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Many Works Pending Of Last Financial Year – पीएम-सीएम आवास पर पूरा खर्च, अन्य योजनाओं का काम सुस्त, पिछले बजट में राशि मिलने के बाद भी अटका पंचायत भवन का काम


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वित्तीय वर्ष 2020-21 में विभिन्न कार्यों के लिए स्वीकृत बजट राशि मिलने व खर्च करने पर कोरोना का साया रहा। पंचायत भवन निर्माण योजना, गौवंश आश्रय केंद्र व घरों में शौचालय निर्माण के लिए स्वीकृत बजट राशि मिलने के बाद भी इससे जुड़े कार्यों की रफ्तार सुस्त रही। हालांकि जिले के ग्रामीण इलाकों में संचालित सीएम आवास योजना, पीएम आवास योजना (ग्रामीण), सामुदायिक शौचालय निर्माण योजना का शत प्रतिशत बजट खर्च हुआ है।
89 में से सिर्फ 23 गांवों में बने पंचायत भवन
31 मार्च को खत्म हो रहे वर्तमान वित्तीय वर्ष में जिले के 89 गांवों को पंचायत भवन बनाने के लिए वित्तीय सहमति मिली थी। इसके तहत चिह्नित गांवों में प्रत्येक पंचायत भवन के निर्माण पर खर्च होने वाली 15 से 20 लाख की राशि कार्य प्रगति के आधार पर निर्गत होनी थी। विभागीय अधिकारी बताते हैं कि बीते साल मार्च के बाद शुरू हुए कोरोना काल के कारण सितंबर तक इस योजना की मद में स्वीकृत कोई राशि नहीं मिली। अक्तूबर में पैसे मिलने के बाद अब तक 23 गांवों में ही पंचायत भवन का निर्माण पूरा हो पाया है। जबकि 32 गांवों में छत बनाने तक का काम हुआ है। 34 गांवों में बजट स्वीकृति के बाद भी पंचायत भवन का निर्माण अभी तक शुरू भी नहीं हो पाया। मुख्य विकास अधिकारी प्रभाष कुमार भी मानते हैं कि निर्माण कार्य काफी धीमा रहा। अब इसकी नियमित निगरानी करा अधूरे पड़े 32 गांवों के पंचायत भवन के निर्माण को 31 मार्च तक पूरा कराने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
दोनों आवासीय योजनाओं का रिकॉर्ड बेहतर
ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक तौर से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए संचालित सीएम आवास योजना व पीएम आवास योजना (ग्रामीण) में स्वीकृत बजट राशि का शत प्रतिशत खर्च लाभार्थियों तक पहुंचा। कोरोना के कारण नवंबर में निर्गत हुई इस मद की राशि में सीएम आवास योजना में बनने वाले 82 भवनों के चयनित लाभार्थियों को प्रति आवास 1.20 लाख की राशि मिलनी थी। इसमें से सभी लाभार्थियों को अभी तक 40 हजार की पहली और 70 हजार की दूसरी किस्त उपलब्ध करा दी गई है। 10 हजार की बची तीसरी किस्त भी 31 मार्च से पहले हर लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर हो जाएगी। इसी तरह पीएम आवास योजना (ग्रामीण) में आठ ब्लॉकों में 4826 लाभार्थियों को प्रति आवास मिलने वाली 1.20 लाख की राशि में से 40 हजार की पहली किस्त सभी के खाते में जबकि 70 हजार की दूसरी किस्त 300 लाभार्थियों के खाते में जमा हो चुकी है। इस योजना में भी 31 मार्च तक स्वीकृत शत प्रतिशत बजट राशि लाभार्थियों के खाते में जमा करा दी जाएगी।
स्वीकृति के इंतजार में चार आधुनिक गौ आश्रय केंद्र
जिले में संचालित 103 अस्थायी गौ आश्रय केंद्रों के लिए स्वीकृत बजट का पूरा खर्च हुआ। इसकी मदद से 23 हजार निराश्रित गौवंश की क्षमता से अधिक 29500 निराश्रित गौवंश को आसरा मिला है। इसके लिए जनवरी तक 4 करोड़ की राशि खर्च हो चुकी है। इस दौरान 3.60 लाख की लागत से निर्मित होने वाले चार आधुनिक गौ आश्रय केंद्रों के निर्माण का प्रस्ताव भी स्वीकृति के लिए वित्त विभाग को भेजा गया है। अगर 31 मार्च से पहले इसके खर्च की अनुमति मिलती है तो निर्माण कार्य पूरा कराया जाएगा। इसके साथ ही वर्तमान वित्तीय वर्ष में गोशालाओं में संरक्षित गोवंश से प्राप्त गोबर से जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ ही गोमूत्र को संकलित और संरक्षित करइसे व्यावसायिक ब्रांड के तौर पर विकसित कराने का कार्य भी शुरू हुआ।
निजी शौचालयों के दो हजार पात्र आवेदकों का इंतजार
निजी शौचालयों के लिए स्वीकृत अनुदान राशि मेें से दो हजार शौचालयों की खर्च राशि 2.40 करोड़ रुपये अभी तक पात्रों का आवेदन न मिलने से बचे हुए हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 में जिले में 5500 लाभार्थियों को निजी शौचालय निर्माण के लिए 6.60 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई थी, लेकिन विभागीय स्तर से लगातार आवेदन मांगने के बाद भी अब तक 3500 पात्रों ने ही शौचालय निर्माण को आवेदन कर स्वीकृत राशि प्राप्त की, जबकि दो हजार पात्र आवेदकों का अभी भी इंतजार है। दूसरी तरफ सामुदायिक शौचालय निर्माण के लिए 494 ग्राम पंचायतों को चिह्नित किया गया था। इसमें से 441 में निर्माण कार्य पूरा करा जियो टैगिंग बाद इन्हें क्रियाशील भी कर दिया गया है। सीडीओ प्रभाष कुमार ने बताया कि 53 अन्य शौचालयों का निर्माण कार्य भी 31 मार्च तक पूरा करा संचालन के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सौंपा जाएगा। इस मद में प्रत्येक सामुदायिक शौचालय के निर्माण को 6 से 7 लाख की राशि स्वीकृत हुई थी।

