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Maharishi Ved Vyas’s date of birth Guru Purnima If there is no Guru today, then only Lord Vishnu can be worshiped as Guru. | महर्षि वेदव्यास की जन्म तिथि गुरु पूर्णिमा आज कोई गुरु न हो तो भगवान विष्णु को ही गुरु मान कर सकते हैं पूजा


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5 घंटे पहले

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  • कबीर ने कहा है कि बार-बार गुरु दीक्षा लेनी चाहिए इसके जरीये खुद को फिर ऊर्जा से भर लेना चाहिए

आज गुरु पूर्णिमा पर्व है। हिंदू परंपराओं में यह दिन आध्यात्मिक गुरुओं की पूजा और सम्मान का विशेष दिन होता है। यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्म भी हुआ था। इसलिए इसे गुरु पूर्णिमा कहते हैं। उन्होंने चारों वेदों की भी रचना की थी। इस कारण उन्हें वेदव्यास भी कहते हैं। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है और उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है।

कहा गया है कि गुरु से दीक्षा लिए बिना जप, पूजा वगैरह सब निष्फल जाता है। इसलिए गुरु दीक्षा के तहत गुरु अपने शिष्य को एक मंत्र और जीवन उपयोगी वाक्य देते हैं। जब आप उलझनों में फंसे हों, कोई फैसला न ले पा रहे हों तो गुरु ऐसे मुश्किल वक्त का सामना करने के लिए रास्ता दिखाते हैं।

कब-कब लें गुरु दीक्षा
भगवान दत्तात्रेय का वचन था कि एक बार गुरू दीक्षा लेने से काम नहीं चलेगा, बार-बार गुरु दीक्षा लेनी पड़ेगी। कबीर ने भी ये ही कहते हुए समझया था कि बर्तन साफ करते रहें। बार-बार बर्तन गंदा होगा और बार-बार उसे साफ करना पड़ेगा, जितनी बार साफ करेंगे उतना ही चमकेगा। यानी जब इंसान पर लोभ, लालच, स्वार्थ, मोह, अहंकार और क्रोध हावी होकर नुकसान करने लगते हैं, तब गुरु दीक्षा के जरीये खुद को फिर ऊर्जा से भर लेना चाहिए। इसलिए जब भी मौका मिले, तब गुरु दीक्षा लेनी चाहिए। चाहे पहले भी गुरु दीक्षा ली हुई हो फिर जितनी भी बार गुरु से कुछ मिले उसे ग्रहण करते रहें।

क्या करें इस दिन
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्यास जी के चित्र को फूल या माला चढ़ाकर अपने गुरु के पास जाना चाहिए। अपने गुरु को आसन पर बैठाकर पुष्पमाला पहनानी चाहिए। फिर अपने गुरु के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें। यदि आपके गुरु आपके पास नहीं है, उनसे भेंट संभव नहीं है, तो उनकी तस्वीर के सामने सिर झुकाकर उनकी पूजा करें।

पहले ली गई गुरु दीक्षा के समय उन्होंने आपके कान में जो गुप्त, गुरु मंत्र बताया है, उसे नियमित 5 या 11 बार जप करें ही साथ ही आज के दिन उस मंत्र का जाप विशेष तौर पर करें। यदि आपके गुरु ने किसी विशेष पृष्ठ पर आपको आपका गुप्त गुरु मंत्र दिया था उसे संभालकर रखें और आज के दिन उसको पूजा में रखकर उसकी पुष्प और अक्षत कुमकुम से पूजा कर गुरु का स्मरण करें और मंत्र का जाप करें।

गुरु मंत्र
गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरु साक्षात् परब्रह्म, तस्मैः श्री गुरवे नमः।।

भगवान विष्णु को बना सकते हैं गुरु
पुरी के ज्योतिषाचार्य और धर्म ग्रंथों के जानकार डॉ. गणेश मिश्र का कहना है कि आपने अभी तक किसी को आध्यात्मिक गुरु नहीं बनाया है, मतलब किसी से गुरु दीक्षा, मंत्र नहीं लिया तो भगवान विष्णु को गुरु मानकर प्रणाम करें। पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की भी पूजा अर्चना की जाती है। गुरु पूर्णिमा के दिन बहुत से लोग गुरु बनाते हैं गुरु दीक्षा लेते हैं। अत: आप भी इस दिन अपनी इच्छानुसार किसी विद्वान गुरु से गुरु दीक्षा ले सकते हैं, जो आपके जीवन में किसी भी अवसर पर आपका मार्गदर्शन करेंगे।

गुरु मंत्र दीक्षा का महत्व
वैसे तो गुरु दीक्षा का मतलब गुरु के आश्रम में उनके पास रहकर ज्ञान लेना है, जैसे गुरुकुल में रहकर शिष्य शिक्षा-दीक्षा लिया करते थे। खुद भगवान राम और कृष्ण भी इसी रास्ते पर चले। लेकिन सांसारिक लोगों के लिए अब गुरु मंत्र से दीक्षा लेने की जरूरत का शास्त्रों में भी जिक्र नहीं है। आध्यात्मिक गुरु को ही परब्रह्म कहा गया है। बिना गुरु के ज्ञान असंभव है। कहा गया है कि बिना गुरु ज्ञान के जीवन का सही रास्ता मिल ही नहीं पाता।

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