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Mixing Corona Vaccine Latest News Update; Mixing Corona Vaccine, AIIMS Chief Dr Randeep Guleria, AIIMS Chief, AIIMS | AIIMS चीफ बोले- डेल्टा+ से सुरक्षा के लिए वैक्सीन मिक्सिंग भी विकल्प, इससे इम्युनिटी बढ़ सकती है, पर अभी रिसर्च जरूरी


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नई दिल्ली9 मिनट पहले

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कोरोना के ज्यादा एग्रेसिव डेल्टा और डेल्टा प्लस जैसे वैरिएंट के खिलाफ लड़ने के लिए वैक्सीनों की मिक्सिंग एक ऑप्शन हो सकती है। ये कहना है कि एम्स के चीफ डॉ. रणदीप गुलेरिया का। उन्होंने कहा कि ये निश्चित तौर पर एक रास्ता हो सकता है, लेकिन इस पर किसी फैसले से पहले हमें और डेटा की जरूरत होगी।

पिछले महीने सरकार ने भी कहा था कि वह वैक्सीनों के मिश्रण के विकल्प पर विचार कर रही है। नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने कहा था कि म्यूटेटेड वैरिएंट से सुरक्षा और वैक्सीन की कवरेज बढ़ाने के लिए हम ये कदम उठा सकते हैं। इस पर टेस्ट के नतीजे कुछ महीनों में आने की उम्मीद है।

न्यूज वेबसाइट एनडीटीवी से बातचीत में डॉ. गुलेरिया ने कहा कि शुरुआती स्टडी कहती हैं कि वैक्सीनों का मिश्रण भी एक विकल्प हो सकता है, पर अभी हमें डेटा चाहिए। कौन सा कॉम्बिनेशन अच्छा होगा, इस पर अभी रिसर्च की जरूरत है। पर हां, ये निश्चित रूप से एक संभावना है। वैक्सीनों के मिश्रण पर दूसरे देशों में भी प्रयोग किए जा रहे हैं।

डेल्टा के खिलाफ सिंगल डोज काफी नहीं- गुलेरिया
डॉ. गुलेरिया ने कहा कि डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ सिंगल डोज शायद काफी नहीं होगी। रिसर्च भी कहती हैं कि सिंगल डोज 33 फीसदी तक सुरक्षा देती है। दोनों डोज देने पर 90 फीसदी तक लोग सुरक्षित होते हैं। गुलेरिया ने कहा कि ये हमारे लिए चिंता की बात है कि पहली डोज डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ शायद काफी नहीं होगी। ऐसे में हमें दूसरी डोज दिए जाने की जरूरत है। पर इसे काफी पहले दिया जाना होगा, ताकि सुरक्षा निश्चित की जा सके।

उन्होंने कहा कि अभी हमारी नजर डेल्टा वैरिएंट के नए स्ट्रेन पर बनी हुई है। हम डेल्टा प्लस वैरिएंट को काफी करीब से मॉनिटर कर रहे हैं। अभी डेल्टा प्लस उतना प्रभावी नहीं है, पर डेल्टा वैरिएंट है। हमें डेल्टा प्लस को सतर्क रहकर ट्रैक करने की जरूरत है। इसकी जीनोम सीक्वेंसिंग की जरूरत है ताकि पता चल सके कि ये हमारी आबादी पर किस तरह असर कर रहा है।

वैक्सीन मिक्सिंग पर दो रिपोर्ट पब्लिश हुईं

  • पहली: द लैंसेट जर्नल में पिछले महीने एक ब्रिटिश स्टडी पब्लिश हुई थी। इसमें पहले लोगों को एस्ट्राजेनिका यानी कोवीशील्ड की डोज दी गई। इसके बाद दूसरी डोज फाइजर की दी गई थी। इसके कुछ समय के लिए साइड इफेक्ट हुए थे, पर ये बेहद हल्के थे। हालांकि, इसके प्रभाव पर अभी डेटा मिलना बाकी है।
  • दूसरी: इससे पहले स्पेन में हुई स्टडी में सामने आया था कि कोवीशील्ड और फाइजर की डोज मिक्स करने पर ये सुरक्षित और प्रभावी पाई गई थीं।

तीसरी लहर का दूसरी लहर जितना खतरनाक होने की आशंका कम- गुलेरिया
डॉ. गुलेरिया ने कहा तीसरी लहर को लेकर देश में बहुत सारी बहस चल रही हैं कि तीसरी वेव दूसरी से भी ज्यादा खतरनाक होगी। मुझे लगता है कि आने वाली लहर उतनी बुरी नहीं होगी। हमें दूसरी लहर से सबक लेकर तीसरी लहर से निपटना होगा। ICMR और UK के इम्पीरियल कॉलेज लंदन की एक स्टडी इशारा करती है कि तीसरी वेव तभी बहुत ज्यादा खराब साबित होगी, जब मौजूदा समय में सामने आ रही इम्यूनिटी बेहद बुरी स्थिति में पहुंच जाएगी।

डेल्टा प्लस के खिलाफ मौजूदा वैक्सीन को लेकर जाहिर की जा रही शंकाओं पर गुलेरिया ने कहा कि अभी हमें इस पर और ज्यादा डेटा की आवश्यकता है कि किस तरह से नया वैरिएंट बचने की क्षमता रखता है। इन आशंकाओं से हटकर सबसे पहले वैक्सीन लगवाएं। अगर आप ने वैक्सीन की दोनों डोज लगवाई हैं तो आप संक्रमित हो सकते हैं पर इसका प्रभाव कम होगा।

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