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Karka Sankranti 2021 Surya Ka Rashi Parivartan (Planetary Positions) 2021 | Sun Transit In Cancer Impact On Zodiac Signs | Karka Sankranti History, Significance its Importance | 16 जुलाई से शुरू होगा दक्षिणायन; इस दिन शुभ कामों के लिए सूर्योदय से शाम 5 बजे तक रहेगा पुण्यकाल


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20 घंटे पहले

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  • वेदों में दक्षिणायन को कहा गया है पितृयान क्योंकि इस दौरान किए गए श्राद्ध और दान से संतुष्ट होते हैं पितर

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक 15 या 16 जुलाई को सूर्य कर्क राशि में आ जाता है। जिसे कर्क संक्रांति कहते हैं। इस दिन को धर्म ग्रंथों में पर्व कहा गया है। इस संक्रांति पर्व का पुण्यकाल सूर्योदय से शुरू होकर शाम तकरीबन 5 बजे तक रहेगा। इस शुभ समय में किए गए तीर्थ स्नान, दान और पूजा-पाठ से कभी न खत्म होने वाला पुण्य मिलता है। इस दिन किए गए श्राद्ध से पितर संतुष्ट हो जाते हैं। इसी दिन से सूर्य दक्षिणायन भी हो जाएगा। ज्योतिष ग्रंथों में बताया गया है कि आषाढ़ महीने के आखिरी दिनों से पौष मास तक सूर्य का उत्तरी छोर से दक्षिणी छोर तक जाना दक्षिणायन होता है।

वेदों में दक्षिणायन यानी पितृयान
वैदिक काल से ही उत्तरायण को देवयान और दक्षिणायन को पितृयान कहा जाता रहा है। यजुर्वेद के अलावा गरुड़, पद्म, स्कंद और विष्णुधर्मोत्तर पुराण के साथ ही महाभारत में सूर्य के दक्षिणायन को पितृयान कहा गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि सूर्य के दक्षिणायन रहते हुए किया गया श्राद्ध पितरों को पूरी तरह संतुष्ट करता है। दक्षिणायन के इन 6 महीनों में तीर्थ स्नान और दान से पितर प्रसन्न होते हैं। इसलिए जिस दिन सूर्य कर्क राशि में आता है उस दिन दक्षिणायन संक्रांति पर्व पर पितरों के लिए श्राद्ध करने की परंपरा है।

कर्क संक्रांति पूजन
कर्क संक्रांति पर सूर्योदय के समय पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। फिर स्वस्थ रहने की कामना से सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। इसके साथ ही भगवान शिव और विष्णु की पूजा का खास महत्व होता है। विष्णु सहस्त्रनाम का जाप किया जाता है। पूजा के बाद श्रद्धाअनुसार दान का संकल्प लिया जाता है। फिर जरुरतमंद लोगों को जल, अन्न, कपड़ें और अन्य चीजों का दान किया जाता है। इसके साथ ही गाय को घास खिलाने का भी महत्व है।

आषाढ़ी संक्रांति में विष्णु पूजा का महत्व
आषाढ़ महीने में सूर्य संक्रांति होने से इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा करने से पुण्य बढ़ता है। इस दिन ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र बोलते हुए भगवान शालग्राम या विष्णुजी का अभिषेक करना चाहिए। इसके बाद तुलसी पत्र, फल और अन्य सामग्री सहित भगवान की पूजा करनी चाहिए। इस दिन ब्राह्मण भोजन या जरूरमंद लोगों को खाना खिलाने से जाने-अनजाने में हुए कई तरह के पाप खत्म हो जाते हैं।

दक्षिणायन के 4 महीनों में नहीं किए जाते शुभ काम
हिंदू कैलेंडर के श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष और पौष ये 6 महीने दक्षिणायन में आते हैं। इनमें से शुरुआती 4 महीने किसी भी तरह के शुभ और नए काम नहीं करना चाहिए। इस दौरान देव शयन होने के कारण दान, पूजन और पुण्य कर्म ही किए जाने चाहिए। इस समय में भगवान विष्णु के पूजन का खास महत्व होता है और यह पूजन देवउठनी एकादशी तक चलता रहता है क्योंकि विष्णु देव इन 4 महीनों के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में शयन करते हैं। इसके अलावा उत्तर भारत में अश्विन कृष्णपक्ष में पितृ पूजा करने का महत्व होता है।

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