नेपोटिज्म का गढ़ बॉलीवुड ! जानिये कैसे

नेपोटिज्म का गढ़ बॉलीवुड ! जानिये कैसे

नेपोटिज्म उस हालात को कहते हैं जहां योग्यता को नज़रअंदाज करके करीबी, दोस्तों एवं परिवार ‌ के परिजनो को उच्च पद दिया जाता है और दूसरे पेशे में अधिक फायदा होता है. जिसमे योग्यता से ज्यादा रिश्तों को महत्व दिया जाता है. उनको ऐसे पद पर आसीन किया जाता है जिसके वो काबिल भी नहीं होते.
हमारे देश में नेपोटिज्म का मुद्दा हमेशा उठाया जाता है. यहां हर क्षेत्र में नेपोटिज्म सदियों से चल रहा है. फिर चाहे वो राजनीति, फिल्म इंडस्ट्री, खेल जगत, नौकरी अथवा बिजनेस हर क्षेत्र में नेपोटिज्म चलता आ रहा. इसलिए भाई-भतीजावाद तो बहुत आम बात हुई. “राजा का बेटा राजा” भारत देश केे हर क्षेत्र में यही बात लागू होती है.

आए दिन हम खबर सुनते रहते हैं की कम योग्यता वाले लोग भी इसी भाई-भतीजावाद के कारण उच्च पदों पे आसीन हो जाते हैं और जिस प्रतिभा को उस जगह पे वास्तिविकता में होना चाहिए वो हमेशा संघर्ष ही करता रह जाता है। ऐसे लोग हर जगह अपना दबदबा बनाना चाहते हैं और अपने लोगों को ही आगे बढ़ते हुए देखना चाहते हैं। यहाँ असली टैलेंट की कदर ही नहीं होती है। यहाँ लोग बस अपने बच्चों एवं परिवार वालों को आगे बढाने में लगे रहते हैं।

बाॅलीवुड में नेपोटिज्म अपनी सीमा पार कर चुका है।  बाॅलीवुड में नेपोटिज्म का मतलब है जिन एक्टरों का फिल्मी बैकग्राउंड नहीं उन्हें वहां के लोग आगे नहीं बढने देते और अगर कोई अपनी मेहनत से आगे बढ़ जाये तो उसको हमेशा पीछे करने में लगे रहते हैं और उसकी हर जगह बेइज्जती करते हैं और उसका हक मारने की कोशिश में लगे रहते हैं। ऐसे लोग अपने बच्चों को ही स्टार बनाना चाहते हैं जिनके अंदर टैलेंट केे नाम पर कुछ भी नहीं होता।

यहाँ मेहनती लोगों का जो बाहर से आये हैं उनका विरोध किया जाता है ताकि वो मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित हो के ये इंडस्ट्री ही छोड़ दें।
बाॅलीवुड में नेपोटिज्म को बढ़ावा देने में करण जौहर, सलमान खान और ऐसे ही अन्य लोगो के नाम अक्सर ही सुनाई देते रहते है। जानकारों का मानना है कि करण असली टैलंटेड ऐक्टर्स के बजाय बड़े स्टार्स के बच्चों और रिश्तेदारों को मौका देते हैं। इस बात में कितनी सच्चाई है इसपे  तो कोई टिप्पड़ी नहीं की जा सकती किन्तु छन छन के जो तथ्य सामने आ रहे वो इस चमक धमक की दुनियाँ के पीछे का स्याह सत्य सामने ला रहे।

