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Mountain Of Garbage In Ghaila Will End In One Year – एक साल में खत्म होगा घैला में कूड़े का पहाड़, काम शुरू, नगर आयुक्त ने किया निरीक्षण


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बसंतकुंज और प्रबंधनगर योजना के बीच गोमती नदी किनारे मौजूद घैला साइट पर कूड़े के पहाड़ नगर निगम अगले एक साल में खत्म करेगा। यहां करीब 3.5 लाख टन कूड़ा जमा है। इस कूड़े को पेट्रोकेमिकल ईंधन बनाने के बाद बचे भाग को लैंडफिल मैटेरियल की तरह उपयोग किया जाएगा।
बृहस्पतिवार को नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी घैला साइट पर काम देखने पहुंचे। यहां पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण ने बताया कि कूड़ा खत्म करने के लिए बायोरेमेडिएशन प्रोेसेस पर काम शुरू करा दिया गया है। दो मशीनें भी यहां सेग्रीगेशन का काम करने के लिए लगने को आ गई हैं। इनको अगले दो दिन में लगाकर काम शुरू कर दिया जाएगा। अभी मैन्युअल तरीके से सेग्रीगेशन किया जा रहा है। इसके बाद प्लास्टिक व दूसरे कचरे से आरडीएफ ब्लॉक बनेंगे। इनका उपयोग ईंधन की तरह होता है। नगर निगम एक साल के अंदर यहां कचरा पूरी तरह खत्म कर देगा। यह काम मुस्कान ज्योति संस्था को जल निगम के माध्यम से दिया गया है।
आसान नहीं होगा काम
एक साल में कूड़ा खत्म करने का दावा भले ही नगर निगम कर रहा हो। इसके उलट रोजाना करीब 1000 टन कूड़ा निजी संस्था को प्रोसेस करना होगा। पूरी तरह ऑटोमेटिक होने का दावा किए जा रहे शिवरी प्लांट पर भी करीब 1500 टन कूड़ा प्रोसेस होने की क्षमता है। यहां भी कूड़ा निस्तारण 100 फीसदी नहीं हो पा रहा है। दूसरा, चोरी-छिपे घैला साइट पर नगर निगम की गाड़ियों का कूड़ा डालना बंद कराना होगा।
शिवरी प्लांट पर मिला कूड़े का ढेर
पंकज भूषण ने बताया कि शिवरी प्लांट पिछले दिनों ठीक से काम नहीं किया। इसकी वजह से वहां करीब चार लाख टन कूड़ा इकट्ठा हो गया है। नगर आयुक्त ने अब ईकोग्रीन को इसे तेजी से निस्तारित करने को कहा है। वहीं कूड़े से निकल रहे लीचेट को मशीन से खींचकर इसे कूड़े के ऊपर ही स्प्रे कराने को कहा गया है, जिससे लीचेट खत्म हो। वहीं आसपास के इलाके में प्रदूषण न फै लाए। लैंडफि ल साइट का काम भी उन्होंने देखा। आसपास कूड़े से हो रही गंदगी भी खत्म कराने के लिए कंपनी को कहा गया है।

बसंतकुंज और प्रबंधनगर योजना के बीच गोमती नदी किनारे मौजूद घैला साइट पर कूड़े के पहाड़ नगर निगम अगले एक साल में खत्म करेगा। यहां करीब 3.5 लाख टन कूड़ा जमा है। इस कूड़े को पेट्रोकेमिकल ईंधन बनाने के बाद बचे भाग को लैंडफिल मैटेरियल की तरह उपयोग किया जाएगा।

बृहस्पतिवार को नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी घैला साइट पर काम देखने पहुंचे। यहां पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण ने बताया कि कूड़ा खत्म करने के लिए बायोरेमेडिएशन प्रोेसेस पर काम शुरू करा दिया गया है। दो मशीनें भी यहां सेग्रीगेशन का काम करने के लिए लगने को आ गई हैं। इनको अगले दो दिन में लगाकर काम शुरू कर दिया जाएगा। अभी मैन्युअल तरीके से सेग्रीगेशन किया जा रहा है। इसके बाद प्लास्टिक व दूसरे कचरे से आरडीएफ ब्लॉक बनेंगे। इनका उपयोग ईंधन की तरह होता है। नगर निगम एक साल के अंदर यहां कचरा पूरी तरह खत्म कर देगा। यह काम मुस्कान ज्योति संस्था को जल निगम के माध्यम से दिया गया है।

आसान नहीं होगा काम

एक साल में कूड़ा खत्म करने का दावा भले ही नगर निगम कर रहा हो। इसके उलट रोजाना करीब 1000 टन कूड़ा निजी संस्था को प्रोसेस करना होगा। पूरी तरह ऑटोमेटिक होने का दावा किए जा रहे शिवरी प्लांट पर भी करीब 1500 टन कूड़ा प्रोसेस होने की क्षमता है। यहां भी कूड़ा निस्तारण 100 फीसदी नहीं हो पा रहा है। दूसरा, चोरी-छिपे घैला साइट पर नगर निगम की गाड़ियों का कूड़ा डालना बंद कराना होगा।

शिवरी प्लांट पर मिला कूड़े का ढेर

पंकज भूषण ने बताया कि शिवरी प्लांट पिछले दिनों ठीक से काम नहीं किया। इसकी वजह से वहां करीब चार लाख टन कूड़ा इकट्ठा हो गया है। नगर आयुक्त ने अब ईकोग्रीन को इसे तेजी से निस्तारित करने को कहा है। वहीं कूड़े से निकल रहे लीचेट को मशीन से खींचकर इसे कूड़े के ऊपर ही स्प्रे कराने को कहा गया है, जिससे लीचेट खत्म हो। वहीं आसपास के इलाके में प्रदूषण न फै लाए। लैंडफि ल साइट का काम भी उन्होंने देखा। आसपास कूड़े से हो रही गंदगी भी खत्म कराने के लिए कंपनी को कहा गया है।



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