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Narendra Modi UNSC Debate | India PM Modi Prime Minister Narendra Modi Open Debate on UN Security Council | PM बोले- समंदर हमारी साझा धरोहर; समुद्री सुरक्षा ओर कनेक्टिविटी के लिए दुनिया को दिए 5 सिद्धांत


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नई दिल्ली5 मिनट पहले

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) में सम़ुद्री सुरक्षा पर ओपन डिबेट हो रही है। यह मीटिंग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रही है। इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति, यूनाइटेड नेशंस सिस्टम और प्रमुख क्षेत्रीय संगठनों के हाई लेवल ब्रीफर्स हिस्सा ले रहे हैं। यह प्रोग्राम UNSC की वेबसाइट पर लाइव देखा जा सकता है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इसमें शामिल हुए हैं।

अध्यक्ष होने के नाते प्रोग्राम की शुरुआत PM मोदी के संबोधन से हुई। इसमें समुद्री चुनौतियों से निपटने और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए 5 सिद्धांत दिए। उन्होंने कहा कि समंदर हमारी साझा धरोहर है। हमारे समुद्री रास्ते इंटरनेशनल ट्रेड की लाइफ लाइन हैं। सबसे बड़ी बात यही है कि समंदर हमारे प्लैनेट के भविष्य के लिए बहुत अहम है।

समुद्री रास्तों के दुरुपयोग पर चिंता जताई
मोदी ने कहा कि हमारी इस साझा धरोहर को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पाइरेसी और आतंकवाद के लिए समुद्री रास्तों का दुरुपयोग हो रहा है। कई देशों के बीच समुद्री सीमा विवाद हैं। क्लाइमेट चेंज और प्राकृतिक आपदाएं भी इसी डोमेन से जुड़े विषय हैं। इस व्यापक संदर्भ में अपनी साझा सामूहिक धरोहर के संरक्षण और उपयोग के लिए हमें आपसी समझ और सहयोग का एक फ्रेमवर्क बनाना चाहिए। ऐसा फ्रेमवर्क कोई भी देश अकेले नहीं बना सकता। यह साझा कोशिश से ही हो सकता है।

दुनिया को प्रधानमंत्री मोदी के 5 सिद्धांत…

पहला सिद्धांत : हमें मेरिटाइम ट्रेड में बैरियर्स हटाना चाहिए। हम सभी की समृद्धि मेरिटाइम ट्रेड के सक्रिय फ्लो पर निर्भर है। इसमें आई अड़चनें पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती हो सकती हैं। फ्री मेरीटाइम ट्रेड भारत की सभ्यता के साथ अनादि काल से जुड़ा है। हजारों साल पहले सिंधु घाटी सभ्यता का लोथल बंदरगाह समुद्री व्यापार से जुड़ा हुआ था।

प्राचीन समय के स्वतंत्र मेरिटाइम माहौल में ही भगवान बुद्ध का शांति संदेश विश्व में फैल पाया। आज के संदर्भ में भारत ने इस खुले स्वभाव के आधार पर सागर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन दि रीजन का विजन परिभाषित किया है। इस विजन के जरिए हम अपने क्षेत्र में मेरिटाइम सिक्योरिटी का समावेशी ढांचा बनाना चाहते हैं। यह विजन एक सेफ, सिक्योर और स्टेबल मेरिटाइम डोमेन का है। फ्री मेरिटाइम ट्रेड के लिए यह भी जरूरी है कि हम एक दूसरे के नाविकों के अधिकारों का पूरा सम्मान करें।

दूसरा सिद्धांत : समुद्री विवादों का समाधान शांतिपूर्ण और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर ही होना चाहिए। आपसी भरोसे और विश्वास के लिए यह बहुत जरूरी है। इसी माध्यम से हम वैश्विक शांति और स्थिरता सुनिश्चित कर सकते हैं। भारत ने इसी समझ और परिपक्वता के साथ अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ अपनी सीमा को सुलझाया है।