लोगों ने करण जौहर को ट्विटर और इंस्टाग्राम पर अनफॉलो करना शुरू कर दिया। सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या बहुत बड़ा उदाहरण है बाॅलीवुड नेपोटिज्म का। इसका दोषी इसी भाई-भतीजावाद को बताया जा रहा है।  कंगना रनौत ने करण जौहर को सुशांत की मौत के बाद घेरा और कहा कि इनकी गैंग किसी को यहां टिकने नहीं देती। कंगना के वीडियो के बाद करण जौहर को लगातार ट्रोल किया जा रहा है। उनका कहना है कि करण जौहर और ऐसे कई लोग छोटे शहरों से आने वाले लोगों को इंडस्ट्री में टिकने नहीं देते हैं और एक टैलेंटेड इंसान को मानसिक तौर पर इतना प्रताड़ित किया गया कि वो आत्महत्या का रास्ता अख़्तियार  करने को मजबूर हो जाता है। कंगना आगे कहती है कि जिनका यहाँ कोई गॉड फादर नहीं होता उसको ऐसे लोग हर तरह से प्रताड़ित करते है। उन्होंने कहा कि सुशांत के साथ भी ऐसा ही हुआ होगा।
वहीं सलमान खान का नाम भी तेजी से लिया जा रहा है. अभिनव कश्यप ने सलमान खान के परिवार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें परेशान किया गया। सोशल मीडिया पर विवेक ओबेरॉय और अरिजीत सिंह के उदाहरण दिए जा रहे हैं। सलमान खान का एक पुराना वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें वो पूछ रहे हैं कि कौन सुशांत सिंह राजपूत? और सुशांत को सलमान खान फिल्म्स की तरफ से भी बैन किया गया था। इसके अलावा कपूर खानादान और राकेश रोशन भी इस भाई-भतीजावाद में शामिल हैं। बॉलीवुड में पहले भी कपूर खानदान पर नेपोटिज्म के आरोप लगते रहे हैं। वहीं राकेश रोशन पर आरोप है कि वो सिर्फ अपने बेटे को ही काम देते हैं। सुशांत के निधन के बाद यह खुलासा किया हुआ कि सुशांत ने छिछोरे के बाद 7 फिल्में साइन की थी लेकिन 6 महीने के अंदर उनके हाथ से सभी फिल्में निकल गई थीं जिसकी वजह से एक टैलेंडेट एक्टर से फिल्म इंडस्ट्री को हाथ धोना पड़ा।

करण जौहर तो बस एक उदाहरण हैं। सलमान खान और संजय दत्त जैसे लोगों के फिल्मी जीवन में तो न जाने कितने गैर-कानूनी काम और अपराध दर्ज़ हैं। और स्त्री द्वेष से भरी न जाने कितनी ही और बातें भी दर्ज़ हैं। अपराध तो इनके साबित भी हो चुके हैं। लेकिन वे अब भी अपने करियर में खूब सफल हैं।  ऐसे लोग बॉलीवुड में सिर्फ़ सफल ही नहीं हैं बल्कि पूरी फिल्म-इंडस्ट्री को अपने वश में भी कर रखा है। बॉलीवुड दिखाता तो ऐसे है जैसे वहाँ असल टैलेंट की कद्र है और सबके लिए बराबर का मौका है परन्तु असल में पूरा मामला ही बिलकुल उलटा है।  तमाम अपराधों के आरोपी साबित हो जाने के बाद आज भी सलमान खान बॉलीवुड के सुपरस्टार हैं।  दर्शकों को इस बात का बिलकुल अंदाज़ा नहीं है कि असल में इस इंडस्ट्री को कौन लोग अपने इशारे पर नचा रहे हैं। कहा तो यहाँ तक जाता है कि बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड का पैसा बड़े पैमाने पर लगा है और कोई भी सीधे तरीके से इस इंडस्ट्री में बिना ऐसे लोगो का सर पर हाथ हुए आगे नहीं बढ़ सकता। इन लोगो के लिए टैलेंट मायनें नहीं रखता। कई ऐसी फिल्म एक्ट्रेस और मॉडल्स है जिनके बारे में ये कहा जाता है कि वो सिर्फ इसलिए इस इंडस्ट्री में सर्वाइव नहीं कर पायी क्योकि उन्होंने अपनी देह का आत्मसमर्पण ऐसे सफेदपोश अपराधियों के सामने नहीं किया। कैमरे में एवं कैमरे के पीछे की दुनियाँ में जमीन आसमान का अंतर होता है और सुशांत के केस ने फिर एक बार इसको सही साबित किया।

अगर बॉलीवुड सच में चाहता है कि हम आगे चल के मनोरंजन की दुनियाँ के सिरमौर बने जैसे कि आज हॉलीवुड है तो उसे इस नेपोटिज्म की राजनीति से आगे बढ़ना होगा और वास्तविक टैलेंट को उसका असली हक़ और पहचान देना ही होगा, नहीं तो पता नहीं आगे कितने सुशांत का हम यूँही दर्दनाक अंत देखेंगे।

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