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In Singapore, Chinese people make racist comments on Indians, taxi people are disrespectful | सिंगापुर में चीनी लोग भारतीयों पर कर रहे नस्लीय टिप्पणी, टैक्सी वाले ना-नुकुर करते हैं


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11 मिनट पहलेलेखक: सिंगापुर से भास्कर के लिए वीके संतोष कुमार

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डबल म्यूटेंट मिलने के बाद नस्लीय हमले बढ़े - Dainik Bhaskar

डबल म्यूटेंट मिलने के बाद नस्लीय हमले बढ़े

सिंगापुर में रह रहे भारतीय इन दिनों नस्लीय टिप्पणी और हिंसा की घटनाओं का शिकार बन रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भारतीयों पर भद्दी टिप्पणियां की जा रही हैं। इनमें से ज्यादातर चीनी मूल के लोग हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि ये हमले उन रिपोर्ट्स के बाद बढ़े हैं, जिनमें कहा गया है कि कोविड-19 के इंडियन वैरिएंट की वजह से सिंगापुर में संक्रमण बढ़ा है।

प्राइवेट ट्यूटर नीता रोज की तरह सुबह 8:30 बजे स्टेडियम जा रही थीं। तभी एक चीनी व्यक्ति ने मास्क नाक से नीचे खिसकने पर उन्हें नस्लीय गाली दी। 55 वर्षीय नीता कहती हैं कि वे तेजी से चल रही थी, सांस लेने में दिक्कत होने पर उन्होंने मास्क नीचे किया था। तभी एक चीनीन पीछे से आकर चिल्लाते हुए मेरी तरफ झपटा। मैंने कहा, मैं व्यायाम कर रही थी, इसलिए मास्क नीचे किया और यह नियम है। इसके बावजूद वह भद्दी गालियां देता रहा। मैंने उससे दूर जाने का फैसला किया तो उसने मुझे तेजी से किक मारी। इससे मैं गिर पड़ी और दोनों हाथों में चोट आई।

नीता ने पति और दोनों बच्चों को घटना की जानकारी दी और पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। 11 मई को, पुलिस ने एक 30 वर्षीय चीनी व्यक्ति को सार्वजनिक उपद्रव और नस्लीय टिप्पणियों के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। ऐसी ही एक घटना इसी महीने की शुरुआत में पूर्वी सिंगापुर के पासिर रिस में हुई थी, जहां एक व्यक्ति भारतीय परिवार पर भद्दी टिप्पणियां कर रहा था। यह घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो से पता चलता है कि इस शख्स ने चार लोगों के भारतीय परिवार के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की और उन्हें ‘वापस जाने’ के लिए कहा। कहा कि वे ‘यहां वायरस फैला रहे हैं।’

यह शख्स परिवार के मुखिया से यह भी पूछता है कि क्या उसने सिंगापुर के सभी पुरुषों के लिए अनिवार्य 2 वर्ष की सैन्य सेवा पूरी की है। सिंगापुर की आबादी 57 लाख है। इनमें 40.04 स्थायी निवासी हैं। जून 2020 तक, 74.3% निवासी चीनी आबादी है। इसके बाद 13.5% मलय और 9% भारतीय मूल के लोग हैं।

ट्रेन में भी दुर्व्यवहार, लोग पास बैठने में बचते हैं

पिछले दो हफ्तों में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिनमें भारतीय नागरिकों ने यह शिकायत की है कि टैक्सी चालक उन्हें बैठा नहीं रहे हैं। जब वे एमआरटी ट्रेन में बैठते हैं तो कुछ लोग उठ जाते हैं और अजीब सा संकेत करते हैं। नस्लीय टिप्पणी करते हुए उनसे दूर चले जाते हैं। कुछ बस स्टॉप्स पर ‘इंडियन गो बैक होम’ कॉल आए। मैकेनिकल इंजीनियर आलोक (बदला हुआ नाम) कहते हैं कि उनके कई दोस्तों ने हाल के दिनों में नस्लीय टिप्पणी का सामना किया है।

यहां नस्लीय भेदभाव दुर्लभ, पीएम भी चिंतित

नस्लवाद सिंगापुर में दुर्लभ है। 1960 के दशक में सख्त कानून बने थे। तब से ऐसी घटनाएं नगण्य थी। गृह मंत्री के. षणमुगम ने संसद में कहा कि एक छोटा वर्ग प्रवासी भारतीयों के खिलाफ नस्लवाद बो रहा है। प्रधानमंत्री ली ने कहा कि ‘वह निराश व चिंतित हैं कि यह नस्लवादी हमला सिंगापुर में हो सकता है।’

भारत से आने वालों को अब 21 दिन क्वारेंटाइन

16 मई को देश में नए मामलों की संख्या 103 पहुंच गई, जो एक हफ्ते पहले 43 थी। इसके लिए भारत में मिले डबल म्यूटेंट वैरिएंट को जिम्मेदार माना जा रहा है। सख्ती के तहत भारत सहित अधिक जोखिम वाले देशों से आने वालों को अब 14 के बजाय 21 दिन क्वारेंटाइन रहना होगा। प्रतिबंध 13 जून तक प्रभावी रहेंगे।

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