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जानिये कैसे दहल उठा आतंकी पाकिस्तान !

Gurgaon

पाकिस्तान के कराची स्टॉक एक्सचेंज पर जबरदस्त हमले को लेकर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को जिम्मेदार ठहराया गया है. पाकिस्तानी मीडिया ने साफतौर पर इस हमले के लिए इसी संगठन का नाम लिया है. हालांकि हमला करने वाले चारों आतंकियों को पाकिस्तानी सेना ने मार गिराया है लेकिन इसमें चारों आतंकियों को मिलाकर करीब 10 लोगों के मारे जाने की खबर है. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) का चरमपंथी संगठन के तौर पर पिछले सालों में कई बार चर्चा में आता रहा है. ये अमेरिका के चरमपंथी संगठनों की सूची में भी शामिल है.

कितने साल पुराना संगठन
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी 1970 के दशक की शुरुआत में पहली बार हरकत में आय़ा था. तब पाकिस्तान में जुल्फिकार अली भुट्टो प्रधानमंत्री थे. तब बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तानी हुकूमत के ख़िलाफ़ सशस्त्र बग़ावत शुरू की थी.

जिया उल हक के कार्यकाल में गतिविधियां बंद हो गईंफिर सैन्य तानाशाह ज़ियाउल हक़ की सत्ता पर क़ब्ज़े के बाद बलूचिस्तान को आजाद करने का बीड़ा उठाने वाले नेताओं से पाकिस्तान हुक्मरानों की बात हुई. नतीजतन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने अपनी गतिविधियां बंद कर दीं.
मुशर्रफ के समय हमले फिर शुरू हुए
पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के शासन में बलूचिस्तान हाई कोर्ट के जज जस्टिस नवाज मिरी के क़त्ल के आरोप में क़ौम परस्त लीडर नवाब खैर बख़्श मिरी की गिरफ़्तारी हुई. इसके बाद वर्ष 2000 से बलूचिस्तान के विभिन्न इलाक़ों में सरकारी प्रतिष्ठानों और सुरक्षा बलों पर हमलों का सिलसिला शुरू हो गया. ये हमले बढ़ते औऱ फैलते चले गए.

तब चरमपंथी सूची में शामिल किया गया
ज्यादातर इन हमलों की ज़िम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी लेती रही. साल 2006 में पाकिस्तान सरकार ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को चरमपंथी संगठनों की सूची में शामिल कर लिया. नवाबज़ादा बालाच मिरी को इसका मुखिया क़रार दिया गया. नवम्बर 2007 में बालाच मिरी की मौत की ख़बर आई. तब बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने कहा कि बालाच अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के पास सुरक्षा बलों के साथ झड़प में मारा गया.

कौन है मुखिया
बालाच के ब्रिटेन में रहने वाले उसके भाई नवाबज़ादा हीरबयार मिरी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के मुखिया बनाये गये. हालांकि नवाबज़ादा उन दावों को खारिज करते रहे हैं. अब माना जा रहा है कि असलम बलोच इस संगठन की अगुवाई कर रहा है. ये संगठन आत्मघाती हमले करता रहा है. हालांकि अब ये माना जा रहा है कि इस आर्मी का मुखिया बशीर जेब कर रहा है.

चीन के साथ प्रोजेक्ट्स का विरोध करती है
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी चीन-पाकिस्तान आर्थिक ट्रांजिट परियोजना का विरोध करती रही है. उसने पाकिस्तान में चीनी टारगेट्स को निशाना बनाया है. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने नवम्बर 2018 में कराची में चीनी वाणिज्य दूतावास पर चरमपंथी हमले की ज़िम्मेदारी क़बूल की. ये हमला तीन आत्मघाती हमलावरों ने किया था. पिछले साल मई ग्वादर में प्रिरिल कॉन्टिनेंटल होटल पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के मजीद ब्रिगेड के सदस्यों ने ऐसा ही हमला किया.

बलूचिस्तान की आजादी के लिए लंबे समय से संघर्ष
बलूचिस्तान पाकिस्तान का एक प्रांत है लेकिन 1947 के बाद से ही यहां पर आजादी का संघर्ष जारी है. जब भारत का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान बना तो यहां के वाशिंदों ने अलग देश की मांग की. तब ये ये संघर्श जारी है. ये आमतौर पर बलूच राष्ट्रवादियों और पाकिस्तान की सरकार के बीच चल रहा है.

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