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Monitoring of every infected through ward management in Kerala; Self-sufficient in making oxygen | केरल में वार्ड मैनेजमेंट के जरिए हर संक्रमित की निगरानी; ऑक्सीजन बनाने में आत्मनिर्भर


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तिरुवनंतपुरम2 घंटे पहले

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राज्य में रोज 35 हजार केस, एक हफ्ते की संक्रमण दर 27% हुई। - Dainik Bhaskar

राज्य में रोज 35 हजार केस, एक हफ्ते की संक्रमण दर 27% हुई।

  • नए मरीज, संक्रमण दर बढ़ने के बावजूद मृत्युदर सबसे कम रखने में कैसे कामयाब हुआ केरल? ऑक्सीजन संकट क्यों नहीं आया ?

केरल कोविड-19 की दूसरी लहर से जूझ रहा है। यहां अब 35 हजार केस रोज आ रहे हैं। 4.23 लाख एक्टिव केस हैं। इनमें 41,971 हॉस्पिटल में हैंं। बावजूद इसके मृत्युदर 0.3% है, जो देश में सबसे कम है। एक साल में राज्य ने खुद को ऑक्सीजन उत्पादन में भी आत्मनिर्भर बनाया है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री के के शैलजा कहती हैं कि हेल्थ विशेषज्ञों ने पहली लहर के शुरुआत में ही सलाह दी थी कि भविष्य में कोविड मरीजों के इलाज के लिए बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन की जरूरत पड़ेगी। तभी से हमने उत्पादन बढ़ाना शुरू किया। केंद्र के पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) ने मदद की।

राज्य में 11 एयर सेपरेशन यूनिट्स (एएसयू) में से पांच निष्क्रिय पड़े थे। हमने मिशन मोड पर काम किया। एक साल में सभी 11 यूनिट्स में उत्पादन शुरू हो गया है। समय पर मिली विशेषज्ञों की साल और पेसो से मिले टेक्निकल बैकअप की वजह से आज सरप्लस ऑक्सीजन है। तमिलनाडु को 74 टन और कर्नाटक को 30 टन ऑक्सीजन भेज रहे हैंै।

जनसहयोग मॉडल… वॉलेंटियर की फौज दिन-रात सेवा में जुटी हुई है

1 आशा वर्कर्स, वार्ड काउंसिलर व स्वास्थ्य विभाग की नजर
पंचायत, नगर निगम व कॉरपोरेशन को फूड सिक्योरिटी से लेकर हॉस्पिटल की व्यवस्था में जोड़ा है। वार्ड स्तर पर मैनेजमेंट कमेटी वॉलेंटियर्स तैयार करती है। आशा वर्कर्स, वार्ड काउंसिलर व स्वास्थ्य विभाग की टीम मरीज की हर जरूरत को पूरा करती है।

2 आरआरटी खाने से लेकर भर्ती कराने की व्यवस्था कर रही
हर वार्ड में 25 सदस्यीय रैपिड रेस्पांस टीम (आरआरटी) है। ये संक्रमित लोगों के घरों में जरूरी सामान राशन, सब्जी, दवा पहुंचा रहे हैं। तबियत नाजुक होने पर यही टीम उनके लिए हॉस्पिटल में भर्ती करवाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करती है।

3 सॉफ्टवेयर से टीम को मिलती है क्षेत्र के नए मरीज की खबर
होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों के यहां डॉक्टर, नर्स नियमित जाते हैं। मेडिकल वालेंटियर की भी टीम भी है। विशेष साफ्टवेयर की मदद से इन्हें अपने वार्ड के संक्रमितों का पता चलता है। ये तत्काल उनसे बात कर उपचार शुरू कराते हैं।

4 हर दूसरे का टेस्ट, वैक्सीनेशन में दूसरी डोज वालों को मौका
केरल में 1.7 करोड़ टेस्ट हो चुुके हैं। यानी हर दूसरे व्यक्ति का टेस्ट हुआ है। 19 लाख संक्रमित मिले हैं। संक्रमण दर 11.17% है। 7 दिनों की पॉजिटिविटी दर 27.12% है। वैक्सीन की कमी की वजह से सिर्फ दूसरी डोज वालों को प्राथमिकता दी जा रही है।

तैयारीः अस्पतालों को 1000 ली. ऑक्सीजन टैंक बनाने के निर्देश, स्कूल बसों में इलाज

  • राज्य में आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी उपलब्ध एम्बुलेंस, सार्वजनिक भवन और अन्य सामान्य सुविधाओं की भी व्यवस्था की है। यहां तक ​​कि स्कूल बसों को कोविड उपचार केंद्रों में बदला जाएगा।
  • पंचायत और नगर निगम को निर्देश दिए हैं कि अधिक से अधिक कम्युनिटी किचन खोले जाएं ताकि जरूरतमंदों को भोजन मिल सके। अगले दो महीने तक फ्री राशन और खाद्य पदार्थों की व्यवस्था की जाएगी।
  • राज्य में फिलहाल 9 दिन का लॉकडाउन है। ऑनलाइन या ऑफलाइन ऑर्डर देने वाले लोगों के घर फ्री होम डिलीवरी के लिए वॉलेंटियर की टीम तैयार की गई है।
  • सभी छोटे अस्पतालों को परिसर में 1000 लीटर ऑक्सीजन टैंक बनाने का आदेश दिया गया है।

पेसो में उप मुख्य नियंत्रक डॉ. आर वेणुगोपाल बताते हैं कि बीते साल अप्रैल में 11 यूनिट्स शुरू हो गई थी। इनसे 44 टन ऑक्सीजन बन रही है। पलक्कड़ स्थित निजी फर्म आईनॉक्स 147 टन, केरल मिनरल्स एंड मेटल्स 7 टन व कोचीन शिपयार्ड 5.45 टन ऑक्सीजन बना रहा है। केरल में रोज 204 टन ऑक्सीजन बन रही है। जरूरत 98.61 टन की है।

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