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Medical Equipment – अब मैन पॉवर होने पर ही खरीदे जा सकेंगे चिकित्सा उपकरण


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लखनऊ। चिकित्सा संस्थानों को अब उपकरण खरीदने से पहले मैनपॉवर और उसे लगाने के स्थान के बारे में विस्तृत ब्योरा देना होगा। इस संबंध में गाइडलाइन जारी कर दी गई है। शासन से मिले निर्देश के बाद केजीएमयू के वित्त नियंत्रक ने सभी विभागाध्यक्षों को पत्र भेजा है। लोहिया संस्थान व एसजीपीजीआई में भी यह आदेश जारी हो गया है।
चिकित्सा संस्थानों में लाखों के उपकरण खरीद लिए जाते हैं, लेकिन खरीद के बाद इन्हें स्थापित करने और मैनपॉवर स्वीकृत कराने में लंबा वक्त लग जाता है। ऐसे में उपकरण साल से दो साल तक पड़े रहते हैं। उपकरणों का सही समय पर उपयोग नहीं होने पर उनके इंस्टालेशन का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है, जबकि खरीद के समय पर ही इंस्टालेशन होने पर संबंधित कंपनी अतिरिक्त चार्ज नहीं लेती और उनकी वारंटी भी बनी रहती है। इसीलिए शासन ने इस पर गाइडलाइन जारी की है।
वित्त नियंत्रक ने विभागाध्यक्षों को भेजा पत्र
केजीएमयू के वित्त नियंत्रक ने विभागाध्यक्षों को कहा है कि किसी भी विभाग में कोई भी चिकित्सा उपकरण खरीदने से पहले उसका विस्तृत ब्यौरा देना होगा। यह भी बताना होगा कि संबंधित उपकरण खरीदने की जरूरत क्यों है और कितने मरीज हो को फायदा मिलेगा। उपकरण चलाने के लिए मैन पावर व उसे लगाने के स्थान की भी जानकारी देनी होगी। इसके बाद ही वित्त विभाग किसी भी उपकरण की खरीद से संबंधित फाइल को अंतिम रूप देगा।
कोविड काल में मनमाने तरीके से हुई खरीद
सूत्र बताते हैं कि कोविड-19 का हवाला देकर विभिन्न चिकित्सा संस्थानों ने ऐसे उपकरण खरीद लिए हैं, जिनका अभी तक कोई उपयोग नहीं हो पाया है। इस पर शासन ने नाराजगी जताई है। कोविड-19 के नाम पर मनमानी तरीके से होने वाले खर्च पर रोक लगाने के लिए ही यह आदेश जारी किया गया है।

लखनऊ। चिकित्सा संस्थानों को अब उपकरण खरीदने से पहले मैनपॉवर और उसे लगाने के स्थान के बारे में विस्तृत ब्योरा देना होगा। इस संबंध में गाइडलाइन जारी कर दी गई है। शासन से मिले निर्देश के बाद केजीएमयू के वित्त नियंत्रक ने सभी विभागाध्यक्षों को पत्र भेजा है। लोहिया संस्थान व एसजीपीजीआई में भी यह आदेश जारी हो गया है।

चिकित्सा संस्थानों में लाखों के उपकरण खरीद लिए जाते हैं, लेकिन खरीद के बाद इन्हें स्थापित करने और मैनपॉवर स्वीकृत कराने में लंबा वक्त लग जाता है। ऐसे में उपकरण साल से दो साल तक पड़े रहते हैं। उपकरणों का सही समय पर उपयोग नहीं होने पर उनके इंस्टालेशन का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है, जबकि खरीद के समय पर ही इंस्टालेशन होने पर संबंधित कंपनी अतिरिक्त चार्ज नहीं लेती और उनकी वारंटी भी बनी रहती है। इसीलिए शासन ने इस पर गाइडलाइन जारी की है।

वित्त नियंत्रक ने विभागाध्यक्षों को भेजा पत्र

केजीएमयू के वित्त नियंत्रक ने विभागाध्यक्षों को कहा है कि किसी भी विभाग में कोई भी चिकित्सा उपकरण खरीदने से पहले उसका विस्तृत ब्यौरा देना होगा। यह भी बताना होगा कि संबंधित उपकरण खरीदने की जरूरत क्यों है और कितने मरीज हो को फायदा मिलेगा। उपकरण चलाने के लिए मैन पावर व उसे लगाने के स्थान की भी जानकारी देनी होगी। इसके बाद ही वित्त विभाग किसी भी उपकरण की खरीद से संबंधित फाइल को अंतिम रूप देगा।

कोविड काल में मनमाने तरीके से हुई खरीद

सूत्र बताते हैं कि कोविड-19 का हवाला देकर विभिन्न चिकित्सा संस्थानों ने ऐसे उपकरण खरीद लिए हैं, जिनका अभी तक कोई उपयोग नहीं हो पाया है। इस पर शासन ने नाराजगी जताई है। कोविड-19 के नाम पर मनमानी तरीके से होने वाले खर्च पर रोक लगाने के लिए ही यह आदेश जारी किया गया है।



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