वित्तीय वर्ष 2020-21 में विभिन्न कार्यों के लिए स्वीकृत बजट राशि मिलने व खर्च करने पर कोरोना का साया रहा। पंचायत भवन निर्माण योजना, गौवंश आश्रय केंद्र व घरों में शौचालय निर्माण के लिए स्वीकृत बजट राशि मिलने के बाद भी इससे जुड़े कार्यों की रफ्तार सुस्त रही। हालांकि जिले के ग्रामीण इलाकों में संचालित सीएम आवास योजना, पीएम आवास योजना (ग्रामीण), सामुदायिक शौचालय निर्माण योजना का शत प्रतिशत बजट खर्च हुआ है।

89 में से सिर्फ 23 गांवों में बने पंचायत भवन

31 मार्च को खत्म हो रहे वर्तमान वित्तीय वर्ष में जिले के 89 गांवों को पंचायत भवन बनाने के लिए वित्तीय सहमति मिली थी। इसके तहत चिह्नित गांवों में प्रत्येक पंचायत भवन के निर्माण पर खर्च होने वाली 15 से 20 लाख की राशि कार्य प्रगति के आधार पर निर्गत होनी थी। विभागीय अधिकारी बताते हैं कि बीते साल मार्च के बाद शुरू हुए कोरोना काल के कारण सितंबर तक इस योजना की मद में स्वीकृत कोई राशि नहीं मिली। अक्तूबर में पैसे मिलने के बाद अब तक 23 गांवों में ही पंचायत भवन का निर्माण पूरा हो पाया है। जबकि 32 गांवों में छत बनाने तक का काम हुआ है। 34 गांवों में बजट स्वीकृति के बाद भी पंचायत भवन का निर्माण अभी तक शुरू भी नहीं हो पाया। मुख्य विकास अधिकारी प्रभाष कुमार भी मानते हैं कि निर्माण कार्य काफी धीमा रहा। अब इसकी नियमित निगरानी करा अधूरे पड़े 32 गांवों के पंचायत भवन के निर्माण को 31 मार्च तक पूरा कराने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।