तीसरा सिद्धांत: हमें प्राकृतिक आपदाओं और नॉन स्टेट एक्टर्स की ओर से पैदा की गई समुद्री चुनौतियों का मिलकर सामना करना चाहिए। इस विषय पर क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए भारत ने कई कदम उठाए हैं। साइक्लोन, सुनामी और प्रदूषण संबंधित समुद्री आपदाओं में हम फर्स्ट रिस्पॉन्डर रहे हैं। पाइरेसी को रोकने के लिए भारतीय नौसेना 2008 से हिंद महासागर में पेट्रोलिंग कर रही है। हमने कई देशों को हाइड्रोग्राफिक सर्वे सपोर्ट और समुद्री सुरक्षा में प्रशिक्षण भी दिया है।

चौथा सिद्धांत : हमें समुद्री पर्यावरण और रिसोर्स को संजोकर रखना होगा। हम जानते हैं कि समुद्र का क्लाइमेट पर सीधा असर होता है। इसलिए हमें अपने समुद्री पर्यावरण को प्लास्टिक जैसे प्रदूषण से मुक्त रखना होगा। ओवर फिशिंग और मरीन कोचिंग के खिलाफ साझा कदम उठाने होंगे। हमें ओशन साइंस में भी सहयोग बढ़ाना चाहिए। भारत ने एक महत्वाकांक्षी डीप ओशन मिशन लॉन्च किया है।

पांचवा सिद्धांत : हमें जिम्मेदार समुद्री संपर्क को प्रोत्साहन देना चाहिए। यह साफ है कि समुद्री कारोबार के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना जरूरी है। लेकिन ऐसे प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट में देशों की आर्थिक स्थिति का भी ध्यान रखना होगा। इसके लिए हमें उचित वैश्विक नॉर्म्स और स्टेंडर्ड बनाने चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे विश्वास है कि इन 5 सिद्धांतों के आधार पर समुद्री सुरक्षा का वैश्विक रोडमैप बन सकता है। आज की ओपन डिबेट की सक्रिय भागीदारी यह दिखाती है कि यह विषय सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों के लिए अहम है। इसके साथ मैं आपकी उपस्थिति के लिए सभी का आभार जताता हूं।

भारत को मिली UNSC की अध्यक्षता
UNSC यूनाइटेड नेशंस के 6 प्रमुख अंगों में से एक है। इसकी जिम्मेदारी दुनिया भर में शांति और सुरक्षा बनाए रखना है। भारत की आजादी के 75वें साल में भारत को दुनिया की इस सबसे शक्तिशाली संस्था की अध्यक्षता मिली है। भारत ने एक अगस्त को फ्रांस से यह जिम्मेदारी ली।

एक महीने तक इस पद पर रहने के दौरान भारत की ओर से बुलाई गई बैठकों में एक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। बीते 75 साल में पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री UNSC की किसी बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

भारत का यह 7वां कार्यकाल
भारत जनवरी-2021 में सातवीं बार दिसंबर-2022 तक के लिए UNSC का अस्थायी सदस्य चुना गया है। इसी हैसियत से पहली बार 1950-51 में चुना गया था। फिर 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85 और 1991-92 में चुना गया।

भारत लंबे समय से इस परिषद की स्थायी सदस्यता और इसके ढांचे में सुधार के लिए कोशिश कर रहा है। UNSC में अभी 15 सदस्य हैं। इनमें 5 स्थायी सदस्य- अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन हैं। बाकी 10 अस्थायी सदस्यों का चुनाव हर दो साल में इतने ही कार्यकाल के लिए होता है।

मीटिंग से पहले कैरिबियाई देश के PM पर हमला, मोदी ने निंदा की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेंट विंसेट एंड ग्रेनेडाइंस के प्रधानमंत्री राल्फ गोंजाल्विस पर हुए हमले की निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मैं सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस के प्रधानमंत्री राल्फ गोंजाल्विस पर हुए भीषण हमले की निंदा करता हूं। महामहिम, मैं आपके जल्छ ठीक होने और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं। आज समुद्री सुरक्षा पर होने वाली UNSC की चर्चा में आपकी कमी खलेगी।

सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस कैरिबियाई देश है। यहां गुरुवार को मुख्य विपक्षी दल न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी और दो ट्रेड यूनियन की अगुवाई में करीब 200 लोग नई स्वास्थ्य नीति का विरोध कर रहे थे। इसी दौरान भीड़ में से कोई चीज 74 साल के प्रधानमंत्री राल्फ गोंजाल्विस पर फेंकी गई। जिससे वे घायल हो गए। हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा है।

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