावण का युद्ध चल रहा था। युद्ध में एक दिन मेघनाद और लक्ष्मण का आमना-सामना हुआ। उस समय मेघनाद के एक दिव्यास्त्र से लक्ष्मण मुर्छित हो गए थे। तब हनुमानजी द्रोणगिरी पर्वत संजीवनी बूटी लेने के लिए आए थे।

यहां के लोग इस पर्वत को देवता मानते हैं। हनुमानजी इस पर्वत का एक हिस्सा ले गए थे, इस कारण गांव के लोग हनुमानजी की पूजा नहीं करते हैं। हनुमानजी संजीवनी बूटी को पहचान नहीं पा रहे थे। तब उन्होंने द्रोणगिरी पर्वत का एक हिस्सा उखाड़ लिया और इस हिस्से को लंका ले गए थे।

द्रोणगिरी पर्वत बद्रीनाथ धाम से करीब 45 किमी दूर स्थित है। बद्रीनाथ धाम के धर्माधिकारी भुवनचंद्र उनियाल बताते हैं कि आज भी द्रोणगिरी पर्वत का ऊपरी हिस्सा कटा हुआ लगता है। इस कटे हिस्से को हम आसानी से देख सकते हैं।

ट्रैकिंग करने वाले लोगों की पसंदीदा जगह है ये पर्वत

द्रोणगिरी पर्वत की ऊंचाई 7,066 मीटर है। यहां शीतकाल में भारी बर्फबारी होती है। इस वजह गांव के लोग यहां से दूसरी जगह रहने के लिए चले जाते हैं। गर्मी के समय जब यहां का मौसम रहने योग्य होता है तो गांव के लोग वापस यहां रहने के लिए आ जाते हैं। चमोली जिले में जोशीमठ से मलारी की तरफ लगभग 50 किलोमीटर आगे बढ़ने पर जुम्मा नाम की एक जगह आती है। यहीं से द्रोणगिरी गांव के लिए पैदल मार्ग शुरू हो जाता है। यहां धौली गंगा नदी पर बने पुल के दूसरी तरफ सीधे खड़े पहाड़ों की जो श्रृंखला दिखाई देती है, उसे पार करने के बाद द्रोणगिरी पर्वत पहुंच सकते हैं। संकरी पहाड़ी पगडंडियों वाला तकरीबन दस किलोमीटर का यह पैदल रास्ता बहुत कठिन है। ट्रैकिंग पसंद करने वाले काफी लोग यहां पहुंचते हैं।

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