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मनुष्य की अपेक्षाएं ही उसकी निराशा का कारण बनती हैं

यहां आपको यह देखने की जरूरत है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न कैसे हुई, क्योंकि यह हालात एक दिन का परिणाम तो नहीं हो सकते। आपको इस अलगाव की तह तक पहुंचने की जरूरत है। अगर परिवार में कोई किसी से नफरत करता है तो उसके पीछे क्रोध या अहंकार शामिल होता है।
ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती… मुमकिन है इसके पीछे आपके कुछ शब्द या आपका व्यवहार जिम्मेदार हो। हो सकता है आपने अतीत में अनजाने में ही सही अपने परिवार को दुख या कष्ट पहुंचाया हो। क्योंकि क्रोध में आकर हम यह भूल जाते हैं कि हम किस आवाज या टोन में सामने वाले से बात कर रहे हैं।  लेकिन जिसने हमारे उस क्रोध को झेला है वह कभी उस घटना को नहीं भूलता।
मुंह से निकले शब्दों को कभी भुलाया नहीं जा सकता, ऐसे में हो सकता है आपकी पत्नी और बच्चे आपको उसी व्यवहार की वजह से माफ ना कर पा रहे हों।  जो लोग आपकी खुशी की वजह बनते हैं कभी-कभार वही आपके क्रोध का कारण भी बन जाते हैं। हम जिनके साथ संबंधों में होते हैं हम उनसे कुछ ज्यादा ही  उम्मीदे लगा लेते हैं। हम समझ, प्रेम, समर्थन, खुशी… उनसे हर तरह की अपेक्षा करने लगते हैं।
अपेक्षाओं के इसी अंबार की वजह से निराशा के साये में चले जाते हैं।
आपको अपने आपसे पूछना चाहिए कि आप कैसे इसकी क्षतिपूर्ति कर सकते हैं। आपको अपने परिवार, अपनी पत्नी और बच्चों से बात करनी चाहिए, उन्हें समझाने का प्रयत्न करना चाहिए। उनसे पूछिए कि उन्हें क्या चाहिए, उनकी परेशानी क्या है। जिस प्रेम और सम्मान की आपको जरूरत है, पहले उसे देना सीखिए।

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