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Nag Panchami on 13th August; Do not worship a snake and do not even give it milk, worship the idol or picture of Nagdev on naag panchami, nag panchami 2021 | 13 अगस्त को नाग पंचमी; जीवित सांप की पूजा न करें और उसे दूध भी न पिलाएं, नागदेव की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा करें


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एक घंटा पहले

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शुक्रवार, 13 अगस्त को नाग पंचमी है। हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी पर शिव जी के साथ ही नाग देवता की भी विशेष पूजा की जाती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य और शिवपुराण कथाकार पं. मनीष शर्मा के मुताबिक इस दिन जीवित सांप की पूजा करने से बचना चाहिए। नाग पंचमी पर नागदेव की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा करनी चाहिए। दूध भी प्रतिमा पर ही चढ़ाना चाहिए। सांप को दूध पिलाने से भी बचें। जीवित सांप के लिए दूध विष की तरह होता है।

घर पर ही सरल स्टेप्स में कर सकते हैं नागदेव की पूजा

भगवान शिव नाग को गले में धारण करते हैं। पंचमी पर शिवजी के साथ नागदेव की भी पूजा करें। नागदेव की प्रतिमा पर दूध अर्पित करें। नागदेव की प्रतिमा का पूजन मंदिर में या घर में ही करना चाहिए।

नाग पूजा में हल्दी को उपयोग जरूर करना चाहिए। धूप, दीप अगरबत्ती जलाकर पूजा करें। मिठाई का भोग लगाएं। नागदेव को नारियल अर्पित करें।

नाग पंचमी पर नागदेव के मंदिर में दर्शन की परंपरा भी है। उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर में नागचंद्रेश्वर भगवान की प्राचीन प्रतिमा है। हर साल नाग पंचमी पर नागचंद्रेश्वर का मंदिर भक्तों के लिए खोला जाता है, लेकिन इस बार कोरोना महामारी की वजह से मंदिर भक्तों के लिए बंद ही रहेगा। नागचंद्रेश्वर भगवान के लाइव दर्शन महाकाल मंदिर की वेबसाइट या एप्लिकेशन पर किए जा सकते हैं।

नाग पंचमी पर कालसर्प दोष की पूजा करने की परंपरा

ज्योतिष में राहु-केतु से संबंधित एक दोष बताया गया है, जिसे कालसर्प दोष कहते हैं। राहु का मुख सर्प समान होने से इसे सर्प दोष भी कहा जाता है। जिन लोगों की कुंडली में ये दोष है, उन्हें राहु-केतु की पूजा करनी चाहिए। हर साल नाग पचंमी पर इस दोष से संबंधित पूजा करने की परंपरा है। ध्यान रखें कालसर्प दोष और सांप का कोई संबंध नहीं है। इस दोष के अशुभ असर से बचने के लिए कभी भी किसी सांप को प्रताडित नहीं करना चाहिए। जीवित सांप के पूजन से बचना चाहिए और न ही उसकी दहन क्रिया करें। ये पाप बढ़ाने वाला काम है। कालसर्प दोष सिर्फ राहु-केतु से संबंधित दोष है। इसके लिए राहु-केतु ग्रहों की पूजा करनी चाहिए।

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