दोनों आवासीय योजनाओं का रिकॉर्ड बेहतर

ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक तौर से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए संचालित सीएम आवास योजना व पीएम आवास योजना (ग्रामीण) में स्वीकृत बजट राशि का शत प्रतिशत खर्च लाभार्थियों तक पहुंचा। कोरोना के कारण नवंबर में निर्गत हुई इस मद की राशि में सीएम आवास योजना में बनने वाले 82 भवनों के चयनित लाभार्थियों को प्रति आवास 1.20 लाख की राशि मिलनी थी। इसमें से सभी लाभार्थियों को अभी तक 40 हजार की पहली और 70 हजार की दूसरी किस्त उपलब्ध करा दी गई है। 10 हजार की बची तीसरी किस्त भी 31 मार्च से पहले हर लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर हो जाएगी। इसी तरह पीएम आवास योजना (ग्रामीण) में आठ ब्लॉकों में 4826 लाभार्थियों को प्रति आवास मिलने वाली 1.20 लाख की राशि में से 40 हजार की पहली किस्त सभी के खाते में जबकि 70 हजार की दूसरी किस्त 300 लाभार्थियों के खाते में जमा हो चुकी है। इस योजना में भी 31 मार्च तक स्वीकृत शत प्रतिशत बजट राशि लाभार्थियों के खाते में जमा करा दी जाएगी।

स्वीकृति के इंतजार में चार आधुनिक गौ आश्रय केंद्र

जिले में संचालित 103 अस्थायी गौ आश्रय केंद्रों के लिए स्वीकृत बजट का पूरा खर्च हुआ। इसकी मदद से 23 हजार निराश्रित गौवंश की क्षमता से अधिक 29500 निराश्रित गौवंश को आसरा मिला है। इसके लिए जनवरी तक 4 करोड़ की राशि खर्च हो चुकी है। इस दौरान 3.60 लाख की लागत से निर्मित होने वाले चार आधुनिक गौ आश्रय केंद्रों के निर्माण का प्रस्ताव भी स्वीकृति के लिए वित्त विभाग को भेजा गया है। अगर 31 मार्च से पहले इसके खर्च की अनुमति मिलती है तो निर्माण कार्य पूरा कराया जाएगा। इसके साथ ही वर्तमान वित्तीय वर्ष में गोशालाओं में संरक्षित गोवंश से प्राप्त गोबर से जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ ही गोमूत्र को संकलित और संरक्षित करइसे व्यावसायिक ब्रांड के तौर पर विकसित कराने का कार्य भी शुरू हुआ।

निजी शौचालयों के दो हजार पात्र आवेदकों का इंतजार

निजी शौचालयों के लिए स्वीकृत अनुदान राशि मेें से दो हजार शौचालयों की खर्च राशि 2.40 करोड़ रुपये अभी तक पात्रों का आवेदन न मिलने से बचे हुए हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 में जिले में 5500 लाभार्थियों को निजी शौचालय निर्माण के लिए 6.60 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई थी, लेकिन विभागीय स्तर से लगातार आवेदन मांगने के बाद भी अब तक 3500 पात्रों ने ही शौचालय निर्माण को आवेदन कर स्वीकृत राशि प्राप्त की, जबकि दो हजार पात्र आवेदकों का अभी भी इंतजार है। दूसरी तरफ सामुदायिक शौचालय निर्माण के लिए 494 ग्राम पंचायतों को चिह्नित किया गया था। इसमें से 441 में निर्माण कार्य पूरा करा जियो टैगिंग बाद इन्हें क्रियाशील भी कर दिया गया है। सीडीओ प्रभाष कुमार ने बताया कि 53 अन्य शौचालयों का निर्माण कार्य भी 31 मार्च तक पूरा करा संचालन के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सौंपा जाएगा। इस मद में प्रत्येक सामुदायिक शौचालय के निर्माण को 6 से 7 लाख की राशि स्वीकृत हुई थी।



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